पुणे। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने फार्मा कंपनी सिप्ला के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुणे के वाडकी स्थित उसके वेयरहाउस का ड्रग सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस रद्द कर दिया है। यह कार्रवाई दवा की पैकेजिंग में कथित नियमों के उल्लंघन और वेयरहाउस में भंडारण तथा रिकॉर्ड प्रबंधन से जुड़ी खामियां सामने आने के बाद की गई। आदेश के बाद इस केंद्र से दवाओं की बिक्री और वितरण पर रोक लगा दी गई है।
एफडीए की कार्रवाई का मुख्य आधार Reactin Plus टैबलेट से जुड़ी जांच बताई गई है। जांच के दौरान दवा की पैकेजिंग पर ऐसे दावे और चित्र पाए गए, जिन्हें नियामकीय मानकों के तहत अनधिकृत माना गया। दवाओं की पैकेजिंग पर दर्ज जानकारी और प्रचार संबंधी दावों को निर्धारित नियमों के अनुरूप होना जरूरी है। एफडीए ने पैकेजिंग में पाए गए इन कथित उल्लंघनों को गंभीरता से लिया।
जांच केवल दवा की पैकेजिंग तक सीमित नहीं रही। वाडकी स्थित वेयरहाउस के निरीक्षण के दौरान दवाओं के भंडारण से जुड़े मानकों में भी कमियां सामने आईं। इसके अलावा दस्तावेजीकरण और इन्वेंट्री प्रबंधन की व्यवस्था में भी खामियां पाई गईं। दवा वितरण केंद्रों में इन प्रक्रियाओं का महत्व इसलिए अधिक होता है क्योंकि दवाओं की गुणवत्ता, उपलब्धता और आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखना नियामकीय अनुपालन का अहम हिस्सा है।
एफडीए के मुताबिक, जांच में सामने आई विभिन्न कमियों को देखते हुए वेयरहाउस से दवा बिक्री और वितरण की अनुमति जारी रखना उचित नहीं माना गया। इसके बाद संबंधित ड्रग सेल और डिस्ट्रीब्यूशन लाइसेंस को रद्द करने का आदेश जारी किया गया। इस फैसले के साथ वाडकी केंद्र से दवा आपूर्ति की गतिविधियों पर भी रोक प्रभावी हो गई।
Reactin Plus की पैकेजिंग से जुड़ा मामला इस कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा है। किसी दवा के पैक पर लिखी जानकारी उपभोक्ताओं और स्वास्थ्य पेशेवरों के लिए उत्पाद की पहचान और उसके इस्तेमाल से जुड़ा महत्वपूर्ण माध्यम होती है। इसलिए पैकेजिंग पर ऐसे दावे या चित्र जो स्वीकृत मानकों के अनुरूप नहीं हों, नियामकीय जांच के दायरे में आते हैं।
दूसरी ओर, वेयरहाउस में मिली भंडारण संबंधी खामियां भी दवा नियमन के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। फार्मास्युटिकल उत्पादों को निर्धारित परिस्थितियों में रखना जरूरी होता है, ताकि उनकी गुणवत्ता और प्रभावशीलता पर प्रतिकूल असर न पड़े। इसी तरह इन्वेंट्री का सही रिकॉर्ड रखना और दवाओं की आवाजाही से जुड़े दस्तावेज सुरक्षित रखना आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी के लिए आवश्यक है।
लाइसेंस रद्द किए जाने की कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब दवा नियामक कंपनियों की निर्माण और वितरण व्यवस्था में अनुपालन की लगातार निगरानी कर रहे हैं। वेयरहाउस किसी फार्मा कंपनी की आपूर्ति श्रृंखला का अहम हिस्सा होते हैं और यहां होने वाली किसी भी गंभीर अनियमितता का असर दवा वितरण की प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
एफडीए की कार्रवाई के बाद सिप्ला के वाडकी स्थित केंद्र से दवाओं की बिक्री और वितरण फिलहाल प्रतिबंधित हो गया है। मामले में आगे की स्थिति संबंधित नियामकीय आदेशों और कंपनी की ओर से उठाए जाने वाले अनुपालन कदमों पर निर्भर करेगी।
