कानपुर: देश के कई राज्यों में फर्जी मार्कशीट और डिग्री बेचने वाले कथित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने गिरोह के सरगना अखिलेश शुक्ला को गिरफ्तार किया है। पूछताछ में आरोपी ने कथित तौर पर बताया कि उसका नेटवर्क BA, BCom, MBA और MTech तक की फर्जी मार्कशीट और डिग्री तैयार कर ग्राहकों को उपलब्ध कराता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने लोगों को ऐसे दस्तावेज बेचे और इनका इस्तेमाल नौकरी, दाखिले या अन्य आधिकारिक प्रक्रियाओं में कहां-कहां किया गया।
जांच में कई विश्वविद्यालयों के नाम सामने आए हैं, जिनके नाम पर कथित तौर पर फर्जी मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध कराई जाती थीं। इनमें हिमालयन गढ़वाल यूनिवर्सिटी, FS यूनिवर्सिटी, जेस यूनिवर्सिटी, YBN यूनिवर्सिटी, ग्लोबल यूनिवर्सिटी, प्रीति ग्लोबल यूनिवर्सिटी, सिक्किम एलपाइन यूनिवर्सिटी, सिक्किम ग्लोबल यूनिवर्सिटी, ISBN यूनिवर्सिटी, नीलम यूनिवर्सिटी और मेजर SD यूनिवर्सिटी समेत कई संस्थानों के नाम शामिल बताए गए हैं। पुलिस इन दस्तावेजों की वास्तविकता और गिरोह के नेटवर्क से उनके कथित संबंध की जांच कर रही है।
कानपुर यूनिवर्सिटी के पास बनाया ऑफिस
पुलिस के अनुसार, अखिलेश शुक्ला ने वर्ष 2010 में कुछ समय के लिए छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय में संविदा पर क्लर्क के तौर पर काम किया था। इसी दौरान उसे विश्वविद्यालयी दस्तावेजों और शैक्षणिक प्रक्रियाओं की जानकारी हासिल होने की बात जांच में सामने आई है। बाद में उसने कथित तौर पर इसी अनुभव का इस्तेमाल फर्जी दस्तावेज तैयार करने के नेटवर्क में किया।
आरोप है कि वर्ष 2021 में अखिलेश ने कानपुर यूनिवर्सिटी के पास स्थित एक इमारत में कार्यालय बनाया और वहीं से फर्जी मार्कशीट तथा डिग्री तैयार करने का काम शुरू किया। धीरे-धीरे उसने अलग-अलग डिग्री और विश्वविद्यालयों के नाम पर दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए नेटवर्क तैयार किया। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि दस्तावेज तैयार करने और ग्राहकों तक पहुंचाने के लिए उसके साथ कितने लोग जुड़े हुए थे।
दो सहयोगी पहले पकड़े गए
इस मामले में पुलिस ने 2 जुलाई को अखिलेश के दो कथित सहयोगियों अमित कुमार और गोपाल को गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से 59 फर्जी मार्कशीट और डिग्री बरामद होने की बात सामने आई थी। इसके बाद पुलिस ने गिरोह के मुख्य संचालक तक पहुंचने के लिए जांच आगे बढ़ाई।
साइबर थाना पुलिस के अनुसार, दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के दो दिन बाद पुलिस अखिलेश के घर पहुंची। आरोप है कि वहां कुछ फर्जी डिग्री और मार्कशीट मौजूद थीं। पुलिस की मौजूदगी में ही अखिलेश की पत्नी ने कथित तौर पर इनमें से कुछ दस्तावेजों को आग लगा दी। इस घटना को पुलिस ने साक्ष्य नष्ट करने के प्रयास के तौर पर जांच में शामिल किया है। अब यह भी पता लगाया जा रहा है कि घर या अन्य ठिकानों पर फर्जी दस्तावेजों से जुड़े और कितने साक्ष्य मौजूद थे।
छात्रों के बीच से तलाशता था ग्राहक
जांच में गिरोह के ग्राहकों तक पहुंचने का तरीका भी सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, अखिलेश ने उन्नाव और लखनऊ में ‘DDS Foundation’ और ‘Utkarsh Academy’ नाम से दो संस्थान संचालित किए थे। इन संस्थानों में बड़ी संख्या में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आते थे।
आरोप है कि इन्हीं संस्थानों के जरिए अखिलेश ऐसे लोगों की पहचान करता था जिन्हें शैक्षणिक दस्तावेजों की जरूरत होती थी। इसके बाद उनसे मोटी रकम लेकर कथित तौर पर फर्जी मार्कशीट और डिग्री उपलब्ध कराई जाती थीं। पुलिस अब इन दोनों संस्थानों से जुड़े रिकॉर्ड, छात्रों और संपर्कों की भी जांच कर रही है।
वकीलों तक पहुंच की भी जांच
पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि गिरोह ने फर्जी डिग्री और मार्कशीट किन-किन पेशों से जुड़े लोगों को उपलब्ध कराई थीं। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि क्या कुछ अधिवक्ताओं को कथित तौर पर ऐसे दस्तावेज दिए गए थे। इसके लिए आरोपियों के मोबाइल फोन, संपर्क विवरण, डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की जांच की जा रही है।
पुलिस अब गिरोह के पूरे नेटवर्क, दस्तावेज तैयार करने के तरीके, ग्राहकों से ली गई रकम और फर्जी प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल की परिस्थितियों की जानकारी जुटा रही है। जांच में अन्य आरोपियों या ग्राहकों की भूमिका सामने आने पर उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
