हैदराबाद: अमेरिकी वीजा के लिए बार-बार किए गए आवेदन की जांच के दौरान हैदराबाद में कथित पासपोर्ट फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। अमेरिकी वाणिज्य दूतावास की जांच में एक व्यक्ति के पास अलग-अलग नाम, जन्मतिथि और पहचान संबंधी विवरण वाले कई भारतीय पासपोर्ट होने का पता चला। मामले में गाचीबोवली पुलिस ने आरोपी मोथुकुपल्ली लक्ष्मीकांत रेड्डी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और उसके पास से मोबाइल फोन, टैबलेट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार, फर्जीवाड़ा उस समय सामने आया जब आरोपी ने अमेरिकी वीजा के लिए कई आवेदन किए। वीजा प्रक्रिया के दौरान अमेरिकी वाणिज्य दूतावास ने आवेदन के साथ जमा किए गए दस्तावेजों और पासपोर्ट की जानकारी का सत्यापन किया। जांच में अलग-अलग आवेदनों में अलग नाम, जन्मतिथि और पहचान संबंधी विवरण सामने आए। इसके बाद मामले की जानकारी संबंधित भारतीय अधिकारियों को दी गई और पुलिस ने जांच शुरू की।
अलग-अलग नामों से पासपोर्ट रखने का आरोप
जांच में सामने आया कि आरोपी के पास अलग-अलग पहचान के नाम से पासपोर्ट मौजूद थे। पुलिस के मुताबिक, इन दस्तावेजों में मुद्धन्नोला लक्ष्मीकांत, मेधा प्रसून कुमार रेड्डी, मेधा प्रसून कुमार रेड्डी और उसका वास्तविक नाम मोथुकुपल्ली लक्ष्मीकांत रेड्डी शामिल है। अधिकारियों को आशंका है कि अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल विभिन्न आधिकारिक और यात्रा संबंधी प्रक्रियाओं में किया गया हो सकता है।
मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ गई है क्योंकि अधिकारियों को एक ऐसा निवास प्रमाणपत्र मिला, जिसका कथित तौर पर पहले पासपोर्ट हासिल करने के लिए इस्तेमाल किया गया था। जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह प्रमाणपत्र फर्जी हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि दस्तावेज किस स्तर पर तैयार किया गया और इसे पासपोर्ट आवेदन में कैसे इस्तेमाल किया गया।
पासपोर्ट कार्यालय भेजे गए दस्तावेज
गाचीबोवली पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उससे जुड़े दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण अपने कब्जे में लिए हैं। आरोपी के पास से बरामद मोबाइल फोन और टैबलेट की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन उपकरणों में पासपोर्ट, वीजा आवेदन, पहचान दस्तावेजों या अन्य लोगों से जुड़े किसी डिजिटल रिकॉर्ड की जानकारी मौजूद है या नहीं।
मामले से जुड़े आवेदन और सहायक दस्तावेजों को आगे की जांच के लिए क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय, सिकंदराबाद भेजा गया है। वहां रिकॉर्ड की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि आरोपी ने अलग-अलग पासपोर्ट कब और किन दस्तावेजों के आधार पर हासिल किए।
ट्रैवल एजेंट और बिचौलियों की भूमिका की जांच
जांच का दायरा केवल आरोपी तक सीमित नहीं रखा गया है। पुलिस अब यह भी पता लगा रही है कि अलग-अलग पहचान के दस्तावेज तैयार कराने या पासपोर्ट हासिल करने में किसी ट्रैवल एजेंट, ब्रोकर या अन्य बिचौलिये की भूमिका थी या नहीं।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कथित फर्जी निवास प्रमाणपत्र कहां से हासिल किया गया, पासपोर्ट के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए और आवेदन प्रक्रिया में किसी स्तर पर गलत जानकारी दर्ज कराई गई थी या नहीं। यदि किसी नेटवर्क या अन्य व्यक्तियों की भूमिका सामने आती है, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।
अमेरिकी वीजा प्रक्रिया बनी फर्जीवाड़े का सुराग
इस मामले में खास बात यह है कि कथित पासपोर्ट फर्जीवाड़ा सीधे अमेरिकी वीजा आवेदन की जांच के दौरान सामने आया। अलग-अलग आवेदनों में पहचान संबंधी जानकारी में अंतर पाए जाने के बाद दस्तावेजों की अतिरिक्त जांच की गई, जिससे कई पासपोर्ट और अलग-अलग पहचान का मामला सामने आया।
अधिकारियों के लिए अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती इन सभी दस्तावेजों के स्रोत और इस्तेमाल का पता लगाना है। जांच में यह भी देखा जा सकता है कि अलग-अलग पासपोर्ट का इस्तेमाल केवल अमेरिकी वीजा आवेदन के लिए किया गया था या किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय यात्रा, वित्तीय लेनदेन अथवा आधिकारिक प्रक्रिया में भी इनका उपयोग हुआ।
फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में है और मामले की जांच जारी है। पुलिस तथा पासपोर्ट अधिकारियों की जांच से यह स्पष्ट होगा कि कितने दस्तावेज फर्जी तरीके से तैयार किए गए, उन्हें हासिल करने में कौन लोग शामिल थे और अलग-अलग पहचान वाले पासपोर्ट का वास्तविक उद्देश्य क्या था।
