नई दिल्ली: CBSE की 12वीं कक्षा की On-Screen Marking (OSM) व्यवस्था को लेकर विवाद अब निर्णायक दौर में पहुंचता दिख रहा है। लाखों उत्तर पुस्तिकाओं की Digital Checking के दौरान छात्रों की ओर से पन्ने बदलने, उत्तर पुस्तिकाओं के कुछ हिस्से गायब होने और Images धुंधली दिखाई देने जैसी शिकायतें सामने आने के बाद अब जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका जांच के दायरे में है। मामले की जांच के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति 27 अगस्त को सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपने वाली है। रिपोर्ट के आधार पर लापरवाही या प्रक्रियागत अनियमितता पाए जाने पर शिक्षा मंत्रालय और CBSE स्तर पर कड़ी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब NEET Paper Leak प्रकरण में National Testing Agency (NTA) के 47 कर्मचारियों की बर्खास्तगी के बाद परीक्षा व्यवस्था में जवाबदेही को लेकर सरकार पहले ही सख्त रुख अपना चुकी है। ऐसे में CBSE के OSM मामले में भी जांच रिपोर्ट के बाद अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना को गंभीरता से देखा जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया पर सबसे बड़ा सवाल
जांच के केंद्र में OSM व्यवस्था के लिए अपनाई गई Tender Process है। रिपोर्ट के मुताबिक, शुरुआती Tender में कोई Bid नहीं मिली थी। इसके बाद जारी दूसरे Tender में भी किसी Bidder को पात्र नहीं पाया गया। इसके बाद अगस्त 2025 में तीसरे Tender के दौरान Eligibility Conditions में बदलाव किए गए और इसी प्रक्रिया के बाद ‘Coempt Edutech’ को काम सौंपा गया।
अब जांच समिति यह पता लगाने में जुटी है कि Eligibility Criteria में बदलाव क्यों किया गया और क्या इससे किसी विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने की स्थिति बनी। खास तौर पर Technical Experience और Annual Turnover जैसी शर्तों में बदलाव की आवश्यकता और उसके आधार की जांच की जा रही है।
किन अधिकारियों की सहमति से बदली शर्तें?
जांच में दूसरा बड़ा सवाल उन अधिकारियों की भूमिका से जुड़ा है, जिन्होंने Tender Conditions में बदलाव के बाद कंपनी के चयन को मंजूरी दी। समिति यह देख रही है कि नियमों में बदलाव किस स्तर पर प्रस्तावित हुआ, किन अधिकारियों ने उसे मंजूरी दी और निर्णय लेते समय किन तकनीकी तथा वित्तीय पहलुओं पर विचार किया गया।
यदि जांच में प्रक्रिया के दौरान नियमों की अनदेखी या किसी पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने के प्रमाण सामने आते हैं, तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जा सकती है।
लाखों कॉपियों की Digital Checking से पहले कितना हुआ परीक्षण?
OSM व्यवस्था को लागू करने से पहले उसके तकनीकी परीक्षण और तैयारी को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। इस वर्ष करीब 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं की Digital Checking की गई। लेकिन छात्रों की शिकायतों ने व्यवस्था की Reliability पर सवाल खड़े कर दिए।
जांच समिति यह भी देख रही है कि इतनी बड़ी संख्या में उत्तर पुस्तिकाओं को Digital Platform पर जांचने से पहले System का पर्याप्त Testing किया गया था या नहीं। साथ ही स्कूलों, मूल्यांकन केंद्रों और शिक्षकों को OSM प्रक्रिया के संचालन के लिए पर्याप्त Training दी गई थी या नहीं, इसकी भी समीक्षा की जा रही है।
पन्ने गायब और धुंधली Images की शिकायतें
OSM विवाद तब गहराया, जब कई छात्रों ने शिकायत की कि उनकी उत्तर पुस्तिकाओं में कुछ पन्ने बदल गए, कुछ पन्ने दिखाई नहीं दिए या Digital Images स्पष्ट नहीं थीं। ऐसी शिकायतों का सीधा असर छात्रों के परिणाम और उनके भविष्य पर पड़ सकता है। इसलिए अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ये तकनीकी त्रुटियां थीं, प्रक्रिया संबंधी कमियां थीं या किसी अन्य स्तर पर लापरवाही हुई।
जांच में Digital Records, Evaluation Process और संबंधित तकनीकी व्यवस्था की समीक्षा महत्वपूर्ण होगी।
2027 की परीक्षाओं पर भी पड़ेगा असर
27 अगस्त को आने वाली समिति की रिपोर्ट केवल जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं होगी। इसके आधार पर यह भी तय होने की संभावना है कि 2027 की Board Examinations और अन्य परीक्षाओं में OSM व्यवस्था को जारी रखा जाए या इसमें बदलाव किया जाए।
यदि समिति तकनीकी या प्रशासनिक कमियों की पुष्टि करती है तो व्यवस्था में सुधार, नए सुरक्षा मानक और अतिरिक्त Testing लागू किए जा सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट में भी मामला
OSM को लेकर न्यायालयीन प्रक्रिया भी चल रही है। इस मामले से संबंधित एक याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 21 अगस्त को सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में समिति की रिपोर्ट और न्यायालय की सुनवाई दोनों इस व्यवस्था के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।
अब निगाह 27 अगस्त की रिपोर्ट पर है। इसके बाद स्पष्ट होगा कि OSM में सामने आई शिकायतें केवल तकनीकी खामियां थीं या इसके पीछे प्रशासनिक लापरवाही और प्रक्रिया संबंधी गंभीर अनियमितताएं भी थीं।
