बेंगलुरु: कर्नाटक लोक सेवा आयोग (KPSC) की भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और धनशोधन के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार को बड़ी कार्रवाई की। एजेंसी ने कर्नाटक और गुजरात के अहमदाबाद में कुल 21 परिसरों पर तलाशी और जब्ती की कार्रवाई की। यह कार्रवाई धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की धारा 17 के तहत की गई। जांच का केंद्र KPSC भर्ती में कथित रिश्वतखोरी, प्रश्नपत्र लीक, OMR उत्तर पुस्तिकाओं में हेरफेर और चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप हैं।
ED के अनुसार, बेंगलुरु जोनल कार्यालय की टीमों ने KPSC कार्यालय के अलावा आयोग के तत्कालीन चेयरमैन शिवशंकरनप्पा एस. साहुकार के आवास, KPSC सदस्य शांता होस्मानी, कथित बिचौलियों और परीक्षा की डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया से जुड़ी Edutest Solutions Pvt Ltd के परिसरों की तलाशी ली। उन उम्मीदवारों से जुड़े ठिकानों को भी जांच के दायरे में लिया गया, जिनका चयन वेटरिनरी ऑफिसर पद के लिए हुआ था।
तलाशी अभियान कर्नाटक के बेंगलुरु, हासन, चित्रदुर्ग, दावणगेरे, रायचूर, कारवार, कलबुर्गी और बेलगावी समेत कई स्थानों पर चलाया गया। इसके अलावा गुजरात के अहमदाबाद में भी एक परिसर की तलाशी ली गई। ED की कार्रवाई का उद्देश्य कथित भर्ती घोटाले से जुड़े धन के प्रवाह, उसके इस्तेमाल और संभावित धनशोधन की कड़ियों का पता लगाना है।
एजेंसी की जांच बेंगलुरु के विधान सौधा पुलिस थाने में दर्ज कई FIR पर आधारित है। ED के मुताबिक, इनमें से चार FIR वेटरिनरी ऑफिसर पद के अंतिम चयन में कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं। शिकायतों में आरोप लगाया गया है कि कुछ बिचौलियों ने उम्मीदवारों से संपर्क किया और चयन में मदद करने के बदले बड़ी रकम की मांग की।
जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, बिचौलियों ने कुछ उम्मीदवारों से कथित तौर पर ₹70 लाख से ₹80 लाख तक की मांग की थी। एक शिकायतकर्ता ने कथित तौर पर बिचौलियों के साथ बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी जांच एजेंसी को उपलब्ध कराई है। ED अब इन रिकॉर्डिंग और अन्य दस्तावेजों की मदद से यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर किस स्तर पर और किन लोगों की भूमिका थी।
मामला केवल रिश्वत की मांग तक सीमित नहीं है। ED प्रश्नपत्र लीक किए जाने, OMR उत्तर पुस्तिकाओं में कथित छेड़छाड़ और चयन प्रक्रिया में हेरफेर के आरोपों की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगा रही है कि क्या KPSC से जुड़े अधिकारियों के रिश्तेदारों या अन्य करीबी लोगों को भर्ती प्रक्रिया में कथित तौर पर अनुचित लाभ पहुंचाया गया था।
तलाशी के दौरान ED ने भर्ती प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच की। एजेंसी उन कर्मचारियों से भी पूछताछ कर रही है, जिन्होंने संबंधित अवधि में साहुकार के साथ काम किया था। उस दौरान उनके द्वारा हस्ताक्षरित दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा रही है, ताकि कथित अनियमितताओं और निर्णय प्रक्रिया के बीच संबंध स्थापित किया जा सके।
जांच का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कथित रिश्वत की रकम का मनी ट्रेल पता करना है। ED यह जांच कर रही है कि उम्मीदवारों से वसूली गई रकम किन खातों में पहुंची, उसे किस तरीके से आगे ट्रांसफर किया गया और क्या उसे छिपाने या अलग-अलग माध्यमों से इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। एजेंसी यह भी देख रही है कि कथित अपराध से अर्जित धन का कोई हिस्सा ऐसी संपत्तियों या निवेशों में तो नहीं लगाया गया, जिससे उसकी वास्तविक उत्पत्ति छिपाई जा सके।
प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के मुताबिक, भर्ती परीक्षाओं में डिजिटल मूल्यांकन और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की भूमिका बढ़ने के साथ जांच में डिजिटल साक्ष्य की सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि ऑडियो रिकॉर्डिंग, इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज, बैंकिंग ट्रेल और डिजिटल लॉग को एक साथ जोड़ने से कथित लेनदेन और चयन प्रक्रिया में हेरफेर की कड़ी स्थापित करने में मदद मिल सकती है।
ED की तलाशी के बाद अब जांच एजेंसी कथित रिश्वतखोरी और भर्ती अनियमितताओं से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय लेनदेन और आरोपियों के बीच संपर्क की विस्तृत पड़ताल कर रही है। एजेंसी यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कथित धनशोधन में कितने लोग शामिल थे और भर्ती प्रक्रिया से हासिल रकम का इस्तेमाल कहां किया गया।
फिलहाल मामले में जांच जारी है और आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। ED की कार्रवाई का उद्देश्य कथित अपराध से जुड़े धन के स्रोत और उसके प्रवाह का पता लगाना तथा भर्ती प्रक्रिया में शामिल संभावित लोगों की भूमिका स्थापित करना है। आगे की कार्रवाई जांच से सामने आने वाले साक्ष्यों पर निर्भर करेगी।
