नोएडा: सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में 17 स्वास्थ्यकर्मियों की भर्ती को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि शासन की ओर से आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर जारी दिशा-निर्देशों की अनदेखी करते हुए स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन की भर्ती की गई। इन कर्मचारियों को मैसर्स न्यू पैंथर सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज, अलीगढ़ के लेटर पैड पर ज्वाइनिंग लेटर दिए गए थे। बताया गया है कि तत्कालीन मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों की मंजूरी के बाद कर्मचारियों ने अस्पताल में सेवाएं शुरू की थीं। अब स्वास्थ्य विभाग ने इन नियुक्तियों की वैधता पर सवाल उठाते हुए कर्मचारियों की सेवाएं रोक दी हैं।
सोमवार को सभी 17 कर्मचारी अपनी नौकरी बचाने की गुहार लेकर सीएमओ कार्यालय पहुंचे। कर्मचारियों ने अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा और अपने ज्वाइनिंग लेटर भी प्रस्तुत किए। उनका कहना था कि उन्होंने किसी निजी स्तर पर नौकरी हासिल नहीं की, बल्कि अस्पताल में जिम्मेदार अधिकारियों की मंजूरी और जारी किए गए नियुक्ति पत्र के आधार पर काम शुरू किया था। अचानक सेवाएं रोक दिए जाने के बाद कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है।
उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार, इन कर्मचारियों की नियुक्तियां 2023 और 2025 में अलग-अलग चरणों में की गई थीं। इनमें स्टाफ नर्स और लैब टेक्नीशियन के पद शामिल थे। आरोप है कि निजी एजेंसी के लेटर पैड पर कर्मचारियों को ज्वाइनिंग लेटर दिए गए। इस प्रक्रिया को तत्कालीन सीएमएस डॉ. रेनू अग्रवाल और डॉ. अजय राणा की ओर से मंजूरी दिए जाने की बात सामने आई है। अब विभागीय स्तर पर यह जांच की जा रही है कि इन नियुक्तियों के लिए निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
सीएमओ कार्यालय के अनुसार, शासन ने 22 मई 2023 को आउटसोर्सिंग के माध्यम से कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे। इन निर्देशों के तहत संबंधित विभागों को शासन की अनुमति के बिना मनमाने तरीके से कर्मचारियों की नियुक्ति करने से रोका गया था। इसके बावजूद जिला अस्पताल में 17 स्टाफ नर्स और टेक्नीशियन की नियुक्ति किए जाने का मामला सामने आया है।
मामले की जांच के दौरान राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से तैनात कर्मचारियों की ज्वाइनिंग तिथि और नियुक्ति से संबंधित रिकॉर्ड भी मांगा गया। जिला अस्पताल से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों में यह जानकारी सामने आई कि संबंधित कर्मचारियों की ज्वाइनिंग लखनऊ मुख्यालय के बजाय जिला अस्पताल स्तर से हुई थी। इसी वजह से अब पूरी भर्ती प्रक्रिया की वैधता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सीएमओ डॉ. मदन मोहन मणि त्रिपाठी ने बताया कि 17 स्वास्थ्यकर्मी सोमवार को उनसे मिलने आए थे। उन्हें शासन की ओर से जारी ज्वाइनिंग लेटर प्रस्तुत करने को कहा गया है। यदि कर्मचारियों के पास शासन का वैध ज्वाइनिंग लेटर उपलब्ध है तो नियमानुसार उनकी दोबारा ज्वाइनिंग और वेतन शुरू करने पर विचार किया जाएगा। विभाग अब दस्तावेजों के आधार पर यह तय करेगा कि कर्मचारियों की नियुक्तियां नियमों के तहत हुई थीं या नहीं।
दूसरी ओर, मैसर्स न्यू पैंथर सिक्योरिटी गार्ड सर्विसेज के संचालक बन्नी सिंह ने कर्मचारियों की भर्ती में कंपनी की भूमिका से इनकार किया है। उनका कहना है कि कंपनी की ओर से किसी कर्मचारी की भर्ती नहीं की गई थी। तत्कालीन सीएमएस ने कंपनी से ज्वाइनिंग लेटर देने के लिए कहा था, जिसके बाद कंपनी ने पत्र जारी किए। उनका दावा है कि भर्ती प्रक्रिया में कंपनी की स्वतंत्र भूमिका नहीं थी।
₹5 करोड़ के फर्जी सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट का मामला भी जांच के घेरे में
इसी बीच नोएडा प्राधिकरण के बाह्य विज्ञापन विभाग में ₹5 करोड़ के कथित फर्जी सॉल्वेंसी सर्टिफिकेट का मामला भी सामने आया है। आरोप है कि एक एजेंसी को इस प्रमाणपत्र के आधार पर बीओटी टेंडर में शामिल किया गया। यह प्रमाणपत्र इंडियन बैंक से जारी होने का दावा किया गया था। शिकायत के बाद बैंक ने जनवरी में प्राधिकरण को पत्र भेजकर प्रमाणपत्र को फर्जी करार दिया था।
इसके बावजूद करीब सात महीने बाद भी संबंधित एजेंसी या जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने का आरोप है। आईजीआरएस पर दर्ज शिकायत के जवाब में विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक ने बताया कि एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की पत्रावली प्रक्रिया में है। वहीं विभागीय प्रभारी के अनुसार, मामले में वित्त विभाग को पत्र भेजा गया है और आगे का निर्णय वहीं से लिया जाएगा। दोनों मामलों ने सरकारी संस्थानों में भर्ती और टेंडर प्रक्रिया की निगरानी तथा जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
