कानपुर। केस्को स्टोर डिवीजन में निष्प्रयोज्य बिजली खंभों और उपकरणों की बिक्री में सामने आई कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच अब और विस्तृत होने जा रही है। एक वाहन में निर्धारित मात्रा से दोगुने से अधिक स्क्रैप पाए जाने के बाद शुरू हुई जांच अब केवल इसी मामले तक सीमित नहीं रहेगी। पूर्व में हुई स्क्रैप की खरीद-फरोख्त, टेंडर प्रक्रिया, स्टॉक और माल की आवाजाही से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जाएंगे। ऐसे में कई इंजीनियर और वरिष्ठ अधिकारियों के भी जांच की जद में आने की संभावना है।
केस्को प्रबंधन ने प्रारंभिक विभागीय जांच में अनियमितताएं सामने आने के बाद एक्सईएन श्रीकांत रंगीला और जेई मुन्ना यादव को निलंबित कर दिया है। मामले में विजिलेंस जांच की संस्तुति भी की गई है। दोनों अधिकारियों को चार्जशीट देकर उनका पक्ष लिया जाएगा। प्रस्तावित विजिलेंस जांच में विभागीय दस्तावेजों, टेंडर प्रक्रिया, स्टॉक रजिस्टर, स्क्रैप की मात्रा, वजन और पूर्व में किए गए निस्तारण की पड़ताल की जाएगी।
मामला केस्को के आरपीएच स्टोर से सामने आया, जहां जेई रमेश चंद्र तैनात थे। हार्ट अटैक के बाद इलाज के लिए उनके अवकाश पर जाने के दौरान परेड बिजलीघर स्टोर में तैनात जेई मुन्ना यादव को करीब एक महीने के लिए आरपीएच स्टोर का चार्ज दिया गया था। इसी दौरान स्क्रैप से लदे एक वाहन में निर्धारित मात्रा से अधिक माल पाए जाने का मामला सामने आया।
वाहन पकड़े जाने के समय स्टोर का चार्ज मुन्ना यादव के पास था। इसके बाद जांच में उनकी भूमिका सामने आने पर विभागीय कार्रवाई की गई। अब जांच में यह भी देखा जाएगा कि रमेश चंद्र की अनुपस्थिति के दौरान पुलिस में तहरीर देने की प्रक्रिया कैसे शुरू हुई और किन अधिकारियों ने उन्हें इसके लिए निर्देशित किया। पूरे घटनाक्रम में संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में रहेगी।
आरपीएच स्टोर में बड़ी मात्रा में निष्प्रयोज्य बिजली उपकरण और अन्य स्क्रैप जमा रहता है। यहां से बड़े पैमाने पर स्क्रैप की खरीद-फरोख्त होने की बात भी सामने आई है। जांच में यह देखा जाएगा कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान इंजीनियरों और स्क्रैप खरीदने वाले ठेकेदारों के बीच किसी तरह का कथित तालमेल या मिलीभगत तो नहीं थी। साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि किसी उपकरण को स्क्रैप घोषित करने का निर्णय किन मानकों के आधार पर लिया गया।
जांच में जुलाई की शुरुआत में सामने आए एक अन्य मामले को भी शामिल किया गया है। आरोप है कि बिहार की एक फर्म को भेजे गए स्क्रैप के वाहन में भी निर्धारित मात्रा से अधिक माल था। सूचना मिलने के बाद वाहन को शुक्लागंज में पकड़ा गया था, लेकिन बाद में उसे छोड़ दिया गया। अब जांच अधिकारी यह पता लगाएंगे कि वाहन को किस आधार पर छोड़ा गया और इस प्रक्रिया में किन अधिकारियों की भूमिका थी।
गुजरात के भरूच की फर्म एमए ट्रेडर्स से जुड़ा मामला सामने आने के बाद जांच और गंभीर हो गई। फर्म को नीलामी के जरिए स्क्रैप मिला था। एक वाहन में 10 टन माल ले जाने की अनुमति थी, लेकिन उसमें करीब 22 टन स्क्रैप पाए जाने का आरोप है। यानी करीब 12 टन अतिरिक्त माल वाहन में लादा गया था। अतिरिक्त स्क्रैप की कीमत ₹6 लाख से अधिक बताई जा रही है।
अब जांच में दोनों घटनाओं के बीच किसी संबंध की भी पड़ताल होगी। टेंडर दस्तावेजों का स्टॉक रजिस्टर, धर्मकांटा पर्चियों, वाहन मूवमेंट रिकॉर्ड और डिलीवरी दस्तावेजों से मिलान किया जाएगा। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि कागजों में स्वीकृत मात्रा और वास्तव में भेजे गए माल में कितना अंतर था।
केस्को प्रबंधन पूर्व में बेचे गए स्क्रैप का रिकॉर्ड भी खंगालने की तैयारी में है। इसमें बिक्री दर, वजन, संबंधित फर्म, टेंडर प्रक्रिया और माल को बाहर भेजने की अनुमति देने वाले अधिकारियों की भूमिका की जांच होगी। किसी भी स्तर पर रिकॉर्ड और वास्तविक माल में अंतर मिलने पर आगे कार्रवाई की जा सकती है।
केस्को की एमडी नेहा जैन ने बताया कि प्रारंभिक विभागीय जांच रिपोर्ट के आधार पर एक्सईएन और जेई को निलंबित किया गया है तथा विजिलेंस जांच की संस्तुति की गई है। दोनों को चार्जशीट देकर जवाब लिया जाएगा और पूर्व की खरीद-फरोख्त की जांच का दायरा भी बढ़ाया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
विजिलेंस जांच और पुराने सौदों की समीक्षा के बाद मामले का दायरा बढ़ सकता है। यदि स्क्रैप की मात्रा, टेंडर रिकॉर्ड या निस्तारण प्रक्रिया में जानबूझकर हेरफेर साबित होता है तो अन्य अधिकारी और ठेकेदार भी विभागीय या कानूनी कार्रवाई की चपेट में आ सकते हैं।
