सैन फ्रांसिस्को। इंटरनेट पर किसी विषय की तलाश शुरू करते ही बड़ी मात्रा में AI से तैयार किया गया कंटेंट सामने आने लगा है। तस्वीरों और वीडियो से लेकर गानों, रेसिपी और सोशल मीडिया पोस्ट तक, ऐसी सामग्री की संख्या तेजी से बढ़ रही है। समस्या तब गंभीर हो जाती है जब उपयोगी और वास्तविक सामग्री के बीच कम गुणवत्ता वाले AI कंटेंट की भरमार हो जाती है। इससे यूजर्स के लिए यह पहचानना मुश्किल हो रहा है कि इंटरनेट पर दिखाई देने वाली सामग्री वास्तविक है या मशीन से तैयार की गई है।
AI से बने इस कम गुणवत्ता वाले कंटेंट को अब आम तौर पर ‘AI कचरा’ कहा जा रहा है। इसकी बढ़ती मात्रा से केवल इंटरनेट यूजर्स ही परेशान नहीं हैं, बल्कि वे टेक कंपनियां भी दबाव में हैं जिन्होंने कंटेंट तैयार करने के लिए AI टूल्स को तेजी से बाजार में उतारा था। चैटबॉट और इमेज-वीडियो जनरेटर के व्यापक इस्तेमाल ने किसी के लिए भी कुछ ही समय में बड़ी मात्रा में कंटेंट तैयार करना आसान बना दिया है।
म्यूजिक प्लेटफॉर्म पर भी इसका असर दिखाई दे रहा है। AI टूल्स की मदद से बनाए गए गानों की संख्या बढ़ने के साथ ऐसे गाने भी बड़ी मात्रा में अपलोड किए जा रहे हैं, जिनकी गुणवत्ता बेहद कम है। कुछ सामग्री केवल ज्यादा से ज्यादा व्यू, लाइक और शेयर हासिल करने के उद्देश्य से तैयार की जाती है। इसी तरह सोशल मीडिया पर AI से बनाई गई अजीब तस्वीरें, वीडियो और बेतुके दावे तेजी से प्रसारित हो रहे हैं।
खाने की रेसिपी भी इससे अछूती नहीं हैं। AI टूल्स की मदद से ऐसी रेसिपी और तस्वीरें तैयार की जा रही हैं, जिनका वास्तविक खाना पकाने से कोई खास संबंध नहीं होता। इन्हें सोशल मीडिया पर इस उम्मीद में साझा किया जाता है कि लोग प्रतिक्रिया देंगे और पोस्ट की पहुंच बढ़ेगी। इस तरह कम मेहनत में बड़ी मात्रा में सामग्री तैयार होने से इंटरनेट पर गुणवत्तापूर्ण कंटेंट के बीच शोर लगातार बढ़ रहा है।
AI कंटेंट की बढ़ती मात्रा का अंदाजा प्लेटफॉर्मों की कार्रवाई से भी लगाया जा सकता है। Spotify ने एक साल के दौरान बल्क अपलोड और AI से जुड़े करीब 7.5 करोड़ कंटेंट हटाए हैं। YouTube ने पिछले छह महीनों में लगभग 1.30 लाख ऐसे चैनल हटाए, जिन्हें अनावश्यक या कम गुणवत्ता वाले कंटेंट से जोड़कर देखा गया। अनुमान है कि YouTube पर दिखाए जाने वाले Shorts में 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा AI कचरे का हो सकता है।
टेक कंपनियां अब केवल कंटेंट हटाने तक सीमित नहीं हैं। कई प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट की पहुंच कम करने और उसे सिफारिशों में नीचे करने जैसे उपाय भी अपना रहे हैं। Pinterest और TikTok जैसे प्लेटफॉर्म यूजर्स को संदिग्ध या अवांछित AI सामग्री की रिपोर्ट करने के विकल्प दे रहे हैं। Substack ने भी AI कंटेंट की पहचान के लिए डिटेक्शन टूल पेश किया है।
हालांकि, इस समस्या से निपटना कंपनियों के लिए आसान नहीं है। AI से तैयार हर सामग्री खराब या बेकार नहीं होती। कई वास्तविक क्रिएटर्स भी AI टूल्स का इस्तेमाल अपने काम को बेहतर बनाने के लिए करते हैं। ऐसे में बहुत सख्त फिल्टर या बड़े पैमाने पर कंटेंट हटाने की कार्रवाई से उपयोगी सामग्री बनाने वाले क्रिएटर्स भी प्रभावित हो सकते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, समस्या केवल इंटरनेट पर मौजूद सामग्री की मात्रा से जुड़ी नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और विश्वसनीयता से भी संबंधित है। जब कम गुणवत्ता वाली सामग्री बड़े पैमाने पर उपलब्ध होती है तो उपयोगी कंटेंट की पहचान और पहुंच दोनों प्रभावित हो सकती हैं। इससे उन क्रिएटर्स के लिए भी प्रतिस्पर्धा कठिन हो सकती है जो समय और संसाधन लगाकर मूल सामग्री तैयार करते हैं।
इसी वजह से टेक कंपनियां अब AI कचरे को नियंत्रित करने के लिए कंटेंट हटाने, उसकी पहुंच सीमित करने और यूजर रिपोर्टिंग जैसे उपायों पर जोर दे रही हैं। चुनौती यह है कि कम गुणवत्ता वाले स्वचालित कंटेंट पर रोक लगाते हुए वास्तविक क्रिएटर्स और उपयोगी AI सामग्री को नुकसान न पहुंचे। आने वाले समय में इंटरनेट की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए प्लेटफॉर्मों को इसी संतुलन के बीच अपनी नीतियां तय करनी होंगी।
