वडोदरा: गुजरात के वडोदरा में जमीन के दस्तावेजों में फर्जीवाड़े का एक मामला सामने आया है। आरोप है कि एक व्यक्ति ने जमीन के वास्तविक मालिकों के नाम पर फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार कराई और उसे असली दस्तावेज बताकर संपत्ति का सौदा कर दिया। इसके आधार पर करीब ₹1.24 करोड़ की जमीन की बिक्री का दस्तावेज भी पंजीकृत करा दिया गया। मामले में जमीन मालिकों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायत के मुताबिक, वडोदरा के समा क्षेत्र निवासी सुनील रफायेल परमार पर जमीन मालिकों की जानकारी और अनुमति के बिना उनके नाम से पावर ऑफ अटॉर्नी तैयार करने का आरोप है। बताया गया है कि इस कथित फर्जी दस्तावेज को चांदणी स्थित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में पंजीकृत कराया गया। इसके बाद इसी पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर जमीन की बिक्री का रास्ता तैयार किया गया।
₹1.24 करोड़ में कर दी गई संपत्ति की बिक्री
पुलिस शिकायत में आरोप लगाया गया है कि परमार ने फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी को वैध दस्तावेज के रूप में पेश करते हुए जमीन की बिक्री का सेल डीड तैयार कराया। यह संपत्ति नरेंद्र शोभाराजमल मुलचंदानी, जयेश मनिलाल पटेल और अतुल जेराम देसाई के पक्ष में ₹1,24,20,000 में बेचे जाने का उल्लेख है।
आरोप है कि वास्तविक जमीन मालिकों को इस पूरे लेनदेन की जानकारी नहीं थी। उन्हें जब संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों और कथित बिक्री के बारे में जानकारी मिली तो उन्होंने मामले की पड़ताल शुरू की। इसके बाद दस्तावेजों की वैधता और उन पर किए गए हस्ताक्षरों को लेकर सवाल उठाए गए।
जांच के दौरान दूसरा फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप
मामले में शिकायतकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि कथित फर्जीवाड़ा केवल जमीन की बिक्री तक सीमित नहीं रहा। जांच के दौरान परमार ने कथित तौर पर एक और फर्जी हलफनामा तैयार किया। इसमें जमीन मालिकों के नाम से कथित रूप से जाली हस्ताक्षर और उनकी तस्वीरों का इस्तेमाल किए जाने का आरोप है।
शिकायत के अनुसार, इस हलफनामे के जरिए जांच को प्रभावित करने या दस्तावेजी कार्रवाई को दूसरी दिशा में ले जाने की कोशिश की गई। इसके बाद आरोपी ने डाक के माध्यम से एक पत्र भी भेजा, जिसमें आवेदन को बिना शर्त वापस लेने की मांग की गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह कदम भी जांच को गुमराह करने के प्रयास का हिस्सा था।
जमीन मालिकों और गवाह ने पुलिस से की शिकायत
कथित फर्जीवाड़े की जानकारी सामने आने के बाद जमीन के वास्तविक मालिकों और उनके गवाह केतनभाई मोटिलाल गुर्जर ने पुलिस से संपर्क किया। शिकायत में पूरे मामले की जांच कराने और फर्जी दस्तावेज तैयार करने से लेकर संपत्ति के कथित अवैध हस्तांतरण तक शामिल सभी लोगों की भूमिका की जांच करने की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने आरोपी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस अब पावर ऑफ अटॉर्नी, सेल डीड, हलफनामे और संबंधित रजिस्ट्रेशन रिकॉर्ड की जांच कर रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि दस्तावेज तैयार करने और पंजीकरण कराने की प्रक्रिया में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।
जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़े मामलों में पावर ऑफ अटॉर्नी जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन किसी अन्य व्यक्ति के नाम पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर संपत्ति हस्तांतरित करने का आरोप गंभीर माना जाता है। जांच में दस्तावेजों की सत्यता, हस्ताक्षरों और तस्वीरों के इस्तेमाल तथा बिक्री प्रक्रिया में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट होने के बाद मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
