देवास: मध्य प्रदेश के देवास जिले के ग्रामीण इलाकों में शादी के नाम पर कथित ठगी का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। सामूहिक विवाह कराने का भरोसा देकर 40 से अधिक युवकों और उनके परिवारों से कथित तौर पर लाखों रुपये वसूल लिए गए। शादी के लिए तैयार होकर दूल्हे तय तारीख पर मंडप तक पहुंचे, लेकिन जिन युवतियों से उनका विवाह कराया जाना था, उनमें से कोई भी समारोह में नहीं पहुंची। काफी देर इंतजार के बाद जब परिजनों को पूरे मामले की जानकारी हुई तो मौके पर हंगामा हो गया।
पुलिस के मुताबिक, शुरुआती जांच में करीब ₹3.82 लाख की ठगी सामने आई है। मामले में मुख्य आरोपी 45 वर्षीय दिनेश बैरागी समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों, कथित पीड़ितों और पैसों के लेनदेन की जानकारी जुटा रही है।
सोशल मीडिया की तस्वीरों से रचा गया भरोसे का जाल
आरोप है कि बिचौलियों ने शादी के इच्छुक युवकों को सोशल मीडिया पर सक्रिय लोकप्रिय युवतियों और इन्फ्लुएंसर्स की तस्वीरें दिखाईं। इन तस्वीरों को संभावित दुल्हनों का बताकर युवकों और उनके परिवारों को भरोसा दिलाया गया कि लड़कियां अनाथ हैं और आश्रम में रहती हैं।
बिचौलियों ने दावा किया कि इन युवतियों के परिवार नहीं हैं और सामूहिक विवाह के माध्यम से उनका विवाह कराया जाएगा। इस कथित व्यवस्था के बदले प्रत्येक युवक से ₹10 हजार से ₹25 हजार तक की रकम ली गई।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सोशल मीडिया से तस्वीरें किसने जुटाईं और क्या तस्वीरों में दिखाई देने वाली युवतियों को इस कथित ठगी की योजना के बारे में कोई जानकारी थी।
दूल्हे बारात लेकर पहुंचे, लेकिन मंडप खाली मिला
पुलिस के अनुसार, 24 और 25 मई को शादी के लिए युवकों को देवास क्लब मैदान पहुंचने के लिए कहा गया था। निर्धारित दिन कई युवक शेरवानी पहनकर, परिजनों और बारात के साथ समारोह स्थल पर पहुंचे।
सुबह से ही दूल्हे और उनके परिवार दुल्हनों के आने का इंतजार करते रहे। लेकिन काफी समय बीतने के बावजूद कोई दुल्हन वहां नहीं पहुंची। जब परिवारों ने आयोजकों से सवाल किया तो उन्हें बताया गया कि युवतियां इंदौर के एक अनाथ आश्रम से आ रही हैं और शाम तक पहुंच जाएंगी।
शाम पांच बजे तक भी कोई नहीं आया तो समय आगे बढ़ाकर रात दस बजे तक पहुंचने की बात कही गई। रात तक इंतजार करने के बाद भी जब कोई युवती समारोह स्थल पर नहीं पहुंची तो परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। मौके पर विवाद और हंगामा शुरू हो गया।
ठगी का पता चलने पर पुलिस से शिकायत
मामले की जानकारी पुलिस तक पहुंचने के बाद जांच शुरू की गई। पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ की और कथित तौर पर सामने आया कि विवाह कराने के नाम पर कई युवकों से रकम ली गई थी।
जांच में करीब ₹3.82 लाख की रकम लिए जाने का पता चला है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि पीड़ितों की वास्तविक संख्या और ठगी की कुल रकम इससे अधिक हो सकती है। कई युवक और उनके परिवार सामाजिक बदनामी तथा विवाह से जुड़े निजी मामलों के सार्वजनिक होने के डर से शिकायत करने से बच रहे हैं।
पुलिस ऐसे लोगों से भी संपर्क करने का प्रयास कर रही है, जिन्होंने आरोपियों को शादी कराने के नाम पर रकम दी थी।
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मुख्य आरोपी समेत पांच गिरफ्तार
पुलिस ने मामले में दिनेश बैरागी को मुख्य आरोपी बताते हुए उसके चार अन्य साथियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों से पूछताछ के जरिए पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरोह ने कितने युवकों को निशाना बनाया था और अलग-अलग लोगों से किस माध्यम से रकम ली गई।
जांच में आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, सोशल मीडिया गतिविधियों और संभावित संपर्कों की भी पड़ताल की जा सकती है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित विवाह समारोह के लिए किसी वास्तविक संस्था, आश्रम या आयोजन स्थल का नाम इस्तेमाल किया गया था या नहीं।
विवाह की चाहत और बेरोजगारी का फायदा उठाने का आरोप
यह मामला केवल आर्थिक ठगी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में विवाह के लिए उपयुक्त जीवनसाथी तलाशने वाले युवकों की सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का फायदा उठाकर ऐसे गिरोह कथित तौर पर भरोसा कायम करते हैं। इसके बाद फोटो, फर्जी पहचान और शादी के आयोजन का झांसा देकर रकम वसूलने की कोशिश की जाती है।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या देवास के अलावा मध्य प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी तरीके से युवकों को निशाना बनाया गया है। फिलहाल मामले में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ और वित्तीय लेनदेन की जांच जारी है।
