नई दिल्ली: देश में दवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए किए गए नियमित परीक्षण में जुलाई के दौरान 280 दवा सैंपल Not of Standard Quality (NSQ) पाए गए, जबकि एक अन्य सैंपल को spurious यानी नकली दवा के रूप में चिह्नित किया गया। केंद्रीय और राज्य औषधि नियामकों की मासिक गुणवत्ता समीक्षा में सामने आए इन मामलों में पैरासिटामोल, डायबिटीज की दवाएं, एंटीबायोटिक्स, विटामिन सप्लीमेंट और कफ सिरप जैसी आम तौर पर इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के रिकॉर्ड के अनुसार, जुलाई में सामने आए 280 NSQ सैंपलों में से 40 की पहचान केंद्रीय प्रयोगशालाओं में हुई, जबकि 240 सैंपल राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं में जांच के दौरान गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे।
पैरासिटामोल से लेकर एंटीबायोटिक्स तक कई दवाएं सूची में
जांच में विभिन्न चिकित्सकीय उपयोग वाली दवाओं के सैंपल शामिल रहे। इनमें पैरासिटामोल, मेटफॉर्मिन के संयोजन वाली डायबिटीज दवाएं, अमोक्सिसिलिन आधारित एंटीबायोटिक्स, विटामिन सप्लीमेंट और कफ सिरप शामिल हैं।
सूची में ऑक्सीटोसिन का एक सैंपल भी शामिल है। यह दवा प्रसव पीड़ा शुरू कराने के लिए इस्तेमाल की जाती है। चंडीगढ़ क्षेत्रीय औषधि परीक्षण प्रयोगशाला द्वारा जांचे गए इस सैंपल का निर्माण अमृतसर स्थित Jackson Laboratories ने किया था। कंपनी हाल के महीनों में राजस्थान के कोटा में मातृ मृत्यु से जुड़ी रिपोर्टों के बाद जांच के दायरे में रही है।
CDSCO रिकॉर्ड के मुताबिक, संबंधित ऑक्सीटोसिन सैंपल HPLC के जरिए पहचान और particulate matter से जुड़े भारतीय फार्माकोपिया (IP) मानकों पर खरा नहीं उतरा।
इससे पहले जून में नियामकीय जांच के दौरान कंपनी के ऑक्सीटोसिन ब्रांड Tocin का एक सैंपल भी जांच में सामने आया था, जिसमें सक्रिय औषधीय घटक मौजूद नहीं पाया गया था। कोटा में हुई मौतों को लेकर राज्य सरकार ने हालांकि इन्हें कई कारकों से जुड़ा मामला बताया था।
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एक बुप्रेनॉर्फिन इंजेक्शन नकली घोषित
नियमित जांच में बिहार से लिया गया opioid-based painkiller buprenorphine injection का एक सैंपल भी spurious पाया गया। जांच के अनुसार, यह उत्पाद एक अनधिकृत निर्माता द्वारा ऐसी कंपनी के ब्रांड नाम का इस्तेमाल करके बनाया गया था, जिसके पास उस नाम का अधिकार था।
Drugs and Cosmetics Act, 1940 के तहत किसी दवा को spurious माना जा सकता है यदि उसे किसी दूसरी दवा के नाम से इस तरह बनाया या बेचा गया हो कि उपभोक्ता उसके वास्तविक स्रोत को लेकर भ्रमित हो सकता है।
यह मामला केवल गुणवत्ता में कमी से अलग है। NSQ का अर्थ है कि परीक्षण किए गए बैच का सैंपल एक या अधिक निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर विफल रहा, जबकि spurious वर्गीकरण दवा की पहचान, निर्माता या ब्रांड से जुड़ी गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
NSQ रिपोर्ट का मतलब पूरे बाजार की दवा खराब होना नहीं
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, किसी दवा के NSQ पाए जाने का निष्कर्ष उस विशेष बैच के सरकारी प्रयोगशाला में परीक्षण किए गए सैंपल तक सीमित होता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि उसी कंपनी के सभी उत्पाद या बाजार में उपलब्ध अन्य बैच भी गुणवत्ता मानकों पर विफल हैं।
नियामक नियमित रूप से बिक्री और वितरण केंद्रों से दवाओं के सैंपल एकत्र करते हैं। इसके बाद इन्हें निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुसार केंद्रीय या राज्य प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाता है।
नियमित निगरानी से गुणवत्ता अनुपालन पर नजर
दवा सैंपलों को NSQ या spurious के रूप में चिह्नित करने की प्रक्रिया औषधि गुणवत्ता अनुपालन लागू कराने की नियमित व्यवस्था का हिस्सा है। नियामक विभिन्न दवाओं की पहचान, सक्रिय घटकों, शुद्धता और अन्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों की जांच करते हैं।
जुलाई के आंकड़े ऐसे समय में सामने आए हैं जब सरकार और औषधि नियामक दवाओं की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ा रहे हैं। बड़ी संख्या में NSQ सैंपल सामने आने से निर्माताओं के लिए उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, कच्चे माल की जांच और बैच-स्तरीय अनुपालन को मजबूत रखने की जरूरत फिर सामने आई है।
नियामकीय जांच का उद्देश्य दोषपूर्ण या मानकों पर खरा नहीं उतरने वाले बैचों की पहचान कर आवश्यक कार्रवाई करना और दवा आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना है।
