बेंगलुरु: कर्नाटक में लागू किए गए Karnataka Apartment Ownership and Management Act (KAOMA) 2026 का Bangalore Apartments’ Federation (BAF) ने स्वागत किया है। फेडरेशन के मुताबिक नया कानून 1972 के पुराने कानूनी ढांचे की तुलना में अपार्टमेंट प्रबंधन और निवासियों के अधिकारों को लेकर अधिक स्पष्ट और मजबूत व्यवस्था पेश करता है। BAF का कहना है कि प्रभावी तरीके से लागू किए जाने पर यह कानून देश के सबसे मजबूत अपार्टमेंट गवर्नेंस कानूनों में शामिल हो सकता है।
नए कानून में रेजिडेंट्स एसोसिएशन के अधिकारों, प्रमोटर की जवाबदेही, कॉमन एरिया की सुरक्षा, भविष्य में विकास से जुड़े अधिकारों की कानूनी मान्यता, भवन सुरक्षा और पुनर्विकास जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष जोर दिया गया है। फेडरेशन के अनुसार, अब कानून के प्रावधानों को जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
हैंडओवर के बाद भी प्रमोटर की जवाबदेही
KAOMA 2026 की प्रमुख विशेषताओं में प्रमोटर की जिम्मेदारी को लेकर स्पष्ट प्रावधान शामिल हैं। BAF के अनुसार, फ्लैटों का प्रबंधन रेजिडेंट्स एसोसिएशन को सौंपे जाने के बाद भी प्रमोटर की वे जिम्मेदारियां खत्म नहीं होंगी, जो Real Estate (Regulation and Development) Act, 2016 के तहत लागू होती हैं।
कानून यह भी स्पष्ट करता है कि प्रबंधन एसोसिएशन को हस्तांतरित होने के बाद प्रमोटर कॉमन एरिया पर अपना नियंत्रण बनाए नहीं रख सकता। इससे अपार्टमेंट प्रोजेक्ट में कॉमन सुविधाओं और साझा क्षेत्रों के प्रबंधन को लेकर निवासियों की भूमिका मजबूत होने की उम्मीद है।
BAF ने कहा कि प्रबंधन और स्वामित्व अधिकारों का हस्तांतरण एक साथ होना जरूरी है। जमीन और कॉमन एरिया से जुड़े अधिकारों के लिए वैधानिक तथा deemed conveyance की प्रक्रिया को स्पष्ट, समयबद्ध और लागू करने योग्य बनाया जाना महत्वपूर्ण होगा।
तीन महीने में एसोसिएशन का गठन जरूरी
नए कानून के तहत प्रमोटर को किसी अपार्टमेंट प्रोजेक्ट में बहुमत फ्लैट आवंटित होने के तीन महीने के भीतर रेजिडेंट्स एसोसिएशन के गठन और पंजीकरण की प्रक्रिया में मदद करनी होगी।
यदि प्रमोटर निर्धारित अवधि में एसोसिएशन के गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाता है, तो सक्षम प्राधिकरण हस्तक्षेप कर सकता है। इससे अपार्टमेंट प्रोजेक्ट के प्रबंधन को लंबे समय तक प्रमोटर के नियंत्रण में रहने से रोकने की व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद है।
BAF के मुताबिक, प्रत्येक अपार्टमेंट प्रोजेक्ट के लिए एक वैधानिक एसोसिएशन की अवधारणा अपार्टमेंट गवर्नेंस में अधिक स्पष्टता और संरचना ला सकती है। इससे अलग-अलग समूहों के बजाय एक मान्यता प्राप्त संस्था के जरिए प्रबंधन और प्रशासन संचालित करने में मदद मिलेगी।
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एसोसिएशन को मिलेगा कानूनी दर्जा
KAOMA 2026 के तहत पंजीकृत रेजिडेंट्स एसोसिएशन को body corporate के रूप में मान्यता देने का प्रावधान भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके तहत एसोसिएशन को perpetual succession यानी निरंतर कानूनी अस्तित्व प्राप्त होगा और वह अपने नाम से मुकदमा दायर कर सकेगी तथा उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।
BAF के अनुसार, यह प्रावधान रेजिडेंट्स एसोसिएशन को केवल एक अनौपचारिक निवासी समूह के बजाय स्पष्ट कानूनी पहचान वाली संस्था बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे कॉमन एरिया के रखरखाव, प्रशासनिक फैसलों और अपार्टमेंट प्रबंधन से जुड़े विवादों में एसोसिएशन की स्थिति मजबूत हो सकती है।
स्वामित्व और प्रबंधन के हस्तांतरण पर जोर
फेडरेशन ने हालांकि यह भी कहा है कि केवल प्रबंधन का हस्तांतरण पर्याप्त नहीं होगा। जमीन और कॉमन एरिया से जुड़े स्वामित्व अधिकारों का स्पष्ट हस्तांतरण भी जरूरी है। इसके लिए conveyance की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा कराने की आवश्यकता बताई गई है।
नए कानून के प्रावधान ऐसे समय में महत्वपूर्ण हैं, जब बड़े शहरों में अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स के विस्तार के साथ रेजिडेंट्स एसोसिएशन और प्रमोटरों के बीच प्रबंधन, कॉमन एरिया, रखरखाव और स्वामित्व अधिकारों को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं।
BAF का मानना है कि KAOMA 2026 इन मुद्दों को अधिक स्पष्ट कानूनी ढांचे में ला सकता है। हालांकि, कानून का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके तहत तय प्रक्रियाओं को कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
