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Policy Watch

निजी कंपनियों को संवेदनशील सरकारी डेटा के दुरुपयोग से रोकें, सुप्रीम कोर्ट की केंद्र को सख्त हिदायत

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 25, 2026No Comments4 Mins Read
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PF और आयकर रिकॉर्ड तक निजी पहुंच पर अदालत ने जताई चिंता; बिना OTP और स्पष्ट सहमति के निजी वेरिफिकेशन सिस्टम में व्यक्तिगत जानकारी मिलने के दावे पर केंद्र से जरूरी कदम उठाने को कहा
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी रिकॉर्ड में मौजूद नागरिकों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी तक निजी कंपनियों की कथित पहुंच और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने केंद्र सरकार से निजी उद्यमों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सोमवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि मामला मुख्य रूप से नीतिगत क्षेत्र से जुड़ा है। हालांकि, अदालत ने कानून के तहत सरकार को उपलब्ध कराई गई व्यक्तिगत जानकारी तक निजी संस्थाओं की पहुंच और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को चिंताजनक माना।

PF और आयकर डेटा तक पहुंच का दावा

याचिकाकर्ता पीयूष शर्मा ने अदालत के समक्ष दावा किया कि उन्होंने इस मामले की व्यक्तिगत स्तर पर पड़ताल की। उनके अनुसार, केवल PAN और UAN की जानकारी एक निजी वेरिफिकेशन प्रक्रिया में उपलब्ध कराने पर उन्हें संबंधित व्यक्ति का पूरा रोजगार इतिहास प्राप्त हो गया।

याचिकाकर्ता का दावा था कि इस प्रक्रिया के दौरान न तो OTP आधारित प्रमाणीकरण किया गया, न स्पष्ट सहमति ली गई और न ही कोई दिखाई देने वाली अधिकृत पहचान सत्यापन प्रक्रिया अपनाई गई।

याचिका में सरकारी एजेंसियों पर सीधे डेटा लीक का आरोप नहीं लगाया गया। इसके बजाय यह मुद्दा उठाया गया कि अलग-अलग कानूनों के तहत सरकार को उपलब्ध कराई गई नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी निजी संस्थाओं द्वारा कथित तौर पर आसानी से हासिल की जा रही है।

रोजगार जांच में सरकारी रिकॉर्ड के इस्तेमाल पर सवाल

याचिकाकर्ता के मुताबिक, निजी रोजगार वेरिफिकेशन से जुड़े तकनीकी प्लेटफॉर्म वैधानिक रोजगार और वित्तीय रिकॉर्ड से संबंधित डेटा का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए कर रहे हैं। इनमें रोजगार सत्यापन, कर्मचारियों द्वारा एक से अधिक जगह काम करने की जांच, कथित मूनलाइटिंग की पहचान, श्रम बाजार की प्रोफाइलिंग और नियुक्ति संबंधी निर्णय शामिल हैं।

याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष इस व्यवस्था में डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत गोपनीयता से जुड़े संभावित जोखिमों को रेखांकित किया।

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निजी संस्थाओं की पहुंच पर सुप्रीम कोर्ट चिंतित

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकारी रिकॉर्ड में उपलब्ध ऐसा डेटा सामान्य व्यावसायिक जानकारी नहीं है। नागरिकों से विभिन्न कानूनों के तहत अनिवार्य रूप से प्राप्त की गई व्यक्तिगत जानकारी पर सरकार की जिम्मेदारी भी जुड़ी हुई है।

पीठ ने संकेत दिया कि इस तरह के डेटा की निजी संस्थाओं तक पहुंच और उसके व्यावसायिक इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत स्तर पर स्पष्ट व्यवस्था की आवश्यकता हो सकती है।

अदालत ने यह भी कहा कि समस्या से निपटने के लिए क्षेत्र के विशेषज्ञों की सहायता से उचित व्यवस्था विकसित करने पर विचार किया जा सकता है।

केंद्र को जरूरी कदम उठाने का निर्देश

सुनवाई के दौरान जब अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को दो विस्तृत अभ्यावेदन दिए हैं, तो पीठ ने सरकार को मामले पर आवश्यक कार्रवाई करने को कहा।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से निजी उद्यमों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के दुरुपयोग को रोकने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा। हालांकि, अदालत ने इस स्तर पर किसी सरकारी एजेंसी को डेटा लीक के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया।

डेटा सुरक्षा व्यवस्था पर बढ़ा दबाव

अदालत की टिप्पणी ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब डिजिटल माध्यमों से रोजगार, वित्तीय और पहचान संबंधी सूचनाओं का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। PF और आयकर जैसे रिकॉर्ड में किसी व्यक्ति के रोजगार, आय और वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी अत्यंत संवेदनशील जानकारी हो सकती है।

ऐसे डेटा तक बिना पर्याप्त प्रमाणीकरण या स्पष्ट सहमति के पहुंच की संभावना व्यक्तिगत गोपनीयता और डेटा सुरक्षा से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करती है।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से यह स्पष्ट हुआ है कि सरकारी डेटाबेस में मौजूद नागरिकों की जानकारी का इस्तेमाल निजी क्षेत्र में किस सीमा तक किया जा सकता है, इस पर मजबूत सुरक्षा उपायों की जरूरत है। अब केंद्र सरकार को इस मामले में उठाए जाने वाले कदमों पर विचार करना होगा, जबकि अदालत ने नीति-निर्माण के स्तर पर समाधान की आवश्यकता को रेखांकित किया है।

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