Close Menu
Bharat Speaks
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
What's Hot

FQL Finance Fraud: ₹1 Lakh निवेश पर 45 दिन में दोगुने रिटर्न का झांसा, दो एजेंट गिरफ्तार

September 2, 2026

QR पेमेंट पर बड़ा संकट! री-KYC नहीं हुई तो 15 सितंबर के बाद रुक सकता है पैसा लेना

September 2, 2026

UPI पर अब AI एजेंट कर सकेंगे छोटे भुगतान, NPCI लाने जा रहा ‘Unified Agent Protocol’

September 2, 2026
Facebook X (Twitter) Instagram
Facebook X (Twitter) Instagram
Bharat Speaks
Subscribe
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us
Bharat Speaks
Home»Fraud Alert»1991 के लोन केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI के सबूतों पर उठे गंभीर सवाल
Fraud Alert

1991 के लोन केस में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, CBI के सबूतों पर उठे गंभीर सवाल

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 2, 2026No Comments4 Mins Read
Facebook Twitter LinkedIn Telegram WhatsApp Email
अदालत ने पूर्व इंडियन बैंक शाखा प्रबंधक वी. बालाकृष्णन को किया बरी; कहा- आरोपों को साबित करने में जांच एजेंसी नाकाम रही, बैंक से नीलाम संपत्तियों की अतिरिक्त रकम का भी मांगा हिसाब
Share
Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Email
नई दिल्ली। करीब 35 साल पुराने कथित लोन फर्जीवाड़े के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व इंडियन बैंक शाखा प्रबंधक वी. बालाकृष्णन को बड़ी राहत देते हुए उनकी दोषसिद्धि रद्द कर दी है। अदालत ने कहा कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) अभियोजन पक्ष के आरोपों को विश्वसनीय साक्ष्यों से साबित करने में नाकाम रहा। शीर्ष अदालत ने मामले की जांच और आरोपों की संरचना पर भी कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला टिकने लायक ठोस आधार से रहित था।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने 1 सितंबर को फैसला सुनाते हुए निचली अदालत और उच्च न्यायालय के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें बालाकृष्णन को दोषी ठहराया गया था। अदालत ने कहा कि अभियोजन की ओर से पेश सामग्री आरोपी को कथित धोखाधड़ी या धन के दुरुपयोग से जोड़ने के लिए पर्याप्त नहीं थी।
मामला 1991 का है, जब बालाकृष्णन चेन्नई स्थित इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा में शाखा प्रबंधक के पद पर कार्यरत थे। CBI ने आरोप लगाया था कि उन्होंने इंडियन ओवरसीज बैंक के एक सेवानिवृत्त अधिकारी समेत अन्य आरोपियों के साथ मिलकर बैंक से कर्ज मंजूर कराने में नियमों का उल्लंघन किया। आरोप था कि कर्ज लेने वालों को वास्तविक कारोबारी के रूप में पेश किया गया, जबकि वे कथित तौर पर दूसरे आरोपी के परिचित या घरेलू कर्मचारी थे।
अभियोजन के अनुसार, एक आरोपी को रियल एस्टेट कारोबारी के रूप में पेश करते हुए ₹13.50 लाख का कर्ज मंजूर कराया गया। दूसरे मामले में 21.39 एकड़ जमीन खरीदने के लिए ₹10 लाख का कर्ज दिया गया। CBI ने दावा किया था कि कर्ज के लिए रखी गई संपत्तियों का मूल्य अधिक दिखाया गया और बैंक अधिकारी ने कथित मिलीभगत के तहत इन ऋणों को मंजूरी दी।
बालाकृष्णन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। मुकदमे के दौरान अभियोजन ने आरोप लगाया कि कर्ज की रकम का वास्तविक लाभ किसी अन्य आरोपी को मिला और बैंक को नुकसान पहुंचाने के लिए ऋण प्रक्रिया में हेरफेर किया गया।

Algoritha Security Launches ‘Make in India’ Cyber Lab for Educational Institutions

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों की समीक्षा के बाद इन दावों को आरोपी के खिलाफ पर्याप्त नहीं माना। अदालत ने कहा कि केवल यह आरोप कि किसी अन्य व्यक्ति ने संपत्तियां खरीदीं या कर्ज लेने वालों के नाम का इस्तेमाल किया, इससे यह साबित नहीं होता कि शाखा प्रबंधक भी धोखाधड़ी की साजिश में शामिल थे। पीठ ने अभियोजन की उन दलीलों को भी गंभीरता से लिया, जिनमें कर्ज लेने वालों की पहचान और संपत्तियों के मूल्यांकन को लेकर कई आरोप लगाए गए थे, लेकिन इनके समर्थन में ठोस और समकालीन दस्तावेज पेश नहीं किए गए।
अदालत ने विशेष रूप से संपत्तियों के मूल्यांकन से जुड़े साक्ष्यों पर सवाल उठाया। मामले में केवल एक मूल्यांकन प्रमाणपत्र पेश किया गया था। 1991-92 के दौरान संबंधित संपत्तियों के वास्तविक बाजार मूल्य को साबित करने के लिए समकालीन बिक्री विलेख या सरकारी निर्धारित दरों से जुड़े पर्याप्त दस्तावेज रिकॉर्ड पर नहीं लाए गए। ये संपत्तियां बाद में वर्ष 2010 में नीलाम की गई थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने बैंक के स्तर पर सामने आए एक अलग मुद्दे पर भी चिंता जताई। अदालत के मुताबिक, नीलामी से प्राप्त रकम से संबंधित ऋण खातों को संतुष्ट करने के बाद कुछ अतिरिक्त राशि बची थी। पीठ ने सवाल उठाया कि यदि बैंक ने कर्ज की वसूली के बाद अतिरिक्त रकम अपने पास रखी, तो उसके वैध हकदारों को वह राशि क्यों नहीं दी गई।
शीर्ष अदालत ने इंडियन बैंक की अन्ना नगर शाखा के वर्तमान शाखा प्रबंधक से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें संबंधित ऋण खातों, नीलाम की गई संपत्तियों, ऋण की अदायगी और नीलामी से प्राप्त अतिरिक्त रकम के इस्तेमाल का विवरण देने को कहा गया है। बैंक को संबंधित मूल दस्तावेज और संपत्तियों के स्वामित्व से जुड़े कागजात भी प्रस्तुत करने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने बालाकृष्णन की अपील स्वीकार करते हुए उनकी दोषसिद्धि और पहले के दोनों अदालतों के आदेश रद्द कर दिए। यदि वह किसी अन्य मामले में आवश्यक नहीं हैं तो उन्हें तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया गया है। यदि वह जमानत पर हैं, तो उनके जमानत बंधपत्र समाप्त माने जाएंगे। मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर 2026 को होगी।
📲 Join Our WhatsApp Channel
Algoritha Registration
Share. Facebook Twitter Pinterest LinkedIn Tumblr Telegram Email
Previous Articleभोपतपुरा से राम मंदिर तक: पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को मिली बड़ी जिम्मेदारी, जानिए कौन हैं ट्रस्ट के पहले CEO
Next Article UPI पर अब AI एजेंट कर सकेंगे छोटे भुगतान, NPCI लाने जा रहा ‘Unified Agent Protocol’
Team Bharat Speaks
  • Website

Related Posts

FQL Finance Fraud: ₹1 Lakh निवेश पर 45 दिन में दोगुने रिटर्न का झांसा, दो एजेंट गिरफ्तार

September 2, 2026

QR पेमेंट पर बड़ा संकट! री-KYC नहीं हुई तो 15 सितंबर के बाद रुक सकता है पैसा लेना

September 2, 2026

UPI पर अब AI एजेंट कर सकेंगे छोटे भुगतान, NPCI लाने जा रहा ‘Unified Agent Protocol’

September 2, 2026
Add A Comment
Leave A Reply Cancel Reply

Top Posts

Subscribe to Updates

Get the latest sports news from SportsSite about soccer, football and tennis.

Welcome to BharatSpeaks.com, where our mission is to keep you informed about the stories that matter the most. At the heart of our platform is a commitment to delivering verified, unbiased news from across India and beyond.

We're social. Connect with us:

Facebook X (Twitter) Instagram YouTube
Top Insights
Get Informed

Subscribe to Updates

Get the latest creative news from FooBar about art, design and business.

© 2026 Bharat Speaks.
  • Trending
  • Motivation
  • Health
  • Education
  • Development
  • About Us

Type above and press Enter to search. Press Esc to cancel.