नई दिल्ली। देश में डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के बीच छोटे कारोबारियों के लिए KYC से जुड़ी नई चुनौती सामने आई है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से मौजूदा कारोबारियों की री-KYC पूरी करने के लिए 15 सितंबर 2026 की समयसीमा तय की गई है। यदि निर्धारित समय तक KYC प्रक्रिया पूरी नहीं होती है तो संबंधित कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा रोकी जा सकती है। इसका सबसे ज्यादा असर उन छोटे दुकानदारों पर पड़ने की आशंका है जो QR कोड के जरिए UPI भुगतान लेते हैं।
एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में QR कोड के जरिए UPI भुगतान स्वीकार करने वाले करीब 30-35% छोटे ऑफलाइन कारोबारियों की री-KYC समयसीमा तक पूरी होना मुश्किल माना जा रहा है। इसके अलावा करीब 10 लाख छोटे ऑनलाइन कारोबारी भी KYC सत्यापन पूरा करने की समयसीमा से चूक सकते हैं। हालांकि, इससे पूरे UPI तंत्र पर बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है, क्योंकि प्रभावित कारोबारियों का कुल डिजिटल भुगतान कारोबार में हिस्सा सीमित है।
15 सितंबर क्यों है अहम?
RBI ने सितंबर 2025 में भुगतान सेवाओं से जुड़े अपने अद्यतन और समेकित मास्टर निर्देश जारी किए थे। इसके तहत भुगतान एकत्रीकरण सेवाओं को तीन श्रेणियों में बांटा गया है। इनमें ऑनलाइन भुगतान, भौतिक माध्यम से भुगतान और सीमा-पार भुगतान सेवाएं शामिल हैं।
मौजूदा कारोबारियों के लिए पूरी री-KYC प्रक्रिया 15 सितंबर 2026 तक पूरी करना जरूरी है। यदि कोई कारोबारी निर्धारित समय तक सत्यापन पूरा नहीं करता है तो भुगतान स्वीकार करने की उसकी सुविधा प्रभावित हो सकती है। वहीं, 1 जनवरी 2026 या उसके बाद जुड़े नए कारोबारियों के लिए भुगतान स्वीकार करने से पहले KYC पूरा करना अनिवार्य है।
छोटे दुकानदारों के सामने दस्तावेजों की चुनौती
इस नियम का सबसे ज्यादा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ने की आशंका है। इनमें किराना दुकानदार, छोटे खुदरा व्यापारी, स्थानीय दुकान संचालक और अन्य छोटे कारोबारी शामिल हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, कई छोटे व्यापारियों के पास RBI की जरूरतों के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में कारोबारियों को KYC प्रक्रिया और उसके लिए जरूरी दस्तावेजों की पूरी जानकारी नहीं है।
QR कोड के छोटे स्टैंड के जरिए भुगतान लेने वाले कारोबारियों तक पहुंचकर सत्यापन पूरा करना भुगतान कंपनियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे कई कारोबारी छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों में बिना किसी बड़े कार्यालय या औपचारिक प्रशासनिक व्यवस्था के काम करते हैं।
साउंडबॉक्स इस्तेमाल करने वालों की स्थिति बेहतर
UPI भुगतान के लिए साउंडबॉक्स इस्तेमाल करने वाले कारोबारियों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसे करीब 85-90% व्यापारी समयसीमा के भीतर अपनी KYC पूरी कर सकते हैं। भुगतान कंपनियों के साथ इन कारोबारियों का संपर्क नियमित रहने के कारण सत्यापन प्रक्रिया भी अपेक्षाकृत आसान है।
इसके मुकाबले केवल QR कोड स्टैंड वाले छोटे कारोबारियों तक पहुंच बनाना मुश्किल है। हालांकि, इन कारोबारियों का कुल भुगतान मूल्य और मात्रा में योगदान सीमित होने के कारण पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र पर बड़े असर की संभावना कम मानी जा रही है।
Paytm, PhonePe और Google Pay पर बढ़ा दबाव
RBI के नियमों के तहत कुछ मामलों में व्यापारियों की व्यक्तिगत KYC भुगतान एकत्रीकरण कंपनी को खुद करनी होती है। यह प्रक्रिया तीसरे पक्ष की एजेंसियों से नहीं कराई जा सकती। ऐसे में भुगतान कंपनियों को देशभर में, खासकर छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में, अतिरिक्त कर्मचारियों और क्षेत्रीय टीमों की जरूरत पड़ रही है।
Paytm, PhonePe और Google Pay जैसी प्रमुख डिजिटल भुगतान कंपनियों के सामने बड़ी संख्या में छोटे कारोबारियों की री-KYC पूरी कराने की चुनौती है। कंपनियों को अपने प्रतिनिधियों के जरिए ऐसे कारोबारियों तक पहुंच बनानी पड़ रही है जिनसे नियमित रूप से संपर्क करना आसान नहीं है।
वहीं, Razorpay और Cashfree जैसी ऑनलाइन भुगतान केंद्रित कंपनियों के लिए KYC प्रक्रिया अपेक्षाकृत आसान बताई जा रही है, क्योंकि उनके कारोबारियों के साथ संपर्क मुख्य रूप से डिजिटल माध्यमों से होता है।
क्या आम लोगों के UPI भुगतान पर पड़ेगा असर?
15 सितंबर की समयसीमा को लेकर छोटे कारोबारियों के बीच चिंता जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देशभर में UPI भुगतान व्यवस्था बंद होने वाली है। संभावित असर मुख्य रूप से उन कारोबारियों तक सीमित रहेगा जिनकी KYC समय पर पूरी नहीं होगी।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार, ज्यादातर भुगतान एकत्रीकरण कंपनियां समयसीमा तक करीब 80% री-KYC पूरी कर सकती हैं। इसलिए पूरे डिजिटल भुगतान तंत्र पर व्यापक असर की आशंका कम है।
हालांकि, जिन छोटे कारोबारियों की आय का बड़ा हिस्सा QR और UPI भुगतान से आता है, उनके लिए KYC में देरी परेशानी पैदा कर सकती है। ऐसे व्यापारियों को अपनी भुगतान सेवा देने वाली कंपनी से संपर्क कर KYC की स्थिति तुरंत जांच लेनी चाहिए और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने चाहिए। समयसीमा से पहले प्रक्रिया पूरी करना इसलिए महत्वपूर्ण है, ताकि ग्राहकों से डिजिटल भुगतान स्वीकार करने की सुविधा अचानक बाधित न हो।
