मदुरै। तमिलनाडु के सिवगंगा जिले में कथित FQL Finance Fraud मामले की जांच कर रही जिला अपराध शाखा पुलिस ने मंगलवार को दो एजेंटों को गिरफ्तार किया। आरोपियों की पहचान सिवगंगा के पास पैयूर गांव निवासी रमेश और मदुरै के मानिकमपट्टी निवासी सतीश के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, दोनों कथित तौर पर सिवगंगा में FQL Finance Company के लिए एजेंट के रूप में काम करते थे।
पुलिस को कंजीरंगल, कलैयारकोइल, मरवामंगलम, तिरुप्पुवनम और आसपास के कई इलाकों के निवासियों से शिकायतें मिली थीं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि उन्हें कंपनी की निवेश योजना में रकम लगाने के लिए प्रेरित किया गया और आकर्षक रिटर्न का भरोसा दिया गया। शिकायतें मिलने के बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सिवगंगा जिला पुलिस ने विस्तृत जांच शुरू की।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर पता चला कि इस नेटवर्क ने लोगों को अपने जाल में फंसाने के लिए एक समान तरीके का इस्तेमाल किया था। पुलिस के मुताबिक, इसी तरह की कार्यप्रणाली का इस्तेमाल मदुरै के मेलूर इलाके में लोगों को कथित तौर पर ठगने के लिए भी किया गया था।
आरोप है कि कंपनी अपने मोबाइल ऐप के माध्यम से लोगों को निवेश के लिए आकर्षित करती थी। निवेशकों को बताया जाता था कि यदि वे ₹1 लाख की शुरुआती रकम लगाते हैं तो उन्हें केवल 45 दिनों में रकम दोगुनी होकर वापस मिलेगी। रिटर्न अमेरिकी डॉलर में देने का दावा किया जाता था। बड़ी रकम कम समय में दोगुनी होने का लालच देकर लोगों को निवेश के लिए तैयार किया जाता था।
पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि गिरफ्तार किए गए दोनों एजेंटों की भूमिका किस स्तर तक थी और उन्होंने कितने लोगों को कथित योजना में निवेश करने के लिए तैयार किया। जांच एजेंसियां उनके संपर्क में आए निवेशकों, लेनदेन और कंपनी से जुड़े अन्य लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दोनों आरोपियों से पूछताछ में कथित वित्तीय धोखाधड़ी के नेटवर्क और उसके संचालन के तरीके से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आ सकती है। पूछताछ के आधार पर पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश करेगी कि कंपनी के मोबाइल ऐप को कौन संचालित कर रहा था और निवेश के नाम पर जुटाई गई रकम आखिरकार किन खातों में पहुंची।
इससे पहले मदुरै में FQL से जुड़ी कथित क्रिप्टो धोखाधड़ी के मामले की जांच को आर्थिक अपराध शाखा को सौंपे जाने की जानकारी सामने आई थी। अब सिवगंगा में सामने आई शिकायतों और दो एजेंटों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों को जोड़कर देख रही है।
ऐसी निवेश योजनाओं में ठगी का सामान्य तरीका यह होता है कि लोगों को कम समय में असामान्य रूप से अधिक रिटर्न का भरोसा दिया जाता है। शुरुआत में कुछ निवेशकों को भुगतान कर विश्वास हासिल करने की कोशिश की जा सकती है और बाद में अधिक रकम लगाने के लिए प्रेरित किया जाता है। इसके बाद निकासी के समय अतिरिक्त शुल्क, कर या अन्य कारण बताकर भुगतान रोका जा सकता है।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, कम अवधि में रकम दोगुनी करने का दावा निवेशकों के लिए बड़ा चेतावनी संकेत होना चाहिए। ऐसे मामलों में निवेश करने से पहले कंपनी का पंजीकरण, नियामकीय स्थिति, बैंकिंग विवरण और निवेश योजना की वैधता स्वतंत्र रूप से जांचना जरूरी है। मोबाइल ऐप पर दिखाई जा रही रकम या कथित लाभ को वास्तविक रिटर्न का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
पुलिस गिरफ्तार दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच आगे बढ़ने के साथ कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों, निवेशकों की संख्या और वित्तीय लेनदेन की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
