लखनऊ। उत्तर प्रदेश में संगठित अपराध और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले गैंगस्टर एक्ट के भविष्य को लेकर सरकार के स्तर पर मंथन तेज हो गया है। राज्य सरकार इस कानून में संशोधन करने या इसे समाप्त करने के विकल्प पर विचार कर रही है। फिलहाल सरकार की नजर कानपुर की जाजमऊ सीट से पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के फैसले पर है। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद ही राज्य सरकार आगे की कानूनी रणनीति तय करने की तैयारी में है।
उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद न्याय विभाग और गृह विभाग उसके निर्देशों का अध्ययन करेंगे। इसके बाद गैंगस्टर एक्ट की मौजूदा व्यवस्था में जरूरी बदलाव, प्रावधानों में संशोधन या कानून को समाप्त करने से संबंधित प्रस्ताव तैयार किया जा सकता है। सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि संगठित अपराध के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था बरकरार रखते हुए कानून के कथित दुरुपयोग की आशंकाओं को कैसे दूर किया जाए।
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से बढ़ी हलचल
गैंगस्टर एक्ट के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट हाल के वर्षों में कई बार सख्त रुख अपना चुका है। हाल की सुनवाई में शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि गैंगस्टर एक्ट अपने आप में कोई अलग अपराध नहीं बनाता। अदालत ने इस बात पर भी चिंता जताई कि कानून का इस्तेमाल ऐसे तरीके से नहीं होना चाहिए जिससे बेखबर नागरिकों के खिलाफ हिंसा या दमन की स्थिति पैदा हो।
सुनवाई के दौरान यह सवाल भी उठा कि केवल किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित करने या उसका नाम गैंग चार्ट में शामिल करने से उसके खिलाफ गिरफ्तारी, लंबी हिरासत और मुकदमा चलाने का आधार किस सीमा तक तैयार हो सकता है। गैंगस्टर एक्ट का मूल उद्देश्य संगठित आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाना है, लेकिन इसके इस्तेमाल की प्रक्रिया और आधार को लेकर अदालतों में लगातार सवाल उठते रहे हैं।
शीर्ष अदालत की हालिया टिप्पणी फर्रुखाबाद के दो अधिवक्ताओं से जुड़े मामले में सामने आई थी। इस मामले में कानून के इस्तेमाल और उसके प्रभाव को लेकर उठे सवालों ने उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट की व्यवस्था पर चल रही बहस को और तेज कर दिया है।
हाईकोर्ट भी उठा चुका है कानून के दुरुपयोग का मुद्दा
गैंगस्टर एक्ट के कथित दुरुपयोग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी राज्य सरकार के सामने कई बार सवाल उठा चुका है। जनवरी में एक मामले की सुनवाई के दौरान हलफनामे में सही जानकारी नहीं देने पर गृह विभाग के अपर मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।
हाईकोर्ट पहले भी राज्य सरकार से गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई के लिए स्पष्ट नियमावली तैयार करने को कह चुका है। 9 जुलाई 2025 को दिए गए एक फैसले में अदालत ने गैंगस्टर एक्ट की मौजूदा जरूरत पर भी सवाल उठाया था। अदालत ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 में संगठित अपराध से संबंधित प्रावधानों का उल्लेख करते हुए पूछा था कि नए आपराधिक कानून के लागू होने के बाद अलग राज्य कानून की भूमिका क्या रह जाती है।
बीएनएस की धारा 111 ने बढ़ाया कानूनी सवाल
भारतीय न्याय संहिता की धारा 111 में संगठित अपराध को लेकर विस्तृत प्रावधान किए गए हैं। इसमें संगठित आपराधिक गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई के लिए अलग कानूनी व्यवस्था दी गई है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि जब भारतीय न्याय संहिता में संगठित अपराध के लिए व्यापक प्रावधान मौजूद हैं, तो उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट की मौजूदा भूमिका क्या होनी चाहिए।
राज्य सरकार इसी कानूनी स्थिति को ध्यान में रखते हुए विकल्पों पर विचार कर रही है। एक संभावना यह है कि गैंगस्टर एक्ट में व्यापक संशोधन कर उसे भारतीय न्याय संहिता के अनुरूप बनाया जाए। दूसरी ओर, यदि शीर्ष अदालत के फैसले से मौजूदा व्यवस्था की जरूरत पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं तो सरकार इसे समाप्त करने के विकल्प पर भी आगे बढ़ सकती है।
इरफान सोलंकी मामले पर क्यों टिकी नजर
पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी से जुड़ा मामला इस पूरी कवायद में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हो रही है और इसमें गैंगस्टर एक्ट के इस्तेमाल से जुड़े व्यापक कानूनी सवालों पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।
सरकार फिलहाल सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले कोई अंतिम निर्णय लेने के पक्ष में नहीं है। आदेश आने के बाद न्याय विभाग और गृह विभाग उसके कानूनी प्रभाव का अध्ययन करेंगे। इसके आधार पर राज्य में गैंगस्टर एक्ट को लेकर आगे की नीति तय की जा सकती है।
अपराध नियंत्रण और अधिकारों के बीच संतुलन चुनौती
सरकार के सामने एक तरफ संगठित अपराध और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का तंत्र बनाए रखने की जरूरत है, तो दूसरी तरफ कानून के कथित दुरुपयोग और निर्दोष लोगों को कार्रवाई में घसीटे जाने की आशंका को दूर करना भी जरूरी है। अदालतों की लगातार टिप्पणियों ने इसी संतुलन को केंद्र में ला दिया है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद उत्तर प्रदेश में गैंगस्टर एक्ट के भविष्य की दिशा स्पष्ट होने की संभावना है। कानून मौजूदा स्वरूप में जारी रहेगा, उसमें व्यापक संशोधन होंगे या भारतीय न्याय संहिता के प्रावधानों को देखते हुए इसे समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू होगी—इसका फैसला अब शीर्ष अदालत के रुख के बाद ही होने की उम्मीद है।
