नई दिल्ली। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड के निदेशक मंडल में आवश्यक संख्या में स्वतंत्र निदेशक नहीं होने के कारण बीएसई और एनएसई ने कंपनी पर कुल ₹9,66,420 का जुर्माना लगाया है। दोनों शेयर बाजारों ने कंपनी पर ₹4,83,210-₹4,83,210 का अलग-अलग जुर्माना लगाया। यह कार्रवाई 30 जून 2026 को समाप्त तिमाही के दौरान भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) के सूचीबद्धता दायित्व एवं प्रकटीकरण आवश्यकताएं (एलओडीआर) नियमों के कथित अनुपालन में कमी को लेकर की गई है।
शेयर बाजारों के अनुसार, कोचीन शिपयार्ड के बोर्ड में पर्याप्त स्वतंत्र निदेशक नहीं होने के कारण सेबी एलओडीआर के नियम 17(1), 18 और 19 की आवश्यकताओं को पूरा नहीं किया जा सका। स्वतंत्र निदेशकों की कमी का असर कंपनी की महत्वपूर्ण समितियों पर भी पड़ा। इसके चलते लेखा परीक्षा समिति तथा नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति का गठन भी निर्धारित नियामकीय प्रावधानों के अनुरूप नहीं हो सका।
कंपनी के निदेशक मंडल ने 9 सितंबर 2026 को हुई बैठक में इस मामले की समीक्षा की। बोर्ड ने बताया कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति कंपनी प्रबंधन के सीधे अधिकार क्षेत्र में नहीं आती, बल्कि इसमें भारत सरकार की भूमिका है। कंपनी के प्रशासनिक मंत्रालय की ओर से नियुक्तियां किए जाने के कारण बोर्ड में आवश्यक पद लंबे समय तक रिक्त रहे।
बोर्ड के अनुसार, बंदरगाह, जहाजरानी एवं जलमार्ग मंत्रालय ने 17 अगस्त 2026 को डॉ. वाणी अहलूवालिया को गैर-आधिकारिक स्वतंत्र निदेशक नियुक्त किया। उनकी नियुक्ति के बाद कंपनी ने अपनी संबंधित समितियों का पुनर्गठन किया, ताकि उनकी संरचना लागू सेबी नियमों के अनुरूप की जा सके।
कंपनी ने अपने बोर्ड के समक्ष यह भी स्पष्ट किया कि नियमों का पालन नहीं हो पाना प्रबंधन की लापरवाही या जानबूझकर की गई चूक का परिणाम नहीं था। बोर्ड का कहना है कि स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति सरकार के अधिकार क्षेत्र में होने के कारण कंपनी इन नियुक्तियों को सीधे पूरा करने की स्थिति में नहीं थी। इसी आधार पर कंपनी ने जुर्माने में राहत की मांग करने का फैसला किया है।
बोर्ड ने बीएसई और एनएसई के समक्ष मौजूदा जुर्माना छूट नीति के तहत जुर्माना माफ करने के लिए आवेदन करने की सलाह दी है। कंपनी का तर्क है कि जिन परिस्थितियों के कारण अनुपालन में कमी आई, वे उसके नियंत्रण से बाहर थीं। कंपनी अब संबंधित शेयर बाजारों के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए जुर्माने से छूट का अनुरोध करेगी।
हालांकि डॉ. अहलूवालिया की नियुक्ति से बोर्ड की स्थिति में कुछ सुधार हुआ है, लेकिन आवश्यक संख्या पूरी करने के लिए चार अन्य स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति अभी बाकी है। कंपनी ने कहा है कि इन नियुक्तियों को जल्द पूरा कराने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं और प्रशासनिक मंत्रालय के साथ नियमित रूप से इस मुद्दे पर संपर्क किया जा रहा है।
कंपनी के मुताबिक, लंबित नियुक्तियों को लेकर वह संबंधित मंत्रालय के साथ लगातार समन्वय करती रहेगी। आवश्यक संख्या में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति होने के बाद बोर्ड और उसकी समितियों की संरचना को पूरी तरह नियामकीय आवश्यकताओं के अनुरूप किया जा सकेगा।
स्वतंत्र निदेशक सूचीबद्ध कंपनियों के कॉरपोरेट प्रशासन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उनका उद्देश्य बोर्ड के निर्णयों में स्वतंत्र दृष्टिकोण सुनिश्चित करना और कंपनी के कामकाज में पारदर्शिता तथा जवाबदेही को मजबूत करना है। लेखा परीक्षा, वित्तीय रिपोर्टिंग, वरिष्ठ प्रबंधन और पारिश्रमिक से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की निगरानी में भी स्वतंत्र निदेशकों की भूमिका होती है।
सेबी के एलओडीआर नियमों के तहत सूचीबद्ध कंपनियों को बोर्ड और उसकी विभिन्न समितियों में निर्धारित संख्या में स्वतंत्र निदेशक रखना जरूरी है। इन आवश्यकताओं का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कंपनी के महत्वपूर्ण निर्णयों और निगरानी तंत्र में स्वतंत्र राय मौजूद रहे।
कोचीन शिपयार्ड के मामले में जून 2026 तिमाही के दौरान इन आवश्यकताओं को पूरा नहीं किए जाने पर बीएसई और एनएसई ने संयुक्त रूप से ₹9.66 लाख से अधिक का जुर्माना लगाया है। कंपनी अब लंबित चार स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति और लगाए गए जुर्माने से छूट के लिए नियामकीय प्रक्रिया पर आगे बढ़ रही है।
