बेंगलुरु। कर्नाटक पुलिस ने साइबर अपराध के मामलों में कार्रवाई तेज करने के लिए नई व्यवस्था लागू की है। अब स्थानीय या क्षेत्राधिकार वाले थानों में साइबर अपराध और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम से जुड़े मामलों की शिकायत लेकर एफआईआर दर्ज की जाएगी, लेकिन एफआईआर दर्ज होते ही मामले को संबंधित जिला या शहर के विशेष साइबर अपराध थाने में तत्काल स्थानांतरित करना होगा। विशेष साइबर थाने को भी मामला मिलते ही जांच अपने हाथ में लेनी होगी।
पुलिस का यह निर्देश साइबर अपराध की शिकायतों पर कार्रवाई में देरी को लेकर बढ़ती चिंता के बीच आया है। अधिकारियों के अनुसार, साइबर वित्तीय ठगी के मामलों में शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। देरी होने पर ठगी की रकम कई बैंक खातों और डिजिटल माध्यमों से आगे भेजी जा सकती है, जिससे उसे रोकना और बरामद करना मुश्किल हो जाता है। साथ ही देरी से डिजिटल साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण पर भी असर पड़ सकता है।
11 सितंबर को जारी परिपत्र में पुलिस महानिदेशक एवं पुलिस महानिरीक्षक ने सभी इकाई अधिकारियों को निर्देश दिया कि क्षेत्राधिकार वाले स्थानीय थानों में दर्ज साइबर अपराध और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 से संबंधित मामलों को एफआईआर दर्ज होने के तुरंत बाद संबंधित जिला या शहर के साइबर अपराध थाने में स्थानांतरित किया जाए।
नई व्यवस्था के तहत स्थानीय पुलिस थानों की भूमिका शिकायत लेने और एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं होगी, बल्कि इसके बाद मामले को विशेष साइबर अपराध इकाई तक पहुंचाने की प्रक्रिया भी तत्काल पूरी करनी होगी। साइबर अपराध थाने को मामला प्राप्त होते ही जांच शुरू करनी होगी, ताकि शुरुआती चरण में ही तकनीकी और वित्तीय कार्रवाई की जा सके।
विशेष साइबर अपराध इकाइयों को डिजिटल साक्ष्यों के समय पर संरक्षण और विश्लेषण की जिम्मेदारी दी गई है। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और डिजिटल रिकॉर्ड की तकनीकी जांच, संदिग्ध लेनदेन की पड़ताल और संबंधित संस्थाओं के साथ समन्वय भी इन इकाइयों के जांच दायरे में रहेगा।
वित्तीय साइबर ठगी के मामलों में साइबर पुलिस को बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं, दूरसंचार कंपनियों, सोशल मीडिया मंचों और अन्य संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय करना होगा। इसका उद्देश्य संदिग्ध लेनदेन की जानकारी तेजी से जुटाना और जरूरत पड़ने पर ठगी की रकम को आगे स्थानांतरित होने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाना है।
पुलिस के अनुसार, साइबर अपराध में कार्रवाई के शुरुआती चरण को तेज करना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डिजिटल लेनदेन के मामलों में रकम बहुत कम समय में कई खातों में पहुंच सकती है। यदि शिकायत के बाद कार्रवाई में देरी होती है, तो धन के प्रवाह का पता लगाना और उसे रोकना अधिक कठिन हो सकता है।
परिपत्र में जिला पुलिस अधीक्षकों और शहर के पुलिस आयुक्तों को साइबर अपराध मामलों के हस्तांतरण और उनकी जांच की निगरानी करने के निर्देश भी दिए गए हैं। जिला और शहर के साइबर अपराध थानों को स्थानीय थानों से स्थानांतरित किए गए मामलों का रिकॉर्ड रखने और उनकी जांच की उचित निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है।
पुलिस का मानना है कि इस व्यवस्था से साइबर अपराध के मामलों की जांच अधिक व्यवस्थित हो सकेगी और विशेष रूप से ऑनलाइन वित्तीय ठगी में विशेषज्ञ जांचकर्ताओं की भूमिका शुरुआती चरण से सुनिश्चित होगी। इससे डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने, संदिग्ध खातों और लेनदेन की जांच करने तथा ठगी की रकम का पता लगाने की कार्रवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
