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Home»Policy Watch»क्लॉड एआई बना हथियारों और साइबर अपराध का नया औजार, चीन समेत कई देशों पर गंभीर आरोप
Policy Watch

क्लॉड एआई बना हथियारों और साइबर अपराध का नया औजार, चीन समेत कई देशों पर गंभीर आरोप

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 15, 2026No Comments6 Mins Read
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एआई मॉडल के इस्तेमाल से मिसाइल और ड्रोन सॉफ्टवेयर तैयार करने, करीब 50 संगठनों पर साइबर अभियान चलाने, बड़े पैमाने पर निगरानी और 4,700 से अधिक नकली एआई प्रोफाइल वाले डेटिंग ऐप नेटवर्क संचालित करने के दावे
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नई दिल्ली। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इसके दुरुपयोग का खतरा भी गंभीर रूप लेता दिखाई दे रहा है। एआई मॉडल क्लॉड के इस्तेमाल को लेकर सामने आई एक खतरा खुफिया रिपोर्ट में हथियारों के विकास, साइबर हमलों, निगरानी, राजनीतिक लक्ष्यों की पहचान और ऑनलाइन ठगी से जुड़े कई मामलों का दावा किया गया है। रिपोर्ट में चीन, रूस, ईरान, यमन, माली और यूरोप से जुड़े संदिग्ध अभियानों का उल्लेख है। इन मामलों को जांच के निष्कर्ष और आरोपों के रूप में पेश किया गया है, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि सभी मामलों में नहीं हुई है।
रिपोर्ट के अनुसार चीन से जुड़े एक संदिग्ध संचालक ने क्लॉड की मदद से इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और वायु रक्षा दमन के लिए सॉफ्टवेयर तैयार किया। इस परियोजना में संभावित लक्ष्यों की प्राथमिकता तय करने और रडार जामिंग का मॉडल तैयार करने जैसी गतिविधियां शामिल थीं। सिमुलेशन के दौरान ताइवान के 12 लक्ष्यों को शामिल किया गया। इनमें शुरुआती चेतावनी वाले रडार, पैट्रियट और तिएन कुंग मिसाइल प्रणालियां, वायु ठिकाने और एक कमांड बंकर शामिल थे। संबंधित खातों को बाद में प्रतिबंधित कर दिया गया।
चीनी नौसेना से जुड़े एक अन्य मामले में क्लॉड का इस्तेमाल एंटी-टॉरपीडो प्रणाली की तकनीकी रूपरेखा और फायर-कंट्रोल सॉफ्टवेयर तैयार करने में किए जाने का दावा है। एआई की मदद से 200 से अधिक पन्नों का तकनीकी प्रस्ताव तैयार किया गया और प्रस्तावित प्रणाली की अमेरिकी नौसेना की तकनीक से तुलना की गई। एक अन्य चीन आधारित रक्षा खुफिया संचालक ने उच्च शक्ति वाले माइक्रोवेव हथियारों पर शोध, उनके घटकों और आपूर्तिकर्ताओं की पहचान तथा आपूर्ति श्रृंखला का पता लगाने के लिए एआई का इस्तेमाल किया।
यमन से जुड़े एक संदिग्ध समूह ने निर्देशित रॉकेट के लिए सॉफ्टवेयर, 2,000 किलोमीटर से अधिक दूरी वाली प्रस्तावित बैलिस्टिक मिसाइल और हाइपरसोनिक ग्लाइड वाहन से जुड़े मिसाइल संस्करण पर काम में क्लॉड की सहायता ली। इसमें कोडिंग, सिमुलेशन और तकनीकी समस्याओं का समाधान शामिल था। हालांकि, यह प्रमाण नहीं मिला कि इन प्रयासों से कोई परिचालन हथियार सफलतापूर्वक तैयार किया गया। रूस से जुड़े संदिग्ध संचालकों ने स्वायत्त एफपीवी हमलावर ड्रोन के झुंड के लिए लक्ष्य चयन, अंतिम दिशा-निर्देशन और कई ड्रोन के बीच समन्वय से संबंधित सॉफ्टवेयर विकसित करने में एआई का इस्तेमाल किया।
साइबर क्षेत्र में भी एआई के इस्तेमाल ने चिंता बढ़ाई है। रिपोर्ट के मुताबिक चीन में संभावित रूप से चांगशा से जुड़े चीनी भाषी संचालकों ने करीब 50 संगठनों को निशाना बनाया। इनमें विदेशी सरकारी नेटवर्क भी शामिल थे। समूह ने सॉफ्टवेयर की अज्ञात कमजोरियां खोजने, उनके शोषण के लिए तकनीकी तरीके विकसित करने और सीमित मानवीय निगरानी में साइबर घुसपैठ के कुछ चरण पूरे करने के लिए एआई आधारित कार्यप्रवाह का इस्तेमाल किया।
रूस से जुड़े एक अन्य साइबर समूह पर यूक्रेन के सरकारी, सैन्य और राजनयिक क्षेत्रों को निशाना बनाने का आरोप है। इसमें फिशिंग, होटल वाई-फाई नेटवर्क के जरिये घुसपैठ और व्हाट्सऐप खातों पर कब्जे जैसी गतिविधियों में एआई के इस्तेमाल का दावा किया गया। ईरान से जुड़े एक संचालक ने अमेरिकी नौसैनिक बलों के खिलाफ संभावित लक्ष्य संबंधी जानकारी जुटाने के लिए सार्वजनिक तस्वीरों, जहाजों और विमानों के पहचान संकेतों तथा वाणिज्यिक उपग्रह तस्वीरों का विश्लेषण कराया। इसके अलावा जहाजों के संचार उपकरणों और औद्योगिक नियंत्रण प्रणालियों से जुड़ी सॉफ्टवेयर कमजोरियों पर भी शोध कराया गया।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

निगरानी के मामलों में चीन से जुड़े एक अभियान ने सीरिया में उइगर समुदाय के लोगों की पहचान और उनसे संपर्क करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया। ऐसे लोगों को तलाशने का प्रयास किया गया जिन्हें आर्थिक या व्यक्तिगत रूप से कमजोर माना गया। अन्य मामलों में कैथोलिक धर्मगुरुओं, ताइवान के ईसाई नेताओं, तिब्बती बौद्धों, असंतुष्टों और कार्यकर्ताओं से जुड़ी जानकारी जुटाने तथा निगरानी रिपोर्ट तैयार करने में एआई के इस्तेमाल का दावा किया गया।
माली में क्लॉड का इस्तेमाल ऐसी घरेलू निगरानी प्रणाली के निर्माण में मुख्य तकनीकी साधन के रूप में किए जाने की बात कही गई है, जो देश के तीन मोबाइल नेटवर्क पर करीब 2.5 करोड़ सिम कार्ड से जुड़े आंकड़ों की निगरानी कर सकती थी। ईरान से जुड़े मामलों में लोगों की पहचान और सार्वजनिक ऑनलाइन गतिविधियों का विश्लेषण करने वाली प्रणालियों के निर्माण का दावा भी सामने आया।
राजनीतिक गतिविधियों को निशाना बनाने में भी एआई के इस्तेमाल की बात कही गई है। एक फ्रांसीसी भाषी संचालक ने 42 यूरोपीय राजनीतिक दलों, मीडिया संस्थानों, विचार समूहों और उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाताओं को निशाना बनाया। इस अभियान में डेटा और लॉगिन जानकारी चोरी करने तथा लोगों की निजी जानकारी जुटाने और व्यवस्थित करने वाली प्रणाली तैयार करने का आरोप है।
सबसे अलग और व्यापक ठगी के मामले में चीन से जुड़े एक अभियान ने 20 से अधिक डेटिंग ऐप विकसित किए। इनमें 4,700 से ज्यादा एआई आधारित नकली प्रोफाइल बनाए गए और इन प्रोफाइल ने कम से कम 25,000 उपयोगकर्ताओं से बातचीत की। रिपोर्ट के अनुसार स्वचालित एआई प्रोफाइल के साथ भुगतान पाने वाले वास्तविक लोगों को भी जोड़ा गया, ताकि उपयोगकर्ताओं को बातचीत करने वाले व्यक्ति वास्तविक लगें। इस तरह एआई का इस्तेमाल भरोसा कायम करने और संभावित पीड़ितों को लंबे समय तक बातचीत में उलझाए रखने के लिए किया गया।
रिपोर्ट में जैविक हथियारों से संबंधित संभावित दुरुपयोग के पांच मामलों का भी उल्लेख किया गया है। इनमें चिकनगुनिया वायरस में बदलाव से संबंधित शोध के लिए अनुदान आवेदन तैयार कराने और अत्यधिक रोगजनक एवियन इन्फ्लूएंजा पर शोध के दौरान सेवा प्रतिबंधों से बचने की कोशिश जैसे मामले शामिल हैं। ऑर्थोपॉक्सवायरस तथा नए विष और टॉक्सिन से संबंधित शोध के लिए भी मॉडल का इस्तेमाल किए जाने का दावा किया गया।
एआई कंपनी ने कहा कि उसके सुरक्षा उपायों ने ऐसे कई प्रयासों को रोका और संदिग्ध खातों पर कार्रवाई की गई। हालांकि, कुछ गतिविधियां सुरक्षा व्यवस्था को पार करने में सफल रहीं। चीन ने रिपोर्ट के आरोपों से अनभिज्ञता जताते हुए एआई के विकास को सकारात्मक उद्देश्यों के लिए किए जाने की बात कही है। कुल मिलाकर सामने आए मामले यह संकेत देते हैं कि एआई की बढ़ती क्षमता साइबर अपराधियों और अन्य संदिग्ध संचालकों को कम संसाधनों में जटिल तकनीकी गतिविधियां करने में मदद कर सकती है, जिससे एआई सुरक्षा और दुरुपयोग रोकने के उपायों की चुनौती और बढ़ गई है।
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