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Home»Policy Watch»यूक्रेन में फर्जी कॉल सेंटरों पर शिकंजा, संचालन और कर्मचारियों के लिए 12 साल तक की सजा का प्रावधान
Policy Watch

यूक्रेन में फर्जी कॉल सेंटरों पर शिकंजा, संचालन और कर्मचारियों के लिए 12 साल तक की सजा का प्रावधान

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 16, 2026No Comments3 Mins Read
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भ्रष्टाचार कांड के बाद संसद ने कड़ा कानून मंजूर किया; व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी के दुरुपयोग से ठगी को अलग अपराध बनाने के साथ लोगों की भर्ती पर भी रोक, राष्ट्रपति की मंजूरी बाकी
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कीव। यूक्रेन ने संगठित साइबर ठगी और फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए ऐसे केंद्रों को चलाने, उनमें काम करने और लोगों की भर्ती करने को अलग अपराध बनाने वाला कड़ा कानून मंजूर किया है। संसद में पारित कानून के तहत धोखाधड़ी के लिए इलेक्ट्रॉनिक संचार माध्यमों का इस्तेमाल करने, चोरी या गलत तरीके से हासिल की गई व्यक्तिगत और बैंकिंग जानकारी के जरिए पैसे या अन्य संपत्ति हड़पने पर भी आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान किया गया है।
कानून के तहत फर्जी कॉल सेंटर स्थापित करने, उनका संचालन करने, उनमें काम करने या ऐसे अभियानों के लिए लोगों की भर्ती करने वालों को सात से 12 साल तक की जेल हो सकती है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद अब कानून को राष्ट्रपति की स्वीकृति का इंतजार है।
यूक्रेन में फर्जी कॉल सेंटर लंबे समय से साइबर ठगी का बड़ा माध्यम बने हुए हैं। संगठित गिरोह बड़ी संख्या में ऑपरेटरों को तैनात कर संभावित पीड़ितों से संपर्क करते हैं। उन्हें निवेश के नाम पर फर्जी योजनाओं में पैसा लगाने, बैंक खाते की जानकारी साझा करने या सीधे रकम ट्रांसफर करने के लिए तैयार किया जाता है। कुछ मामलों में ठग पीड़ितों के बैंक खातों तक पहुंच हासिल करने की कोशिश भी करते हैं।
यह कानून पहली बार 2023 में पेश किया गया था, लेकिन हाल में सामने आए भ्रष्टाचार के मामले के बाद इसे तेजी से आगे बढ़ाया गया। यूक्रेन की भ्रष्टाचार रोधी एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि 2025 के मध्य से कुछ सरकारी अधिकारियों ने फर्जी कॉल सेंटरों से रिश्वत लेकर उनकी गतिविधियों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचाने में मदद की। जांच के अनुसार, इन केंद्रों का संचालन यूक्रेन के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले लोगों को निशाना बनाकर किया जा रहा था।
जांच एजेंसियों ने इस मामले में पांच लोगों को संदिग्ध बनाया है। मामले की जांच के दौरान अभियोजक कार्यालय से जुड़े अधिकारियों पर फर्जी कॉल सेंटरों को संरक्षण देने के बदले रिश्वत लेने के आरोप लगाए गए। हालांकि तत्कालीन अभियोजक जनरल ने इन आरोपों से स्पष्ट रूप से इनकार किया और उनके खिलाफ इस मामले में आरोप तय नहीं किए गए।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

संसद ने सोमवार को उन्हें अभियोजक जनरल के पद से हटाने के पक्ष में मतदान किया था। इसके बाद राष्ट्रपति ने उनकी बर्खास्तगी का आदेश जारी किया। वह इससे एक दिन पहले यूक्रेन छोड़ चुके थे।
फर्जी कॉल सेंटरों के खिलाफ कार्रवाई केवल कानून बनाने तक सीमित नहीं है। जुलाई में साइबर पुलिस ने राजधानी कीव में एक ऐसे कॉल सेंटर को ध्वस्त करने का दावा किया था, जिसने कथित तौर पर दर्जनों अमेरिकी नागरिकों से 5 लाख डॉलर से अधिक की ठगी की थी। जांचकर्ताओं के अनुसार, इस गिरोह में अंग्रेजी बोलने वाले कर्मचारियों को शामिल किया गया था। इनमें अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और यूरोपीय देशों के लोग भी शामिल थे। ऑपरेटर खुद को वित्तीय सलाहकार बताकर पीड़ितों को काल्पनिक संपत्तियों में निवेश के लिए तैयार करते थे।
अगस्त में यूक्रेनी अधिकारियों ने देशभर में व्यापक अभियान चलाया। पुलिस, घरेलू सुरक्षा सेवा और अभियोजक कार्यालय के समन्वित अभियान में एक सप्ताह के दौरान 411 स्थानों पर तलाशी ली गई और 94 संदिग्ध फर्जी कॉल सेंटर बंद कराए गए।
साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, फर्जी कॉल सेंटर अब केवल फोन आधारित ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनमें सोशल इंजीनियरिंग, पहचान संबंधी जानकारी की चोरी, बैंकिंग डेटा के दुरुपयोग और अंतरराष्ट्रीय धन हस्तांतरण जैसे कई स्तर शामिल हो सकते हैं। ऐसे नेटवर्क के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए ऑपरेटरों के साथ-साथ धन के प्रवाह, डिजिटल बुनियादी ढांचे और भर्ती नेटवर्क की पहचान करना भी महत्वपूर्ण होता है।
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