अलीगढ़। उत्तर प्रदेश में मिलावटी और अवैध बायोडीजल के कारोबार पर रोक लगाने के लिए अब हर जिले में टास्क फोर्स गठित की जाएगी। शासन के निर्देश पर बनने वाली यह टीम जिले में संचालित सभी पंजीकृत और गैर-पंजीकृत बायोडीजल तथा बायो-पंप उत्पादन और बिक्री केंद्रों का 15 दिन के भीतर भौतिक सत्यापन करेगी। बिना अनुमति या निर्धारित मानकों के विपरीत संचालित केंद्र मिलने पर उसे सील करने के साथ वहां उपलब्ध ईंधन का स्टॉक और डिस्पेंसिंग यूनिट भी जब्त की जाएगी। संबंधित संचालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने की कार्रवाई भी होगी।
जिले में गठित होने वाली टास्क फोर्स में उपजिलाधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी और यूपीनेडा के परियोजना अधिकारी शामिल होंगे। जांच के दौरान प्रत्येक केंद्र से ईंधन के नमूने लिए जाएंगे। इन नमूनों को तेल विपणन कंपनियों की प्रयोगशालाओं में जांच के लिए भेजा जाएगा। यदि ईंधन निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया तो संबंधित संचालक के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
शासन स्तर पर भेजे गए निर्देश में फर्जी एलओआई और फ्रेंचाइजी के नाम पर लोगों को बायोडीजल केंद्र खोलने का झांसा दिए जाने का मामला भी सामने आया है। जांच में पता चला है कि कुछ कथित फर्जी कंपनियां और व्यक्ति वैध बायोडीजल संयंत्र स्थापित किए बिना ही एलओआई यानी लेटर ऑफ इंटेंट और फ्रेंचाइजी देने के नाम पर लोगों से रकम वसूल रहे हैं। आरोप है कि केंद्र खोलने के लिए इच्छुक लोगों से 20 से 30 लाख रुपये तक लिए जा रहे हैं।
इसके बाद ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में जरूरी सरकारी अनुमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र के बिना बायो-पंप स्थापित किए जाने की शिकायतें मिली हैं। ऐसे केंद्रों के संचालन की वैधता की जांच के लिए टास्क फोर्स संबंधित दस्तावेज, अनुमति और एनओसी की पड़ताल करेगी। अधिकारियों के मुताबिक, केवल किसी कंपनी की ओर से जारी एलओआई या फ्रेंचाइजी दस्तावेज के आधार पर ईंधन बिक्री केंद्र संचालित नहीं किया जा सकता।
इन केंद्रों पर केमिकल युक्त अपमिश्रित डीजल और पेट्रोल बेचे जाने की शिकायतें भी सामने आई हैं। शासन के अनुसार, मानकों के विपरीत तैयार या मिलावटी ईंधन की बिक्री से वाहनों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसके अलावा ऐसे कारोबार से सरकारी राजस्व को नुकसान होने के साथ सुरक्षा संबंधी जोखिम भी पैदा हो सकते हैं। इसी वजह से ईंधन के नमूनों की प्रयोगशाला जांच को अभियान का अहम हिस्सा बनाया गया है।
Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise
प्रदेश में अवैध और मिलावटी ईंधन के कारोबार से जुड़े मामलों में पहले भी पुलिस कार्रवाई हो चुकी है। फिरोजाबाद के एका और मैनपुरी के कुरावली थाने में संबंधित फर्मों और आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इन मामलों के बाद शासन स्तर पर प्रदेशभर में अवैध बायोडीजल कारोबार की निगरानी बढ़ाने और ऐसे केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।
बी-100 बायोडीजल के उत्पादन और बिक्री को लेकर भी नियमों का पालन जरूरी है। इसके लिए यूपीनेडा के निदेशक की अनुमति और संबंधित जिलाधिकारी की संस्तुति आवश्यक बताई गई है। इसके अलावा बायोडीजल केंद्रों को अग्निशमन, प्रदूषण नियंत्रण, माप-तौल और विस्फोटक सुरक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों का पालन करना होता है। जांच के दौरान इन सभी अनुमतियों और सुरक्षा मानकों का सत्यापन किया जाएगा।
टास्क फोर्स यह भी देखेगी कि जिन केंद्रों को बायोडीजल या बायो-पंप के रूप में संचालित किया जा रहा है, वहां वास्तव में स्वीकृत गतिविधियां ही हो रही हैं या किसी अन्य प्रकार के ईंधन की बिक्री की जा रही है। ईंधन के स्टॉक, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और डिस्पेंसिंग यूनिट की स्थिति का भी मिलान किया जाएगा।
अधिकारियों के अनुसार, बायोडीजल की आड़ में मिलावटी ईंधन बेचने वालों के खिलाफ पहले से भी अभियान चलाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत जांच को जिलेवार और अधिक व्यवस्थित किया जाएगा। 15 दिन में भौतिक सत्यापन पूरा होने के बाद संदिग्ध केंद्रों के खिलाफ कार्रवाई रिपोर्ट तैयार की जाएगी। प्रयोगशाला जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।
