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Home»Policy Watch»फेसबुक-इंस्टाग्राम कंटेंट हटाने पर हाईकोर्ट का सरकार से सवाल, मांगे यूआरएल से लेकर आदेश तक के दस्तावेज
Policy Watch

फेसबुक-इंस्टाग्राम कंटेंट हटाने पर हाईकोर्ट का सरकार से सवाल, मांगे यूआरएल से लेकर आदेश तक के दस्तावेज

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 18, 2026No Comments3 Mins Read
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पूर्व सीपीएस नीरज भारती और बलदेव कुमार की याचिकाओं पर सुनवाई; हाईकोर्ट ने पूछा- किस कानून के तहत टेक डाउन नोटिस भेजा गया और पोस्ट में क्या गैरकानूनी पाया गया
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शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिव नीरज भारती और बलदेव कुमार उर्फ बंटी सिराजी के फेसबुक-इंस्टाग्राम अकाउंट से कथित तौर पर कंटेंट हटाए जाने के मामले में राज्य सरकार से कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। अदालत ने सरकार को सोशल मीडिया मंच मेटा को भेजे गए टेक डाउन नोटिस से जुड़े दस्तावेज, आदेश और अन्य जानकारी पेश करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह भी पूछा है कि संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट में ऐसा क्या गैरकानूनी पाया गया था, जिसके आधार पर उसे हटाने या ब्लॉक करने की कार्रवाई की गई।
न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति भूपेश शर्मा की खंडपीठ ने दोनों याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से टेक डाउन प्रक्रिया का कानूनी आधार स्पष्ट करने को कहा। अदालत ने विशेष रूप से यह जानकारी मांगी है कि सोशल मीडिया सामग्री हटाने की कार्रवाई के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी नियम, 2021 के नियम 3(1)(डी) में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
हाईकोर्ट ने सरकार को वह लिखित आदेश भी पेश करने को कहा है, जिसके आधार पर मेटा को टेक डाउन नोटिस भेजने वाले अधिकारी को ऐसी कार्रवाई के लिए अधिकृत किया गया था। अदालत ने नोटिस जारी करने वाले अधिकारी का नाम, पद और रैंक भी बताने का निर्देश दिया है। इससे यह स्पष्ट होगा कि संबंधित अधिकारी को सोशल मीडिया मंच से कंटेंट हटाने की मांग करने का अधिकार किस आदेश या प्रावधान के तहत मिला था।
खंडपीठ ने सरकार से कार्रवाई के पीछे इस्तेमाल किए गए कानूनी प्रावधान की जानकारी भी मांगी है। कोर्ट ने पूछा है कि किस वैधानिक या कानूनी धारा के तहत फेसबुक और इंस्टाग्राम से संबंधित कंटेंट को हटाने या ब्लॉक करने के लिए कहा गया। साथ ही सरकार को यह बताना होगा कि याचिकाकर्ताओं के कंटेंट में ऐसी कौन-सी सामग्री थी, जिसे कानून के तहत गैरकानूनी माना गया।
अदालत ने केवल सामान्य विवरण देने के बजाय हटाए गए कंटेंट की सटीक पहचान से जुड़े रिकॉर्ड भी मांगे हैं। इसके तहत सरकार को उन सभी संबंधित यूआरएल या लिंक को पेश करने का निर्देश दिया गया है, जिनसे जुड़ी सामग्री को हटाने की शिकायत की गई थी। इससे यह पता चल सकेगा कि टेक डाउन कार्रवाई किन पोस्ट या ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ की गई थी।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

मामले में याचिकाकर्ताओं की ओर से सोशल मीडिया अकाउंट से सामग्री हटाए जाने की कार्रवाई को चुनौती दी गई है। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार से कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड मांगा, ताकि यह देखा जा सके कि टेक डाउन नोटिस जारी करने से पहले आवश्यक कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगली तारीख तक यदि सरकार की ओर से आवश्यक जवाब और रिकॉर्ड दाखिल नहीं किए जाते हैं, तो उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही मामले की समीक्षा की जाएगी। ऐसे में राज्य सरकार को अगली सुनवाई तक टेक डाउन नोटिस से संबंधित दस्तावेज और कार्रवाई का आधार रिकॉर्ड पर रखना होगा।
सरकार को अब अदालत के समक्ष नोटिस जारी करने वाले अधिकारी की जानकारी, उसे कार्रवाई के लिए अधिकृत करने वाला लिखित आदेश, टेक डाउन के लिए इस्तेमाल कानूनी प्रावधान, संबंधित कंटेंट को गैरकानूनी मानने का आधार और हटाए गए पोस्ट के सटीक यूआरएल पेश करने होंगे।
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद मामले में मुख्य सवाल सोशल मीडिया कंटेंट हटाने की प्रक्रिया और उसके कानूनी आधार से जुड़ गया है। अगली सुनवाई में सरकार की ओर से पेश किए जाने वाले रिकॉर्ड के आधार पर अदालत यह देखेगी कि मेटा को भेजे गए टेक डाउन नोटिस के लिए आवश्यक अधिकार और निर्धारित प्रक्रिया मौजूद थी या नहीं।
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