आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में गोल्ड लोन के नाम पर ₹51 लाख रुपये की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि बैंक टारगेट पूरा करने के बहाने एक कारोबारी को गोल्ड लोन लेने के लिए तैयार किया गया और बाद में फर्जी तरीके से लोन की रकम दूसरे खाते में ट्रांसफर करा दी गई। मामले में पुलिस आयुक्त के आदेश पर ताजगंज थाने में आईसीआईसीआई बैंक के मैनेजर समेत नौ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
यह मामला बेलगंज स्थित बरौलिया बिल्डिंग के मालिक कौशल किशोर बरौलिया से जुड़ा है। पीड़ित के अनुसार, वर्ष 2016 से उनकी बिल्डिंग में आईसीआईसीआई बैंक की एक शाखा संचालित हो रही है। इसी दौरान बैंक मैनेजर विवेक सिंह से उनके अच्छे संबंध हो गए थे। आरोप है कि फरवरी 2026 में विवेक सिंह उनके पास पहुंचे और बताया कि बैंक का गोल्ड लोन का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है और उन्हें इसमें मदद की जरूरत है।
पीड़ित के अनुसार, बैंक मैनेजर ने उन्हें भरोसा दिलाया कि यदि वह गोल्ड लोन ले लेते हैं तो एक-दो महीने में खाता बंद कर उनका सोना वापस कर दिया जाएगा। मैनेजर के आग्रह पर कौशल किशोर बरौलिया इसके लिए तैयार हो गए। उन्होंने अपने बेटे विभोर बरौलिया के नाम पर 445.40 ग्राम सोना गिरवी रखकर गोल्ड लोन लिया।
शिकायत के मुताबिक, इस गोल्ड लोन के तहत करीब ₹45.13 लाख रुपये विभोर बरौलिया के बैंक खाते में जमा हुए। कुछ समय बाद जब उन्होंने लोन खाता बंद कर सोना वापस लेने की बात कही तो बैंक मैनेजर ने कथित रूप से कहा कि पहले खाते में आई रकम का लेनदेन दिखाना जरूरी है, तभी प्रक्रिया पूरी हो सकेगी।
आरोप है कि मैनेजर के कहने पर विभोर के खाते से रकम ट्रांसफर कराई गई और उनसे दो ब्लैंक चेक भी ले लिए गए। पीड़ित परिवार को बताया गया कि यह रकम दोबारा उनके खाते में वापस आ जाएगी। लेकिन बाद में पता चला कि इन चेक के माध्यम से बड़ी रकम दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कर दी गई।
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शिकायत में आरोप लगाया गया है कि चेक के जरिए करीब ₹50.60 लाख रुपये सौरभ साहनी के खाते में पहुंच गए। जब इस बारे में जानकारी ली गई तो बैंक मैनेजर ने इसे गलती से हुआ ट्रांसफर बताया। हालांकि, पीड़ित पक्ष ने इसे सुनियोजित साजिश का हिस्सा बताया है।
जांच में सामने आया कि सौरभ साहनी ने फतेहाबाद मार्ग स्थित ग्लोबल कैपिटल से पहले ही गोल्ड लोन ले रखा था। आरोप है कि अपना सोना छुड़ाने के लिए उसने कौशल किशोर बरौलिया के खाते से ट्रांसफर हुई रकम का चेक केपरी ग्लोबल कैपिटल में जमा कराया था।
पीड़ित को जब पूरे मामले की जानकारी हुई तो उन्होंने पुलिस से शिकायत की। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद केपरी ग्लोबल कैपिटल से सोना रिलीज होने से रोक दिया गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि साजिश के तहत सौरभ साहनी और उसके परिवार की महिलाओं के बैंक खाते कुछ समय पहले ही आईसीआईसीआई बैंक की संबंधित शाखा में खुलवाए गए थे, ताकि रकम के लेनदेन को अंजाम दिया जा सके।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले में बैंक रिकॉर्ड, खाते से हुए लेनदेन, चेक की जानकारी और सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि गोल्ड लोन की आड़ में उनकी संपत्ति और रकम दोनों को फंसाने की कोशिश की गई। वहीं पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित धोखाधड़ी में कौन-कौन लोग शामिल थे और रकम ट्रांसफर करने की पूरी प्रक्रिया कैसे अंजाम दी गई।
