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Home»क्राइम»प्रतिबंधित ऐप के जरिए खड़ा हो रहा था अलगाववादी नेटवर्क, ‘वारिस पंजाब दे’ के सदस्यों और संदिग्ध आतंकियों की जांच तेज
क्राइम

प्रतिबंधित ऐप के जरिए खड़ा हो रहा था अलगाववादी नेटवर्क, ‘वारिस पंजाब दे’ के सदस्यों और संदिग्ध आतंकियों की जांच तेज

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 31, 2026No Comments3 Mins Read
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बहराइच और बलरामपुर से गिरफ्तार आरोपियों के डिजिटल डिवाइस से मिले अहम सुराग; पाकिस्तानी गैंगस्टर कनेक्शन और मुंबई नेटवर्क की भी जांच में जुटी एटीएस
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अलगाववादी और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े नेटवर्क की जांच कर रहे आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) को डिजिटल माध्यमों से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। जांच में सामने आया है कि प्रतिबंधित जंगी ऐप के जरिए कुछ संदिग्ध तत्व अपने संपर्क बढ़ाने और नेटवर्क तैयार करने की कोशिश कर रहे थे। एजेंसी अब इस डिजिटल नेटवर्क, इसके इस्तेमाल करने वालों और संभावित सहयोगियों की पहचान में जुटी है।

एटीएस की जांच में पता चला है कि प्रतिबंधित संगठन ‘वारिस पंजाब दे’ से जुड़े कुछ सक्रिय सदस्य भी इस ऐप के माध्यम से संपर्क स्थापित कर रहे थे। पिछले दिनों बहराइच जिले के रुपईडीहा क्षेत्र से गिरफ्तार मनबीर सिंह ढिल्लो और विक्रमजीत सिंह पर आरोप है कि वे इसी डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पंजाब में अपने संपर्कों और नेटवर्क को मजबूत करने की कोशिश कर रहे थे।

जांच एजेंसियों के अनुसार, ऐसे प्रतिबंधित ऐप का इस्तेमाल सामान्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से अलग तरीके से किया जाता है, जहां संदिग्ध लोग अपनी पहचान छिपाकर बातचीत और संपर्क बनाए रखने की कोशिश करते हैं। एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और क्या इसका इस्तेमाल किसी बड़ी साजिश के लिए किया जा रहा था।

जांच के दौरान पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी के कनेक्शन की जानकारी भी सामने आई है। एजेंसियों को आशंका है कि वह भी इसी ऐप के माध्यम से कुछ संदिग्ध लोगों के संपर्क में था। इस जानकारी के बाद एटीएस ने डिजिटल गतिविधियों, कॉल रिकॉर्ड और ऑनलाइन संपर्कों की गहन जांच शुरू कर दी है।

अधिकारियों के अनुसार, आतंक और अलगाववादी गतिविधियों से जुड़े समूह अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर रहे हैं। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियां संदिग्ध ऐप, सोशल मीडिया अकाउंट और ऑनलाइन नेटवर्क की निगरानी बढ़ा रही हैं।

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शहरोज के मोबाइल से मिले अहम सुराग

वहीं, बलरामपुर से गिरफ्तार संदिग्ध आतंकी शहरोज के मोबाइल फोन की जांच में भी कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। एटीएस को उसके डिजिटल डिवाइस से कुछ ऐसे नंबर और संपर्क मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।

जांच एजेंसी को शहरोज के मोबाइल से मुंबई कनेक्शन से जुड़े कुछ संदिग्ध नंबर भी मिले हैं। एजेंसी अब इन नंबरों की कॉल डिटेल, संपर्कों की प्रकृति और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

एटीएस ने पुलिस कस्टडी रिमांड के दौरान शहरोज से कई चरणों में पूछताछ की है। पूछताछ में उसके संपर्कों, गतिविधियों और संभावित नेटवर्क से जुड़े सवाल किए गए हैं। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वह किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था।

जांच अधिकारियों का मानना है कि डिजिटल डिवाइस ऐसे मामलों में महत्वपूर्ण सबूत साबित होते हैं। मोबाइल फोन, चैट रिकॉर्ड, कॉल डिटेल और ऑनलाइन गतिविधियों के माध्यम से संदिग्धों के संपर्कों और योजनाओं की जानकारी हासिल की जा सकती है।

एटीएस अब बहराइच और बलरामपुर से जुड़े दोनों मामलों को आपस में जोड़कर भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दोनों मामलों में किसी तरह का साझा संपर्क या डिजिटल लिंक मौजूद है।

सुरक्षा एजेंसियां प्रतिबंधित ऐप के इस्तेमाल, विदेशी संपर्कों और देश विरोधी गतिविधियों से जुड़े हर पहलू की जांच कर रही हैं। अधिकारियों के अनुसार, जांच आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान और संभावित कार्रवाई की दिशा भी स्पष्ट होगी।

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