नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने महंगी कैंसर दवाओं की कथित नकली सप्लाई करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 17 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान करीब ₹9 करोड़ मूल्य की नकली दवाएं, खाली दवा की शीशियां, पैकेजिंग सामग्री और कथित तौर पर नकली दवाएं तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला सामान बरामद किया है। गिरोह पर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कैंसर मरीजों को महंगी दवाओं के नाम पर कथित तौर पर नकली या संदिग्ध दवाएं बेचने का आरोप है।
जांच के अनुसार, गिरोह के सदस्य कथित तौर पर इस्तेमाल हो चुकी या खाली कैंसर दवाओं की शीशियां और उनके पैकेजिंग मटेरियल जुटाते थे। इसके बाद इन शीशियों को कथित तौर पर दोबारा भरने या उन पर नए लेबल लगाने का काम किया जाता था। तैयार उत्पादों को असली और महंगी कैंसर दवाओं के रूप में मरीजों तथा अन्य खरीदारों तक पहुंचाया जाता था। इस तरीके से आरोपी कथित तौर पर ऊंची कीमत वसूलते थे।
जिन दवाओं के नकली संस्करण तैयार करने का आरोप सामने आया है, उनमें Keytruda और Opdyta जैसी महंगी कैंसर दवाएं शामिल हैं। ये दवाएं कैंसर के इलाज में इस्तेमाल की जाती हैं और इनकी कीमत काफी अधिक होती है। ऐसे में इनके नाम पर नकली दवाओं की बिक्री का मामला मरीजों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद गंभीर माना जा रहा है।
क्राइम ब्रांच की कार्रवाई दिल्ली-NCR के अलग-अलग ठिकानों पर की गई। छापेमारी के दौरान कथित नकली दवा की शीशियां, कच्चा माल, पैकेजिंग सामग्री और दवाओं को तैयार तथा पैक करने में इस्तेमाल होने वाले उपकरण बरामद किए गए। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि गिरोह का नेटवर्क किन राज्यों और शहरों तक फैला हुआ था और नकली दवाओं की सप्लाई किन माध्यमों से की जाती थी।
जांच में कुछ प्रमुख अस्पतालों के कर्मचारियों की कथित भूमिका भी सामने आने की बात कही गई है। आरोप है कि इन कर्मचारियों में से कुछ गिरोह के सदस्यों को खाली दवा की शीशियां उपलब्ध कराते थे। इन्हीं खाली शीशियों और पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल कथित तौर पर नकली दवाओं को असली उत्पाद जैसा दिखाने के लिए किया जाता था। इस पहलू की जांच के जरिए पुलिस गिरोह के सप्लाई नेटवर्क और अस्पतालों से जुड़े संभावित संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि कथित तौर पर तैयार की गई दवाएं कैंसर मरीजों के इलाज के लिए इस्तेमाल की जानी थीं। यदि किसी मरीज को वास्तविक दवा के बजाय नकली या अप्रभावी दवा दी जाती है, तो उसके इलाज पर गंभीर असर पड़ सकता है। इससे बीमारी के नियंत्रण में देरी के साथ मरीज की जान को भी खतरा पैदा हो सकता है।
इस मामले ने दवाओं की सप्लाई चेन में निगरानी और ट्रेसबिलिटी की जरूरत को भी सामने ला दिया है। विशेष रूप से महंगी और जीवनरक्षक दवाओं की पैकेजिंग, वितरण और बिक्री के प्रत्येक चरण पर निगरानी मजबूत करने की आवश्यकता बताई जा रही है। QR-code आधारित ट्रैकिंग व्यवस्था को ऐसे मामलों में उपयोगी माना जाता है, क्योंकि इससे मरीज, अस्पताल और जांच एजेंसियां दवा की प्रामाणिकता और उसकी सप्लाई चेन को सत्यापित कर सकती हैं।
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर कथित नेटवर्क के अन्य सदस्यों, दवाओं के स्रोत, सप्लाई चैनल और खरीदारों के बारे में जानकारी जुटा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि गिरोह ने कितने मरीजों को नकली दवाएं बेचीं और इससे कितने लोगों के इलाज पर असर पड़ा।
नकली दवाओं का कारोबार पहले से ही स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती है, लेकिन कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की कथित मिलावट या जालसाजी का खतरा और भी गंभीर है। दिल्ली क्राइम ब्रांच की कार्रवाई ने फार्मास्युटिकल सप्लाई चेन में सख्त निगरानी और दवाओं की प्रामाणिकता सुनिश्चित करने की जरूरत को फिर रेखांकित किया है। गिरफ्तार आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
