अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर जिले में पुलिस ने एक कथित अंतरराज्यीय मानव तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए महिला सरगना समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आजमगढ़ की एक अपहृत युवती को भी सकुशल बरामद किया। प्रारंभिक जांच के अनुसार, गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों को कथित तौर पर शादी और बेहतर जीवन का झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाता था।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में बाबूलाल, नरेंद्र कुमार, मोहनलाल, बीराराम, चंद्रकला उर्फ पूनम, नसरूद्दीन और ऊषा शामिल हैं। इनमें चार आरोपी राजस्थान के पाली और सिरोही जिलों के निवासी हैं, जबकि अन्य आरोपी उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर और आजमगढ़ से हैं।
पुलिस ने बताया कि यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर सोमवार सुबह संयुक्त अभियान के तहत की गई। अकबरपुर पुलिस, एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU), स्वाट और सर्विलांस टीम ने बसखारी मार्ग पर खिद्दिदरपुर के पास टाटा मोटर्स के निकट घेराबंदी कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया। बरामद युवती को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के बाद परिजनों के सुपुर्द करने की कार्रवाई की जा रही है।
प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस के सामने यह आरोप आया है कि गिरोह गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की युवतियों को शादी का झांसा देकर राजस्थान और हरियाणा ले जाता था, जहां उन्हें कथित तौर पर देह व्यापार में धकेला जाता था। पुलिस इन आरोपों की पुष्टि के लिए विभिन्न पहलुओं की जांच कर रही है।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह का संचालन कथित रूप से अंबेडकरनगर के जलालपुर निवासी ऊषा कर रही थी। पुलिस का दावा है कि वह पूरे नेटवर्क का समन्वय करती थी, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य अलग-अलग जिलों और राज्यों में संभावित पीड़ितों की पहचान कर उन्हें बहला-फुसलाने का काम करते थे।
महत्वपूर्ण मानव तस्करी मामलों पर टिप्पणी करते हुए फ्यूचर क्राइम रिसर्च फाउंडेशन ने कहा कि मानव तस्करी के संगठित नेटवर्क अक्सर सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को निशाना बनाते हैं तथा विवाह, रोजगार या बेहतर भविष्य का झूठा लालच देकर उनका शोषण करते हैं। संस्था ने कहा कि ऐसे मामलों में राज्यों के बीच समन्वित जांच, वित्तीय लेनदेन की पड़ताल और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
पुलिस अब गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों, सहयोगियों और संपर्कों की पहचान करने के लिए विभिन्न स्थानों पर दबिश दे रही है। साथ ही डिजिटल उपकरणों, कॉल रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है ताकि पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क का पता लगाया जा सके। मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
