गुवाहाटी: असम के क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (CID) ने फर्जी असम राइफल्स भर्ती घोटाले के मामले में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये ठगने का आरोप है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान असम के नगांव जिले के लालिपाथर गांव निवासी मोहम्मद अनुवर हुसैन के रूप में हुई है। उसे 24 जुलाई को मोरीगांव जिले के गरुखुटी इलाके से गिरफ्तार किया गया।
CID के अनुसार, यह कार्रवाई उन कई नौकरी अभ्यर्थियों की शिकायतों के बाद की गई, जिन्होंने आरोप लगाया कि हुसैन ने असम राइफल्स में नियुक्ति दिलाने का झूठा भरोसा देकर उनसे पैसे लिए। जांचकर्ताओं को आशंका है कि आरोपी ने इसी तरीके से कई बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाया और अब पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है।
मामले में 14 जुलाई 2026 को CID थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। यह शिकायत लखीमपुर जिले के 25 वर्षीय मोंटू थेंगल और अन्य कथित पीड़ितों ने दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने 20 जुलाई 2025 को शिलांग में आयोजित असम राइफल्स भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लिया था, लेकिन वे चयनित नहीं हो सके थे।
इसी दौरान उनकी कथित तौर पर हुसैन से मुलाकात हुई, जिसने खुद को “असम राइफल्स का मेजर” बताया और दावा किया कि उसके पास बल में प्रभाव और संपर्क हैं। आरोप है कि उसने अभ्यर्थियों को भरोसा दिलाया कि वह अपनी पहुंच के जरिए उन्हें नियुक्ति दिला सकता है। उसने कथित तौर पर नियमित भर्ती प्रक्रिया में असफल उम्मीदवारों को भी विशेष माध्यमों और अन्य आंतरिक प्रक्रियाओं के जरिए नौकरी दिलाने का वादा किया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हुसैन ने कथित रूप से प्रत्येक उम्मीदवार से ₹3.5 लाख से ₹10 लाख तक की रकम मांगी। उम्मीदवारों और उनके परिवारों का विश्वास जीतने के लिए उसने कथित तौर पर लिखित समझौते भी किए और इसके बाद पैसे लिए। जांच में सामने आया है कि भुगतान Google Pay, बैंक ट्रांसफर और नकद माध्यमों से किया गया।
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हालांकि, पैसे लेने के बाद आरोपी कथित रूप से किसी भी उम्मीदवार को नौकरी नहीं दिला सका और न ही रकम वापस की। इसके बाद पीड़ितों ने पुलिस से संपर्क किया, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर CID ने जांच शुरू की।
जांच एजेंसियां अब आरोपी से जुड़े वित्तीय लेनदेन, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, बैंक खातों और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि इन रिकॉर्ड्स से कथित धोखाधड़ी के वास्तविक पैमाने और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका का पता लगाया जा सकता है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी को पीड़ितों तक पहुंचाने, फर्जी दावे तैयार करने या भर्ती प्रक्रिया के बारे में गलत जानकारी फैलाने में किसी अन्य व्यक्ति ने मदद की थी।
CID अधिकारियों ने बताया कि आरोपी को सक्षम अदालत में पेश किया जाएगा और आगे की पूछताछ के लिए पुलिस हिरासत की मांग की जाएगी। हिरासत के दौरान जांचकर्ता यह पता लगाने का प्रयास करेंगे कि आरोपी ने खुद को सैन्य अधिकारी बताने के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया, कितने लोगों से पैसे लिए और क्या इस फर्जीवाड़े में कोई संगठित गिरोह शामिल है।
जांच एजेंसियों का कहना है कि सरकारी नौकरी के इच्छुक युवाओं को निशाना बनाकर किए जाने वाले ऐसे फर्जीवाड़े लगातार बढ़ रहे हैं। इन मामलों में आरोपी अक्सर प्रभावशाली पदों पर होने का झूठा दावा करते हैं, फर्जी दस्तावेज दिखाते हैं और नौकरी की गारंटी देने के नाम पर बड़ी रकम वसूलते हैं।
अधिकारियों ने नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं को सलाह दी है कि वे केवल सरकारी विभागों और सुरक्षा बलों की आधिकारिक वेबसाइटों तथा अधिसूचनाओं के माध्यम से ही भर्ती संबंधी जानकारी प्राप्त करें। साथ ही, ऐसे लोगों से सतर्क रहने को कहा गया है जो पैसे लेकर नौकरी दिलाने या चयन की गारंटी देने का दावा करते हैं।
फिलहाल असम CID यह पता लगाने में जुटी है कि मोहम्मद अनुवर हुसैन अकेले इस कथित फर्जीवाड़े को चला रहा था या फिर वह किसी बड़े भर्ती घोटाला नेटवर्क का हिस्सा था। जांचकर्ताओं का मानना है कि गिरफ्तारी की जानकारी सामने आने के बाद और भी पीड़ित सामने आ सकते हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच से मिलने वाले साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।
