केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को एक महत्वपूर्ण आदेश में निर्देश दिया है कि वह कक्षा 10 और कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में उपयोग होने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की खरीद से जुड़े टेंडर प्रक्रिया, वित्तीय व्यय, आपूर्तिकर्ता चयन और अन्य संबंधित विवरणों की विस्तृत जानकारी पुनः जारी करे। आयोग ने स्पष्ट किया कि सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना अनिवार्य है, विशेषकर उन मामलों में जहां बड़े पैमाने पर सार्वजनिक धन का उपयोग होता है।
आयोग ने CBSE द्वारा पहले दी गई उस प्रतिक्रिया को खारिज कर दिया, जिसमें कई महत्वपूर्ण वित्तीय और प्रशासनिक विवरणों को “व्यावसायिक गोपनीयता” और “संवेदनशील जानकारी” बताकर साझा करने से इनकार किया गया था। CIC ने कहा कि सार्वजनिक संस्थानों को केवल उन्हीं सूचनाओं को रोकने की अनुमति है जो कानून के तहत स्पष्ट रूप से अपवाद श्रेणी में आती हैं, और बाकी जानकारी को नियमों के अनुसार उपलब्ध कराना आवश्यक है।
यह मामला एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है, जिसमें 2023–24 और 2024–25 सत्रों की बोर्ड परीक्षा उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। आवेदन में कागज की गुणवत्ता, पृष्ठों की संख्या, आकार, खरीद लागत, कुल व्यय, जीएसटी भुगतान और टेंडर प्रक्रिया सहित चयन मानदंडों की जानकारी शामिल थी। यह जानकारी देशभर में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं के व्यापक प्रशासन और खर्च की पारदर्शिता से जुड़ी मानी जाती है।
शुरुआती जवाब में CBSE ने केवल उत्तर पुस्तिकाओं की तकनीकी विशेषताएं साझा की थीं, जैसे पेपर ग्रेड और पृष्ठ संख्या, लेकिन लागत, कुल खरीद, और टेंडर से जुड़े विवरण देने से इनकार कर दिया था। बोर्ड ने यह भी कहा था कि यह जानकारी वाणिज्यिक रूप से संवेदनशील है और इसे आरटीआई की धारा 8(1)(d), 8(1)(e) और 8(1)(g) के तहत छूट प्राप्त है।
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हालांकि सूचना आयुक्त सुधा रानी रिलांगी ने अपने आदेश में कहा कि इन छूटों को लागू करने के लिए ठोस और स्पष्ट कारण प्रस्तुत नहीं किए गए। आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी सार्वजनिक प्राधिकरण को पूरी जानकारी रोकने के बजाय केवल उन्हीं हिस्सों को छिपाना चाहिए जो वास्तव में कानून के तहत अपवाद हैं। बाकी जानकारी को धारा 10 के तहत आवश्यकतानुसार संपादित करके साझा किया जाना चाहिए।
CIC ने अपने आदेश में यह भी कहा कि सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। विशेषकर शिक्षा जैसे क्षेत्र में, जहां लाखों छात्रों से जुड़ी परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं, वहां खर्च और टेंडर प्रक्रिया को छिपाना उचित नहीं माना जा सकता। आयोग ने CBSE को निर्देश दिया कि वह आवेदन पर पुनर्विचार करे और बिंदुवार विस्तृत जवाब जारी करे।
इस आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि सूचना अधिकारी द्वारा सुनवाई के दौरान पर्याप्त स्पष्टीकरण नहीं दिया गया, जिससे बोर्ड की दलीलें कमजोर पड़ गईं। आयोग ने कहा कि सरकारी संस्थाओं को केवल वाणिज्यिक गोपनीयता के नाम पर जानकारी रोकने की प्रवृत्ति से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित होती है।
यह फैसला न केवल CBSE बल्कि अन्य परीक्षा और सरकारी खरीद संस्थानों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि यह सार्वजनिक व्यय और टेंडर प्रक्रियाओं में अधिक खुलासे की दिशा में एक मजबूत संकेत देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश भविष्य में RTI मामलों की व्याख्या और सार्वजनिक खरीद में पारदर्शिता के मानकों को और मजबूत करेगा।
आयोग के इस निर्णय से शिक्षा प्रशासन में पारदर्शिता, व्यय नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर नए मानक स्थापित होने की संभावना है।
