नई दिल्ली। पाकिस्तान की संघीय जांच एजेंसी ने मोस्ट वांटेड आतंकियों की नई ‘रेड बुक’ में जैश-ए-मोहम्मद के प्रमुख मसूद अजहर समेत 19 आतंकियों को फरार बताया है। सूची में मसूद अजहर पर घोषित इनाम की राशि भी ₹50 लाख से बढ़ाकर ₹70 लाख कर दी गई है। यह कार्रवाई पेरिस में होने वाली फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स (एफएटीएफ) की बैठक से पहले सामने आई है। आरोप है कि पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय निगरानी और संभावित कार्रवाई से बचने के लिए आतंकियों को फरार दिखाने की रणनीति अपनाई है।
पाकिस्तान लंबे समय से दावा करता रहा है कि मसूद अजहर उसके देश में मौजूद नहीं है और वह अफगानिस्तान भाग चुका है। हालांकि, खुफिया एजेंसियों से मिले पिछले छह महीनों के इनपुट के आधार पर उसके सिंध प्रांत के नवाबशाह शहर में छिपे होने की जानकारी सामने आने का दावा किया गया है। इसके बावजूद नई सूची में उसे फरार घोषित किया गया है।
मसूद अजहर पर इनाम बढ़ाया
नई सूची में मसूद अजहर के अलावा कई अन्य वांछित आतंकियों के नाम शामिल हैं। सूची में उसे फरार बताते हुए उसके बारे में जानकारी देने वाले के लिए इनाम की राशि ₹70 लाख निर्धारित की गई है। पहले यह राशि ₹50 लाख थी।
पाकिस्तान पर आरोप है कि उसने यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के वित्तपोषण और आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर बढ़ते दबाव के बीच उठाया है। एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में दोबारा शामिल होने की स्थिति में पाकिस्तान की आर्थिक व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई जाती रही है।
मुंबई हमलों से जुड़े 11 आतंकियों के नाम
नई रेड बुक में मोहम्मद अमजद खान, शाहिद गफूर और मोहम्मद उस्मान समेत 11 ऐसे आतंकियों के नाम भी शामिल बताए गए हैं, जिन पर मुंबई हमलों में शामिल आतंकियों की समुद्री यात्रा के इंतजाम में मदद करने का आरोप है। जांच रिकॉर्ड के अनुसार, इन लोगों ने ‘अल-हुसैनी’ और ‘अल-फौज’ नाम की नौकाओं के जरिए समुद्री मार्ग से यात्रा की व्यवस्था में कथित भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा सूची में आतंकियों को वित्तीय सहायता देने वाले छह लोगों का भी उल्लेख है। इनमें मोहम्मद इफ्तिखार अली पर ₹70 हजार की आर्थिक मदद देने और अहमद सईद पर कथित तौर पर अभियान के लिए ₹21 लाख उपलब्ध कराने का आरोप है।
मुंबई हमलों के रिकॉर्ड में कथित बदलाव
नई रेड बुक को लेकर सबसे गंभीर आरोप मुंबई के 26/11 हमलों से जुड़े रिकॉर्ड में कथित बदलाव को लेकर है। दावा है कि हमलों में मदद और वित्तीय सहायता देने वाले 19 आरोपियों में से दो प्रमुख आतंकियों—मोहम्मद खान और अब्दुल रहमान—की तस्वीरें, लश्कर-ए-तैयबा से कथित संबंध और उनकी भूमिका से जुड़ी जानकारी रिकॉर्ड से हटा दी गई है।
मोहम्मद खान को तुरबत और अब्दुल रहमान को बहावलनगर का निवासी बताया गया है। दोनों के बारे में दावा है कि वे मुंबई हमलों से जुड़े मामलों में लंबे समय से फरार हैं। जांच रिकॉर्ड के अनुसार, पाकिस्तान की एजेंसी का दावा है कि मुंबई हमलों से जुड़े ये सभी आरोपी करीब 18 वर्षों से फरार हैं।
मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या बढ़ी
आंकड़ों के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में पाकिस्तान में मोस्ट वांटेड आतंकियों की संख्या में करीब 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। नई सूची में शामिल आतंकियों को फरार घोषित किए जाने और उनके खिलाफ इनाम बढ़ाए जाने को लेकर पाकिस्तान की आतंकवाद विरोधी कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।
एफएटीएफ की बैठक से पहले सामने आई इस सूची ने पाकिस्तान की ओर से आतंकवाद के खिलाफ उठाए जा रहे कदमों की वास्तविकता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। मसूद अजहर और मुंबई हमलों से जुड़े अन्य आरोपियों को लेकर पाकिस्तान के दावों तथा उपलब्ध खुफिया सूचनाओं के बीच अंतर भी जांच के घेरे में है।
