देहरादून। उत्तराखंड के देहरादून में 4.60 करोड़ रुपये की जमीन धोखाधड़ी के मामले में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने हरिद्वार के लक्सर से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर आरोप है कि उसने जमीन के वास्तविक मालिक का अधिकृत प्रतिनिधि होने का दावा करते हुए पावर ऑफ अटॉर्नी (जीपीए) के आधार पर कई लोगों से जमीन के सौदे किए और एक ही जमीन को अलग-अलग खरीदारों को बेचकर करोड़ों रुपये की रकम जुटाई।
मामला देहरादून के मौजा डोमगांव स्थित जमीन से जुड़ा है। इस संबंध में 11 जून 2026 को पंजाबी बाग निवासी एक व्यक्ति की शिकायत पर धोखाधड़ी, जालसाजी और जाली दस्तावेजों के इस्तेमाल समेत संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जमीन के सौदे के नाम पर उससे बैंकिंग माध्यम से करीब 4.60 करोड़ रुपये लिए गए, लेकिन बाद में जमीन के अधिकार और बिक्री को लेकर विवाद सामने आया।
जांच में सामने आया कि आरोपी ने खुद को जमीन के वास्तविक मालिक का अधिकृत जीपीए धारक बताया था। इसी आधार पर उसने शिकायतकर्ता समेत अन्य लोगों के साथ जमीन की बिक्री के लिए समझौते और बिक्री विलेख किए। आरोप है कि जीपीए के तहत मिले अधिकारों की सीमा से आगे जाकर जमीन के कई सौदे किए गए। जांचकर्ताओं के अनुसार, एक ही भूखंड को एक से अधिक खरीदारों के साथ सौदे में शामिल किए जाने के कारण कई लोग आर्थिक नुकसान की चपेट में आए।
पुलिस ने मामले की जांच के दौरान जमीन से जुड़े पंजीकृत जीपीए, बिक्री विलेख और बिक्री समझौतों को कब्जे में लेकर संबंधित उप-पंजीयक कार्यालय से उनका सत्यापन कराया। दस्तावेजों की जांच के साथ अलग-अलग खरीदारों से हुए लेनदेन और बैंकिंग रिकॉर्ड की भी पड़ताल की गई। जांच में यह भी पता लगाने की कोशिश की गई कि जमीन के वास्तविक मालिक को किस स्तर तक अधिकार दिए गए थे और उन अधिकारों का इस्तेमाल किन-किन सौदों में किया गया।
जांच के दौरान आरोपी को कई बार नोटिस जारी कर पूछताछ और जांच में शामिल होने के लिए कहा गया, लेकिन वह उपस्थित नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस ने उसकी तलाश तेज कर दी। आरोप है कि गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहा। वह हरिद्वार, देहरादून, सहारनपुर और मुजफ्फरनगर समेत अलग-अलग स्थानों पर छिपता रहा।
तकनीकी निगरानी और अन्य जांच माध्यमों से पुलिस को उसके हरिद्वार क्षेत्र में होने की जानकारी मिली। इसके बाद टीम ने कार्रवाई करते हुए 9 सितंबर को लक्सर के पास से उसे गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ और दस्तावेजों की जांच के आधार पर पुलिस अब इस बात की पड़ताल कर रही है कि जमीन के कितने सौदे किए गए और इस मामले में कुल कितने लोग प्रभावित हुए।
जांच में आरोपी की संपत्ति संबंधी गतिविधियों और जमीन के कारोबार से जुड़े पुराने लेनदेन को भी खंगाला जा रहा है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी ने वर्ष 2017 के आसपास हरिद्वार और देहरादून क्षेत्र में प्रॉपर्टी का कारोबार शुरू किया था। उसकी शैक्षिक योग्यता आठवीं कक्षा तक बताई गई है। जांच एजेंसी को उसके खिलाफ पहले से दर्ज अन्य मामलों की जानकारी भी मिली है, जिनका सत्यापन किया जा रहा है।
जांच एजेंसी का फोकस अब इस बात पर है कि 4.60 करोड़ रुपये की रकम किन खातों में गई और इस पूरे लेनदेन में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। साथ ही, जिन खरीदारों ने इसी जमीन के लिए रकम दी, उनके दस्तावेजों और भुगतान का भी मिलान किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, जमीन की वास्तविक मिल्कियत, जीपीए की वैधता और उसके आधार पर किए गए सभी सौदों की कानूनी स्थिति की जांच के बाद मामले में आगे की कार्रवाई की जाएगी।
