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Home»Policy Watch»एपीएससी भर्ती घोटाले से जुड़े अवमानना मामले में असम के आईएएस अधिकारी को गौहाटी हाईकोर्ट का समन
Policy Watch

एपीएससी भर्ती घोटाले से जुड़े अवमानना मामले में असम के आईएएस अधिकारी को गौहाटी हाईकोर्ट का समन

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 1, 2026No Comments4 Mins Read
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भर्ती घोटाले की आरोपी अधिकारी की बहाली संबंधी आदेश का पालन नहीं करने का आरोप; परिवहन विभाग के आयुक्त एवं सचिव को 31 अगस्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का निर्देश
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गुवाहाटी: गौहाटी उच्च न्यायालय ने असम लोक सेवा आयोग (APSC) भर्ती घोटाले से जुड़े एक अवमानना मामले में राज्य के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी आकाश दीप को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह आदेश उस अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया, जिसमें आरोप लगाया गया है कि न्यायालय द्वारा जारी पूर्व आदेश का पालन नहीं किया गया। अदालत ने अधिकारी को 31 अगस्त को सुबह 10:30 बजे उपस्थित होकर यह स्पष्ट करने को कहा है कि उनके खिलाफ न्यायालय की अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए।

मामला असम परिवहन विभाग से जुड़ा है, जहां आकाश दीप वर्तमान में आयुक्त एवं सचिव के पद पर कार्यरत हैं। अवमानना याचिका में आरोप लगाया गया है कि विभाग ने गौहाटी उच्च न्यायालय के उस आदेश का पालन नहीं किया, जिसमें एपीएससी भर्ती घोटाले की आरोपी अधिकारी सुरंजिता हजारिका को सेवा में बहाल करने का निर्देश दिया गया था। याचिकाकर्ता का कहना है कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभाग ने बहाली की प्रक्रिया पूरी नहीं की।

अदालत के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, इससे पहले गौहाटी उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा था कि सुरंजिता हजारिका की परिवीक्षा अवधि पहले ही पूरी हो चुकी है। न्यायालय ने विभाग को निर्देश दिया था कि उन्हें सेवा में बहाल किया जाए तथा उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही 90 दिनों के भीतर शुरू की जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि विभागीय जांच और सेवा संबंधी कार्रवाई कानून के निर्धारित ढांचे के भीतर आगे बढ़े।

हालांकि, आरोप है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी संबंधित अधिकारी को सेवा में बहाल नहीं किया गया। याचिका में कहा गया है कि परिवहन विभाग ने न तो उन्हें पुनः कार्यभार ग्रहण करने की अनुमति दी और न ही उनकी सेवा समाप्त करने का कोई औपचारिक आदेश जारी किया। इस कथित निष्क्रियता को न्यायालय के आदेश की अवहेलना बताते हुए अवमानना याचिका दायर की गई।

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याचिकाकर्ता ने अदालत से कहा कि न्यायालय के आदेश के बावजूद विभाग की ओर से आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, जिसके कारण उन्हें दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। इसी आधार पर वरिष्ठ आईएएस अधिकारी के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने का अनुरोध किया गया। अदालत ने प्रथम दृष्टया मामले को विचारणीय मानते हुए अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश जारी किया।

गौहाटी उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी को निर्धारित तिथि पर अदालत के समक्ष उपस्थित होकर यह बताना होगा कि न्यायालय के पूर्व आदेश का पालन क्यों नहीं किया गया। यदि अधिकारी संतोषजनक स्पष्टीकरण देने में विफल रहते हैं, तो अदालत अवमानना कानून के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार कर सकती है। हालांकि, अदालत ने अभी मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और न ही अवमानना के आरोपों पर कोई निष्कर्ष निकाला है।

यह मामला असम लोक सेवा आयोग भर्ती घोटाले से जुड़े उन मामलों में नया घटनाक्रम माना जा रहा है, जिनकी सुनवाई पिछले कई वर्षों से विभिन्न न्यायिक मंचों पर जारी है। भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर अनेक आपराधिक और प्रशासनिक मामले पहले से लंबित हैं तथा कई अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कार्रवाई की जा चुकी है। वर्तमान मामला सीधे भर्ती घोटाले के आरोपों पर नहीं, बल्कि न्यायालय के आदेश के कथित अनुपालन न होने से संबंधित है।

अब सभी की नजर 31 अगस्त को होने वाली सुनवाई पर रहेगी, जब आईएएस अधिकारी आकाश दीप को गौहाटी उच्च न्यायालय के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। अदालत उनके स्पष्टीकरण, विभाग द्वारा उठाए गए कदमों और रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा करने के बाद तय करेगी कि अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाई जाए या नहीं। मामले के आगामी घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट होगा कि न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुपालन को लेकर विभाग की क्या स्थिति रही और भविष्य में क्या प्रशासनिक या कानूनी कदम उठाए जाएंगे।

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