नई दिल्ली। वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार में 2026 के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई है। साल की शुरुआत से अब तक बाजार की कुल मार्केट वैल्यू में करीब 45 लाख करोड़ रुपये की कमी आ चुकी है। अक्टूबर में बिकवाली तेज होने के कारण अकेले एक महीने के भीतर बाजार का पूंजीकरण लगभग 31.96 लाख करोड़ रुपये घट गया। दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन भी साल की शुरुआत के मुकाबले करीब 12 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रही है। अब निवेशकों की नजर तीन नवंबर को होने वाले अमेरिकी मिडटर्म चुनाव पर है, क्योंकि इसके नतीजे डिजिटल एसेट से जुड़े कानूनों और नियामकीय नीतियों को प्रभावित कर सकते हैं।
कॉइनगेको की तीसरी तिमाही की रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर के अंत में वैश्विक क्रिप्टो बाजार का कुल मार्केट कैप करीब 2.96 ट्रिलियन डॉलर था। अक्टूबर में गिरावट और तेज हुई। बाजार के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, एक अक्टूबर को करीब 2.94 ट्रिलियन डॉलर रहा कुल पूंजीकरण 31 अक्टूबर तक घटकर लगभग 2.60 ट्रिलियन डॉलर रह गया। इस तरह एक महीने में करीब 340 अरब डॉलर की बाजार वैल्यू कम हो गई। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 31.96 लाख करोड़ रुपये बैठती है।
तीसरी तिमाही के अंत और अक्टूबर के आखिर के आंकड़ों की तुलना करने पर साल के शुरुआती स्तर से बाजार की कुल वैल्यू में करीब 480 अरब डॉलर, यानी लगभग 45 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है। यह बाजार के कुल पूंजीकरण में गिरावट है, न कि निवेशकों के वास्तविक नुकसान का कोई एक समान आंकड़ा। अलग-अलग निवेशकों का लाभ या नुकसान उनकी खरीद कीमत, निवेश की मात्रा और बिक्री के समय पर निर्भर करता है।
बिटकॉइन समेत प्रमुख कॉइन में गिरावट
बिटकॉइन साल की शुरुआत में करीब 87,848 डॉलर पर कारोबार कर रहा था। 31 अक्टूबर को इसका भाव लगभग 77,424 डॉलर रहा। इस तरह इसमें करीब 10,424 डॉलर की गिरावट आई, जो लगभग 12 प्रतिशत है। 94 रुपये प्रति डॉलर के हिसाब से एक बिटकॉइन के भाव में यह अंतर करीब 9.8 लाख रुपये बैठता है। हालांकि, किसी निवेशक का वास्तविक नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि उसने कितने बिटकॉइन किस कीमत पर खरीदे थे।
अक्टूबर के दौरान दूसरी प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी भी दबाव में रहीं। एथेरियम में करीब 21.7 प्रतिशत और सोलाना में लगभग 25.8 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। बाजार में तेज उतार-चढ़ाव का असर डेरिवेटिव कारोबार पर भी पड़ा। क्रिप्टो फ्यूचर ट्रेडिंग में करीब 6.22 अरब डॉलर के सौदे लिक्विडेट हुए। लिक्विडेशन उस स्थिति को कहा जाता है, जब उधार या लीवरेज लेकर किया गया कारोबार नुकसान बढ़ने पर एक्सचेंज की ओर से अपने आप बंद कर दिया जाता है। इससे निवेशकों की पूंजी तेजी से खत्म हो सकती है और बाजार में बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।
अमेरिकी चुनाव से क्रिप्टो बाजार का संबंध
तीन नवंबर को अमेरिका में मिडटर्म चुनाव होने हैं। यह राष्ट्रपति चुनाव नहीं है। इसमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान होगा। चुनाव के नतीजे तय करेंगे कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल के शेष समय में अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा।
क्रिप्टो निवेशकों की चिंता की वजह यह है कि अमेरिका में डिजिटल एसेट से जुड़े कानून और नियामकीय व्यवस्था को संसद का समर्थन प्रभावित कर सकता है। इनमें क्लैरिटी एक्ट भी शामिल है, जो क्रिप्टो बाजार के नियमन और विभिन्न नियामकीय संस्थाओं की जिम्मेदारियां तय करने से संबंधित है। यह विधेयक सीनेट में लंबित है।
यदि डेमोक्रेटिक पार्टी प्रतिनिधि सभा या सीनेट में नियंत्रण हासिल करती है, तो विधेयक की प्राथमिकताओं, उसके प्रावधानों और आगे बढ़ने की प्रक्रिया में बदलाव हो सकता है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं है कि चुनाव के बाद क्रिप्टोकरेंसी पर स्वतः प्रतिबंध लग जाएगा या मौजूदा सरकारी नीतियां तुरंत बदल जाएंगी।
26 अक्टूबर की एक रिपोर्ट में प्रेडिक्शन मार्केट के भावों के आधार पर डेमोक्रेट्स के प्रतिनिधि सभा पर नियंत्रण हासिल करने की संभावना 90 प्रतिशत से अधिक और सीनेट पर नियंत्रण की संभावना करीब 64 प्रतिशत बताई गई थी। ये बाजार आधारित अनुमान थे, चुनाव के नतीजे नहीं।
क्या बिटकॉइन में और बड़ी गिरावट आ सकती है?
चुनाव के बाद बिटकॉइन या पूरे क्रिप्टो बाजार में कितनी गिरावट आएगी, इसका कोई निश्चित अनुमान उपलब्ध नहीं है। हालांकि, कुछ विश्लेषकों ने पिछले अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद बिटकॉइन में आई गिरावट का हवाला देकर निवेशकों को संभावित जोखिमों के प्रति आगाह किया है।
ऐसे विश्लेषणों में 2010, 2014, 2018 और 2022 के मिडटर्म चुनावों के बाद बिटकॉइन में क्रमशः 72 प्रतिशत, 65 प्रतिशत, 52 प्रतिशत और 27 प्रतिशत तक की गिरावट का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इन ऐतिहासिक उतार-चढ़ाव को 2026 के लिए निश्चित संकेत नहीं माना जा सकता। हर चुनाव के समय वैश्विक अर्थव्यवस्था, ब्याज दरों, निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता और क्रिप्टो बाजार की परिस्थितियां अलग रही हैं।
एक अनुमान के मुताबिक, यदि अक्टूबर के अंत के 2.60 ट्रिलियन डॉलर के कुल क्रिप्टो मार्केट कैप में 5.7 प्रतिशत की और गिरावट आती है, तो बाजार की वैल्यू करीब 148 अरब डॉलर घट सकती है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 13.9 लाख करोड़ रुपये होगी। यह केवल संभावित गिरावट का गणितीय आकलन है, किसी तय बाजार पूर्वानुमान या निश्चित नुकसान की घोषणा नहीं।
