चंडीगढ़। लापिनोज़ पिज्जा फ्रेंचाइज़ी से जुड़े कथित रिश्वत मामले में वरिष्ठ भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी अमित कुमार सिंगल और उनकी पत्नी अनुपमा सिंगला ने विशेष अदालत में चल रही सुनवाई के दौरान रोजाना (day-to-day) ट्रायल की मांग का कड़ा विरोध किया है। दोनों पक्षों की ओर से कहा गया कि इस चरण पर मुकदमे को तेज गति से आगे बढ़ाना जल्दबाजी होगी और इससे निष्पक्ष सुनवाई के मूल सिद्धांत प्रभावित हो सकते हैं।
यह मामला पहले दर्ज उस रिश्वत ट्रैप केस से जुड़ा है, जिसमें सिंगल को उनके सहयोगी हर्ष कोटक के साथ गिरफ्तार किया गया था। आरोप है कि एक व्यवसायिक विवाद के बाद फ्रेंचाइज़ी समझौतों को लेकर तनाव बढ़ा, जो आगे चलकर कानूनी विवाद में बदल गया। यह विवाद लापिनोज़ पिज्जा आउटलेट्स से जुड़े फ्रेंचाइज़ी समझौतों और उनके संचालन से संबंधित बताया गया है।
शिकायतकर्ता सनम कपूर के अनुसार, कई समझौतों में अनियमितताएं, शर्तों का उल्लंघन और प्रभाव के कथित दुरुपयोग जैसे आरोप सामने आए। रिकॉर्ड के अनुसार, व्यवसायिक संबंधों के बिगड़ने के बाद समझौते समाप्त किए गए और वित्तीय निपटान भी किए गए थे।
जांच से जुड़े निष्कर्षों में यह दावा किया गया है कि आरोपी दंपति की ज्ञात आय के स्रोतों की तुलना में कई करोड़ रुपये की संपत्ति पाई गई, जो असंगत मानी गई। तलाशी के दौरान नकदी, सोना, और दिल्ली, मुंबई तथा पंजाब में संपत्तियों से जुड़े दस्तावेजों की बरामदगी का भी उल्लेख है, साथ ही कई बैंक खातों और वित्तीय लेनदेन की जानकारी सामने आई।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि रोजाना सुनवाई की मांग उनके अधिकारों के खिलाफ है, क्योंकि उन्हें पर्याप्त समय नहीं मिल पाएगा। उनका कहना था कि मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी तक पूरी तरह उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, जिससे बचाव की तैयारी प्रभावित हो रही है।
बचाव पक्ष ने यह भी दलील दी कि आपराधिक प्रक्रिया से जुड़े कई अनिवार्य प्रावधानों का पूर्ण पालन नहीं हुआ है, विशेषकर दस्तावेजों के संपूर्ण खुलासे को लेकर। उनका कहना था कि जब तक सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी नहीं होतीं, तब तक तेज ट्रायल शुरू करना अनुचित होगा।
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यह भी बताया गया कि दोनों आरोपी इस समय न्यायिक हिरासत में हैं, जिससे वकीलों के साथ प्रभावी संवाद और लगातार तैयारी करना सीमित हो जाता है। ऐसे में समय, सुविधा और अवसर देना निष्पक्ष सुनवाई का अहम हिस्सा है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बचाव पक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि इस मामले में विशेष तेजी की आवश्यकता क्यों है, जबकि किसी उच्च न्यायालय ने इस तरह की दिन-प्रतिदिन सुनवाई का स्पष्ट निर्देश नहीं दिया है। उन्होंने अदालत से सामान्य प्रक्रिया के अनुसार सुनवाई आगे बढ़ाने की अपील की।
रिकॉर्ड के अनुसार, जांच में सामने आए वित्तीय पहलुओं में नकदी, सोने के आभूषण और कई बैंक खातों के साथ विभिन्न शहरों में संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। वित्तीय लेनदेन और घोषित आय के बीच अंतर को लेकर भी जांच एजेंसियों ने सवाल उठाए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में अदालत को दो महत्वपूर्ण सिद्धांतों के बीच संतुलन बनाना होता है—एक ओर निष्पक्ष और पर्याप्त तैयारी का अधिकार और दूसरी ओर भ्रष्टाचार मामलों में त्वरित न्याय की आवश्यकता। अदालत का आगामी निर्णय इस मामले की दिशा तय करेगा और भविष्य में ऐसे मामलों की प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अदालत इस मामले में सुनवाई की गति को लेकर क्या रुख अपनाती है, क्योंकि यह फैसला न केवल इस केस बल्कि अन्य समान मामलों के लिए भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
