जयपुर। राजस्थान की राजधानी जयपुर में नकली सोना-चांदी के नाम पर ठगी करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो फर्जी फैक्ट्री दिखाकर लोगों को सस्ती दर पर शुद्ध चांदी देने का लालच देते थे और फिर उनसे लाखों रुपये ठग लेते थे। इस मामले में करीब ₹5 लाख की धोखाधड़ी सामने आई है, जबकि जांच में और बड़े नेटवर्क के संकेत मिल रहे हैं।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा मामला तब सामने आया जब पीड़ित हरीश कुमार मीणा ने 3 मई को थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि उसकी पहचान संजय उदयवाल के जरिए अहमदाबाद निवासी मेहबूब शेख से कराई गई थी। मेहबूब ने खुद को चांदी बनाने वाला कारीगर बताते हुए कम कीमत में शुद्ध चांदी उपलब्ध कराने का दावा किया था। आरोपी ने भरोसा जीतने के लिए पीड़ित को कई बार अपनी कथित फैक्ट्री में बुलाया, जहां नकली चांदी तैयार कर उसे असली के रूप में दिखाया गया।
जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से इस ठगी को अंजाम दिया। पहले वे पीड़ित को फैक्ट्री जैसी दिखने वाली जगह पर ले जाते थे, जहां नकली धातु को प्रोसेस करते हुए दिखाया जाता था। इसके बाद सस्ती दर पर असली चांदी देने का भरोसा दिलाकर बड़ी रकम ले ली जाती थी। पीड़ित को यह विश्वास दिलाया जाता था कि उसे बाजार से कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता की चांदी मिल रही है।
शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की और आरोपियों के ठिकाने पर दबिश दी। हालांकि, तब तक आरोपी वहां से फरार हो चुके थे। इसके बाद तकनीकी जांच और मोबाइल लोकेशन ट्रैकिंग के जरिए पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। लगातार पीछा करने के बाद दोनों आरोपियों को अहमदाबाद से हिरासत में लिया गया और जयपुर लाकर गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान मेहबूब शेख (39) और इब्राहिम छीपा के रूप में हुई है। दोनों आरोपी मूल रूप से अहमदाबाद के निवासी हैं और जयपुर में किराए के मकान में रहकर इस तरह की ठगी की वारदातों को अंजाम दे रहे थे। पुलिस ने इनके कब्जे से ₹4.50 लाख नकद, नकली सोना-चांदी बनाने के उपकरण, फर्जी सील-मोहर और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।
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पूछताछ के दौरान यह भी सामने आया है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में शामिल थे और कई लोगों को अपना शिकार बना चुके हैं। पुलिस को शक है कि यह गिरोह सिर्फ जयपुर ही नहीं, बल्कि अन्य शहरों में भी सक्रिय हो सकता है। इसी आधार पर अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है और आरोपियों के संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी मनोवैज्ञानिक रणनीति का इस्तेमाल करते हैं। वे पहले भरोसा जीतते हैं, फिर लालच देकर पीड़ित को जाल में फंसाते हैं। नकली फैक्ट्री, उपकरण और प्रोसेस दिखाकर एक वास्तविक माहौल तैयार किया जाता है, जिससे आम व्यक्ति आसानी से भ्रमित हो जाता है।
पुलिस अब आरोपियों को रिमांड पर लेकर गहन पूछताछ कर रही है, ताकि इस गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और संभावित ठगी के मामलों का खुलासा किया जा सके। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग शामिल हैं, जो अलग-अलग शहरों में इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि ठग किस तरह लोगों के लालच और भरोसे का फायदा उठाकर बड़ी धोखाधड़ी को अंजाम दे रहे हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने और किसी भी तरह के निवेश या खरीद से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी है।
फिलहाल, पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की गंभीरता से जांच की जा रही है और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की जा सकती है।
