नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और मणिपुर हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सिद्धार्थ मृदुल से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जिसमें आरोप है कि उन्होंने न्यायिक पद पर रहते हुए भी अपनी एलपीजी वितरण एजेंसी का संचालन जारी रखा। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनी भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) ने आचार संहिता और डिस्ट्रीब्यूटरशिप अनुबंध के कथित उल्लंघन का हवाला देते हुए उनकी गैस एजेंसी की डीलरशिप निलंबित कर दी है। इस कार्रवाई के बाद विवाद न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है।
मामले के अनुसार, सिद्धार्थ मृदुल ने वर्ष 1986 में दिल्ली हाई कोर्ट में अधिवक्ता के रूप में वकालत शुरू की थी। मार्च 2008 में उन्हें दिल्ली हाई कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया और अक्टूबर 2023 में वे मणिपुर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बने। सेवानिवृत्ति तक उन्होंने संवैधानिक न्यायपालिका में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, भारत पेट्रोलियम द्वारा वर्ष 1984 में प्रदान की गई एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप उनके नाम पर बनी रही। “किचन फ्लेम” नाम से संचालित इस डिस्ट्रीब्यूटरशिप का अनुबंध समय-समय पर नवीनीकृत भी किया गया। रिकॉर्ड के मुताबिक, डिस्ट्रीब्यूटरशिप समझौते का नवीनीकरण 1995, 2005, 2010, 2015, मई 2025 और सितंबर 2025 में किया गया। अंतिम नवीनीकरण की वैधता अगस्त 2030 तक बताई गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतिम डिस्ट्रीब्यूटरशिप समझौते में सिद्धार्थ मृदुल के हस्ताक्षर और उनका फोटो भी मौजूद है। इसी आधार पर यह प्रश्न उठाया गया कि क्या न्यायिक पद पर रहते हुए किसी व्यावसायिक गतिविधि से जुड़े रहना न्यायिक आचरण के अनुरूप था। न्यायपालिका में हितों के टकराव से बचने के लिए न्यायाधीशों से अपेक्षा की जाती है कि वे ऐसे आर्थिक या व्यावसायिक संबंधों से दूर रहें, जो उनकी निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े कर सकते हों।
बताया गया है कि दिसंबर 2025 में इस संबंध में एक सार्वजनिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलने के बाद बीपीसीएल ने 29 मई 2026 को सिद्धार्थ मृदुल को कारण बताओ नोटिस जारी किया। कंपनी ने नोटिस में कहा कि न्यायिक पद पर रहते हुए गैस एजेंसी का संचालन डिस्ट्रीब्यूटरशिप अनुबंध की शर्तों और आचार संहिता के अनुरूप नहीं माना जा सकता। नोटिस में उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया कि उनकी डिस्ट्रीब्यूटरशिप क्यों न निलंबित की जाए।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
रिपोर्ट के अनुसार, बीपीसीएल को निर्धारित समय के भीतर कोई संतोषजनक जवाब प्राप्त नहीं हुआ। इसके बाद कंपनी ने 6 जुलाई 2026 को “किचन फ्लेम” की एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया। कंपनी की इस कार्रवाई के बाद मामला न्यायालय पहुंच गया।
डीलरशिप से जुड़े प्रबंधन का कार्य संभालने वाले दीपक यादव की पत्नी मोनिका यादव ने इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर एजेंसी की प्रोप्राइटरशिप अपने नाम स्थानांतरित करने के आवेदन पर निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की थी। अदालत ने बीपीसीएल को निर्धारित समय के भीतर आवेदन पर फैसला करने के निर्देश दिए थे।
हालांकि, डीलरशिप निलंबित होने के बाद मोनिका यादव ने दोबारा दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बीपीसीएल ने जानबूझकर प्रोप्राइटरशिप परिवर्तन संबंधी आवेदन पर निर्णय नहीं लिया और साथ ही एलपीजी की आपूर्ति भी रोक दी। याचिका में कंपनी की कार्रवाई को चुनौती देते हुए उचित राहत देने की मांग की गई है।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब न्यायपालिका में जवाबदेही और न्यायिक आचरण को लेकर सार्वजनिक चर्चा तेज है। फिलहाल डीलरशिप निलंबन, अनुबंध की वैधता, हितों के टकराव और संबंधित पक्षों के अधिकारों से जुड़े सभी पहलुओं पर न्यायिक प्रक्रिया जारी है। मामले में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय और सक्षम प्राधिकरण द्वारा उपलब्ध कराए गए तथ्यों, दस्तावेजों और पक्षकारों के तर्कों के आधार पर लिया जाएगा।
