नई दिल्ली: म्यांमार के तट के पास दो नावों के लापता होने या डूबने की आशंका के बीच संयुक्त राष्ट्र ने बड़े मानवीय संकट की चेतावनी दी है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) के अनुसार, इन नावों में सवार 500 से अधिक रोहिंग्या शरणार्थियों के मारे जाने की आशंका है। हालांकि, स्थानीय प्रशासन ने अभी तक मृतकों की संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि यदि यह आशंका सही साबित होती है, तो यह हाल के वर्षों में रोहिंग्या शरणार्थियों से जुड़ी सबसे भीषण समुद्री त्रासदियों में से एक होगी।
UNHCR और IOM के संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों नावें जून 2026 के अंतिम सप्ताह में म्यांमार के रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। इनमें अधिकांश यात्री रोहिंग्या शरणार्थी थे, जबकि कुछ लोग बांग्लादेश के कॉक्स बाजार स्थित शरणार्थी शिविरों से भी सवार हुए थे। सभी यात्री सुरक्षित जीवन, रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में समुद्र के रास्ते मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों की ओर जा रहे थे।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पहली नाव में लगभग 250 लोग सवार थे। समुद्र में रवाना होने के कुछ समय बाद ही उससे संपर्क पूरी तरह टूट गया और तब से उसका कोई पता नहीं चल पाया है। दूसरी नाव में लगभग 280 यात्री सवार बताए गए हैं। आशंका है कि यह नाव 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के निकट खराब मौसम के दौरान डूब गई। दोनों नावों में सवार अधिकांश लोगों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है, जिससे बड़े पैमाने पर जनहानि की आशंका व्यक्त की जा रही है।
संयुक्त राष्ट्र एजेंसियों ने कहा कि घटना की जांच अभी जारी है और नावों के लापता होने की परिस्थितियों का सत्यापन किया जा रहा है। एजेंसियों ने उपलब्ध प्रारंभिक जानकारी को बेहद चिंताजनक बताते हुए सरकारों और मानवीय संगठनों से खोज एवं बचाव अभियान तेज करने की अपील की है। साथ ही शरणार्थियों के लिए सुरक्षित और वैध प्रवासन के विकल्प बढ़ाने तथा उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।
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समुद्री विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों नावें ऐसे समय रवाना हुईं जब बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में समुद्री यात्रा के लिए मौसम अनुकूल नहीं माना जाता। इस दौरान तेज हवाएं, ऊंची लहरें और खराब मौसम छोटी लकड़ी की नावों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं। मानव तस्करी नेटवर्क द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ऐसी नावें अक्सर क्षमता से अधिक यात्रियों को लेकर चलती हैं और उनमें पर्याप्त सुरक्षा सुविधाएं भी नहीं होतीं।
रोहिंग्या समुदाय लंबे समय से म्यांमार में हिंसा, भेदभाव और विस्थापन का सामना कर रहा है। बड़ी संख्या में लोग बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जहां सीमित संसाधनों, रोजगार की कमी और कठिन जीवन परिस्थितियों के कारण कई परिवार जोखिम उठाकर समुद्र के रास्ते दूसरे देशों की ओर पलायन करते हैं।
संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर में लगभग 300 लोगों के लापता होने या मौत की आशंका जताई जा चुकी है। इनमें रोहिंग्या शरणार्थियों के अलावा बांग्लादेश के नागरिक भी शामिल हैं। मानवीय संगठनों का कहना है कि इस तरह की लगातार हो रही घटनाएं अनियमित प्रवासन और मानव तस्करी के बढ़ते खतरे को उजागर करती हैं।
राहत एजेंसियों का कहना है कि यदि 500 से अधिक लोगों की मौत की आशंका सही साबित होती है, तो यह केवल एक समुद्री दुर्घटना नहीं बल्कि रोहिंग्या समुदाय से जुड़े गंभीर मानवीय संकट का प्रतीक होगी। फिलहाल खोज एवं बचाव अभियान जारी है और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लापता लोगों का पता लगाने, घटना की पुष्टि करने तथा प्रभावित परिवारों को आवश्यक मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के प्रयासों में जुटी हैं।
