कानपुर: डिफेंस उत्पादों की आपूर्ति करने वाली एक कंपनी के कारोबार में कथित GST अनियमितताओं की जांच के दौरान SGST विभाग को बड़ी मात्रा में नकदी मिली है। कानपुर की विशेष अनुसंधान इकाई ने बुधवार को सूटरगंज स्थित कंपनी के मुख्यालय और उन्नाव स्थित फैक्ट्री पर एक साथ छापेमारी की। करीब 36 घंटे तक चली कार्रवाई गुरुवार देर शाम समाप्त हुई। इस दौरान कंपनी के मुख्यालय से ₹2.69 करोड़ नकद बरामद किए गए। कारोबारी इस रकम के स्रोत और उसे कार्यालय में रखने के संबंध में अधिकारियों को संतोषजनक जवाब और जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा सका।
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित कंपनी Government e-Marketplace (GeM) पोर्टल के माध्यम से डिफेंस से जुड़े उत्पादों की आपूर्ति करती है। विभाग को कंपनी के कारोबार, खरीद-बिक्री और कर संबंधी दस्तावेजों में संभावित अनियमितताओं की सूचना मिली थी। इसके बाद विशेष अनुसंधान इकाई की टीमों ने कंपनी के मुख्यालय और फैक्ट्री में रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
मुख्यालय में मिली ₹2.69 करोड़ की नकदी
छापेमारी के दौरान सूटरगंज स्थित कंपनी के कार्यालय में बड़ी मात्रा में नकदी देखकर अधिकारियों ने उसके संबंध में विस्तृत जानकारी मांगी। बरामद ₹2.69 करोड़ के संबंध में कारोबारी से आय के स्रोत, नकदी रखने का उद्देश्य और उससे जुड़े लेखा दस्तावेज मांगे गए। विभाग के अनुसार, कारोबारी रकम का संतोषजनक हिसाब नहीं दे सका।
नकदी से संबंधित दस्तावेज आयकर विभाग के अधिकारियों के समक्ष भी प्रस्तुत नहीं किए जा सके। इसके बाद SGST और आयकर विभाग के अधिकारियों ने बरामद रकम को बैंक में जमा कराया। विभागीय प्रक्रिया के तहत रकम को सुरक्षित रखा गया है। अब जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि इतनी बड़ी नकदी कंपनी के कारोबार से संबंधित थी या उसका कोई अन्य स्रोत था।
GeM सप्लाई के रिकॉर्ड खंगाले
जांच का एक प्रमुख हिस्सा कंपनी के GeM कारोबार से जुड़ा है। अधिकारी यह पता लगा रहे हैं कि कंपनी ने सरकारी पोर्टल के माध्यम से किन उत्पादों की आपूर्ति की, किस मूल्य पर सौदे हुए और उनके लिए किस तरह के बिल और कर दस्तावेज तैयार किए गए।
टीम ने कंपनी के GST रिटर्न, खरीद-बिक्री के बिल, बैंक खातों, स्टॉक रजिस्टर, इनवॉइस और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को जांच के दायरे में लिया है। अधिकारियों के सामने यह भी महत्वपूर्ण सवाल है कि कंपनी के घोषित कारोबार और कार्यालय से मिली नकदी के बीच कोई सीधा वित्तीय संबंध है या नहीं।
उन्नाव फैक्ट्री में स्टॉक का हिसाब नहीं मिला
कंपनी के उन्नाव स्थित कारखाने में भी जांच के दौरान स्टॉक का भौतिक सत्यापन किया गया। अधिकारियों के अनुसार, मौके पर मौजूद स्टॉक और दस्तावेजों में दर्ज स्टॉक के बीच अंतर मिला। कुछ प्रपत्रों में भी गड़बड़ियां पाई गईं।
स्टॉक और दस्तावेजों में सामने आई इन विसंगतियों के आधार पर व्यापारी से करीब ₹53 लाख की धनराशि जमा कराई गई। विभाग अब इस रकम से संबंधित कर देनदारी और दस्तावेजों का मिलान कर रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि स्टॉक की खरीद, बिक्री और आपूर्ति का रिकॉर्ड GST रिटर्न में दर्ज जानकारी से मेल खाता है या नहीं।
अन्य फर्मों के लेनदेन की भी होगी जांच
SGST अधिकारियों को जांच के दौरान कंपनी के कारोबार से जुड़ी अन्य फर्मों और व्यापारिक लेनदेन की जानकारी भी मिली है। इसके बाद विभाग ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए संबंधित फर्मों के दस्तावेजों की भी पड़ताल शुरू कर दी है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कंपनी के साथ लेनदेन करने वाली फर्मों में कहीं फर्जी बिलिंग, कर चोरी, गलत ITC दावे या कागजी लेनदेन जैसी अनियमितता तो नहीं हुई।
कार्रवाई के दौरान विभाग की तीन टीमों ने कंपनी के मुख्यालय और फैक्ट्री में दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच की। यह पूरी कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशन में की गई, जिसमें SGST के साथ आयकर विभाग के अधिकारी भी शामिल रहे।
फिलहाल ₹2.69 करोड़ की नकदी, उन्नाव फैक्ट्री में सामने आए करीब ₹53 लाख के स्टॉक संबंधी अंतर और अन्य कारोबारी दस्तावेजों की जांच जारी है। विभाग यह भी पता लगा रहा है कि कंपनी की वास्तविक कर देनदारी कितनी है और क्या किसी अन्य फर्म या कारोबारी को कथित अनियमितताओं का लाभ मिला। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
