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Home»Policy Watch»घुसपैठ पर ‘डिटेक्ट-डिपोर्ट’ एक्शन, AI से होगी खुफिया सूचनाओं की पड़ताल; अमित शाह ने पुलिस प्रमुखों को दिए निर्देश
Policy Watch

घुसपैठ पर ‘डिटेक्ट-डिपोर्ट’ एक्शन, AI से होगी खुफिया सूचनाओं की पड़ताल; अमित शाह ने पुलिस प्रमुखों को दिए निर्देश

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksAugust 25, 2026No Comments5 Mins Read
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राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन तेज करने पर जोर; आतंकवाद, कट्टरपंथ, साइबर अपराध और प्रॉक्सी वॉरफेयर से निपटने के लिए SOP तैयार करने की अपील
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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को देश के पुलिस प्रमुखों और सुरक्षा एजेंसियों को घुसपैठ के खिलाफ सख्त कदम उठाने तथा अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों की पहचान और उनसे निपटने के लिए उपलब्ध खुफिया सूचनाओं के विश्लेषण में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को बढ़ाने पर भी जोर दिया। शाह नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन-2026 (NSSC) के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।

गृह मंत्री ने कहा कि मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सूचनाओं का AI आधारित विश्लेषण किया जाना चाहिए। इसका उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों से जुड़े पैटर्न की पहचान करना और उनके जवाब के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) तैयार करना है। इस प्रक्रिया से सुरक्षा एजेंसियों के बीच खुफिया सूचनाओं के बेहतर इस्तेमाल और त्वरित कार्रवाई में मदद मिलने की उम्मीद है।

850 से अधिक अधिकारी और विशेषज्ञ सम्मेलन में शामिल

हाइब्रिड प्रारूप में आयोजित राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में देशभर से 850 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन, इंटेलिजेंस ब्यूरो के निदेशक महेश दीक्षित और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के प्रमुख दिल्ली में सम्मेलन में मौजूद रहे।

राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक, जमीनी स्तर पर काम कर रहे युवा पुलिस अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सम्मेलन से जुड़े। सम्मेलन का उद्देश्य जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे अधिकारियों के अनुभवों को वरिष्ठ अधिकारियों और विशेषज्ञों के साथ साझा कर राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौतियों के व्यावहारिक समाधान तलाशना है।

अवैध प्रवासन और खुफिया समन्वय पर फोकस

सम्मेलन के पहले दिन अवैध प्रवासियों की पहचान और निर्वासन प्रमुख मुद्दों में शामिल रहे। शाह ने पुलिस प्रमुखों और सुरक्षा एजेंसियों से ऐसे लोगों की पहचान के लिए तंत्र मजबूत करने को कहा, जो वैध दस्तावेजों के बिना भारत में रह रहे हैं। उन्होंने कानून के तहत निर्वासन की प्रक्रिया को प्रभावी और तेज बनाने पर भी जोर दिया।

MAC के जरिए मिलने वाली खुफिया जानकारी के इस्तेमाल को लेकर भी व्यापक चर्चा हुई। शाह ने केवल सूचना एकत्र करने के बजाय उसके एकीकरण, विश्लेषण और ऑपरेशनल इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया। AI आधारित सिस्टम के जरिए बड़ी मात्रा में उपलब्ध सूचनाओं का विश्लेषण कर संभावित सुरक्षा खतरों के संकेत पहले से पहचानने पर विशेष ध्यान दिया गया।

गृह मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन में आतंकवाद से निपटने, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध, कट्टरपंथ और पाकिस्तान से जुड़े कथित प्रॉक्सी वॉरफेयर जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।

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आतंकवाद और कट्टरपंथ से निपटने की रणनीति

अमित शाह ने आतंकवाद और कट्टरपंथ के खिलाफ कार्रवाई को प्रभावी बनाने के लिए गृह मंत्रालय की PRAHAAR योजना के क्रियान्वयन से जुड़े प्रशिक्षण को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को आतंकवाद से जुड़े मामलों में जांच और कार्रवाई के दौरान व्यापक तथा समन्वित दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता बताई।

फरार आरोपियों के मामलों में मुकदमों को तेज करने पर भी चर्चा हुई। शाह ने फरार आरोपियों को भारत वापस लाने के प्रयासों के साथ-साथ कानून में उपलब्ध अनुपस्थिति में मुकदमा चलाने के प्रावधानों के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज मामलों की जांच में भी व्यापक और एकीकृत दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।

साइबर अपराध और प्रॉक्सी वॉरफेयर भी एजेंडे में

राष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में साइबर अपराध से निपटने के लिए नीति ढांचा तैयार करने और तेजी से बदलते डिजिटल खतरों के खिलाफ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर भी विचार-विमर्श हुआ। इसके साथ ही प्रॉक्सी वॉरफेयर से उत्पन्न चुनौतियों और उससे निपटने के लिए एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत पर चर्चा की गई।

शाह का AI आधारित खुफिया विश्लेषण पर जोर ऐसे समय में आया है, जब सुरक्षा एजेंसियों के सामने डिजिटल प्लेटफॉर्म, साइबर नेटवर्क और बड़ी मात्रा में उपलब्ध डेटा से जुड़े नए खतरे लगातार बढ़ रहे हैं। AI के इस्तेमाल से अलग-अलग स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं को एक साथ जोड़कर संदिग्ध गतिविधियों और संभावित खतरों के पैटर्न की पहचान करने की क्षमता बढ़ सकती है।

दूसरे दिन उभरते सुरक्षा खतरों पर मंथन

सम्मेलन के दूसरे दिन सब-एरियल सिस्टम से उत्पन्न खतरों और उनसे निपटने के उपायों पर चर्चा होगी। इसके अलावा ब्लू इकोनॉमी और उससे जुड़े महत्वपूर्ण समुद्री हितों की सुरक्षा भी एजेंडे में शामिल है।

राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन का आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के तहत 2021 से हर वर्ष हाइब्रिड प्रारूप में किया जा रहा है। इसका मकसद जमीनी स्तर पर काम कर रहे अधिकारियों के अनुभवों और विशेषज्ञों की तकनीकी जानकारी को एक मंच पर लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए प्रभावी रणनीतियां तैयार करना है।

अवैध प्रवासन, आतंकवाद, कट्टरपंथ, साइबर अपराध और नई तकनीक से जुड़े सुरक्षा खतरों पर सम्मेलन में हुई चर्चा के बीच AI आधारित खुफिया विश्लेषण और SOPs को आने वाले समय में सुरक्षा एजेंसियों की रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा सकता है।

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