लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नकली और काउंटरफिट दवाओं के कारोबार से जुड़े एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने अमीनाबाद में जांच के दौरान ऐसे कारोबार का पता लगाया है, जिसमें बिना वास्तविक दवा की आपूर्ति किए फर्जी बिलिंग, क्रॉस-बिलिंग और कागजी लेनदेन के जरिए करोड़ों रुपये की दवाओं की खरीद-बिक्री दिखाई गई। मामले में चार लोगों के खिलाफ अमीनाबाद थाने में FIR दर्ज कराई गई है। जांच एजेंसी अब नेटवर्क के अंतरराज्यीय कनेक्शन और नकली दवाओं के स्रोत की पड़ताल कर रही है।
बिना माल की आवाजाही के दिखाया ₹8.87 करोड़ का कारोबार
FSDA की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने मधुमेह, बैक्टीरियल संक्रमण और एनीमिया जैसी बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली करीब ₹8.87 करोड़ की दवाओं की बिक्री कथित तौर पर केवल कागजों पर दिखाई। जांच में वास्तविक स्टॉक और दस्तावेजों के बीच अंतर मिलने के बाद फर्जी बिलिंग और कागजी कारोबार की आशंका गहरी हुई।
विभाग अब यह पता लगा रहा है कि इन बिलों के आधार पर किन-किन फर्मों ने खरीद और बिक्री दिखाई और इसके जरिए दवाओं के कारोबार को वैध दिखाने की कोशिश कैसे की गई। बैंक लेनदेन, बिल, स्टॉक रजिस्टर और अन्य कारोबारी रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है।
जोरिल-एम की ₹39.20 लाख की दवाओं का हिसाब नहीं
जांच में मधुमेह के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जोरिल-एम दवा का भी मामला सामने आया है। विभाग के अनुसार, करीब ₹39.20 लाख की इन दवाओं का भौतिक हिसाब नहीं मिला। रिकॉर्ड में दवाओं की खरीद-बिक्री दर्ज होने के बावजूद वास्तविक स्टॉक या आपूर्ति से उसका मिलान नहीं हो सका।
FSDA अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन दवाओं की वास्तविक आपूर्ति कहां हुई, स्टॉक से उनका मिलान क्यों नहीं हुआ और दस्तावेजों में दर्ज कारोबार के पीछे वास्तविक लेनदेन था या केवल कागजी प्रविष्टियां तैयार की गई थीं।
चार लोगों के खिलाफ FIR
सहायक आयुक्त बृजेश कुमार के अनुसार, अमीनाबाद में दर्ज मुकदमे में मेसर्स हेल्थ प्लस के प्रोपराइटर अंकुर अवस्थी, मेसर्स एमके फार्मा के संचालक मनीष बाजपेयी, मेसर्स राम फार्मा के संचालक गोविंद शुक्ला और सहारनपुर स्थित पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस के संचालक एजाज अहमद को आरोपी बनाया गया है।
जांच में सहारनपुर की पेशेंट केयर सर्जिकल हाउस फर्म की भूमिका भी सामने आई है। आरोप है कि करीब दो वर्षों से बंद रहने के बावजूद इस फर्म का इस्तेमाल कथित तौर पर फर्जी खरीद और कागजी रोटेशन के लिए किया गया। विभाग अब फर्म के दस्तावेज, लाइसेंस, बैंक खातों और उसके नाम पर हुए लेनदेन की जांच कर रहा है।
राजस्थान से देहरादून तक जांच का विस्तार
मामले की जांच अब उत्तर प्रदेश से बाहर तक पहुंच गई है। जुलाई में अमीनाबाद से बरामद नकली दवाओं के स्रोत की पड़ताल के दौरान राजस्थान कनेक्शन सामने आया है। इस मामले में भूपेंद्र शर्मा और ट्रांसपोर्टर सतेंद्र गुज्जर के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज की गई है।
इसके अलावा देहरादून में नकली दवाएं तैयार करने वाली एक निर्माण इकाई के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि अमीनाबाद में मिली दवाओं का उत्पादन कहां हुआ, उन्हें किन माध्यमों से उत्तर प्रदेश तक पहुंचाया गया और इस नेटवर्क में स्थानीय थोक विक्रेताओं, एजेंटों तथा परिवहनकर्ताओं की क्या भूमिका रही।
लाइसेंस निरस्त करने के साथ होगी कड़ी कार्रवाई
आयुक्त खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन डॉ. रोशन जैकब ने सभी जिलों के औषधि निरीक्षकों को अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े कारोबारियों, स्थानीय थोक फर्मों और एजेंटों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं। विभाग अब संदिग्ध दवा कारोबारियों के रिकॉर्ड और स्टॉक का मिलान करने पर जोर दे रहा है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच में जिन कारोबारियों की भूमिका सामने आएगी, उनके लाइसेंस निरस्त करने के साथ आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। विभाग यह भी जांच रहा है कि फर्जी बिलिंग के जरिए केवल कागजी कारोबार दिखाया गया या इसी नेटवर्क का इस्तेमाल नकली और काउंटरफिट दवाओं को वास्तविक दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में खपाने के लिए किया गया। जांच आगे बढ़ने के साथ नेटवर्क से जुड़े अन्य कारोबारी और फर्में भी कार्रवाई के दायरे में आ सकती हैं।
