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Home»क्राइम»नोएडा के फ्लैट से ₹2 करोड़ की कैंसररोधी दवाएं बरामद, बिहार की सरकारी सप्लाई से जुड़ा कनेक्शन जांच के घेरे में
क्राइम

नोएडा के फ्लैट से ₹2 करोड़ की कैंसररोधी दवाएं बरामद, बिहार की सरकारी सप्लाई से जुड़ा कनेक्शन जांच के घेरे में

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksJuly 22, 2026No Comments4 Mins Read
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आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी में संयुक्त छापेमारी के दौरान बड़ी खेप जब्त; एक आरोपी गिरफ्तार, कई राज्यों में फैले अवैध दवा नेटवर्क और सरकारी वितरण प्रणाली में संभावित हेराफेरी की जांच तेज
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नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में महंगी और आयातित कैंसररोधी दवाओं की कथित अवैध तस्करी से जुड़े एक बड़े मामले का खुलासा हुआ है। सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी के एक फ्लैट से करीब ₹2 करोड़ मूल्य की कैंसर समेत अन्य जीवनरक्षक दवाएं बरामद की गई हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि जब्त दवाओं में से कुछ बिहार में सरकारी आपूर्ति के लिए निर्धारित थीं, जिससे सरकारी दवा वितरण प्रणाली में संभावित हेराफेरी और संगठित अवैध नेटवर्क की आशंका गहरा गई है। मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।

अधिकारियों के अनुसार, कार्रवाई सोमवार रात सेक्टर-76 स्थित आम्रपाली प्रिंसली सोसायटी के फ्लैट नंबर-402 में की गई। यह संयुक्त छापेमारी दिल्ली क्राइम ब्रांच, केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और जिला औषधि विभाग की टीम ने खुफिया सूचना के आधार पर की। तलाशी के दौरान फ्लैट से बड़ी मात्रा में महंगी और आयातित कैंसररोधी दवाएं तथा अन्य विशेष श्रेणी की दवाएं बरामद हुईं, जिनकी अनुमानित बाजार कीमत लगभग ₹2 करोड़ बताई जा रही है।

छापेमारी के दौरान मौके से आनंद कुमार नामक युवक को गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि दवाओं की खरीद, भंडारण और आपूर्ति का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित किया जा रहा था। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस अवैध कारोबार में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।

प्रारंभिक जांच में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया है कि बरामद दवाओं में कुछ ऐसी दवाएं भी शामिल हैं, जिन पर बिहार में सरकारी आपूर्ति से जुड़े संकेत मिले हैं। इससे आशंका व्यक्त की जा रही है कि सरकारी अस्पतालों या सार्वजनिक स्वास्थ्य योजनाओं के लिए निर्धारित दवाओं को अवैध रूप से बाजार में मोड़ा गया हो सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही सामने आएगा।

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जिला औषधि विभाग के अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई दिल्ली में दवा तस्करी से जुड़े एक मामले की जांच के दौरान प्राप्त सूचना के आधार पर की गई। जांच एजेंसियों को इनपुट मिला था कि नोएडा स्थित एक फ्लैट में बड़ी मात्रा में महंगी दवाओं का अवैध भंडारण किया गया है। सूचना की पुष्टि के बाद संयुक्त टीम ने छापा मारकर पूरे स्टॉक को अपने कब्जे में ले लिया।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ये दवाएं किन स्रोतों से प्राप्त की गई थीं, उनका वास्तविक स्वामित्व किसके पास था और उन्हें किन राज्यों में भेजा जाना था। इसके अलावा दवाओं की खरीद-बिक्री से जुड़े बिल, स्टॉक रिकॉर्ड, परिवहन दस्तावेज, मोबाइल फोन, डिजिटल रिकॉर्ड और बैंक लेनदेन की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में उपयोग होने वाली दवाएं अत्यधिक महंगी होती हैं और इनकी मांग लगातार बनी रहती है। ऐसे में यदि सरकारी आपूर्ति श्रृंखला से दवाओं की अवैध निकासी या डायवर्जन होता है तो इससे न केवल सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को नुकसान पहुंचता है, बल्कि वास्तविक मरीजों के इलाज पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। यही कारण है कि जीवनरक्षक दवाओं की अवैध खरीद-बिक्री और तस्करी के मामलों को अत्यंत गंभीर आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य अपराध माना जाता है।

अधिकारियों ने बताया कि बरामद दवाओं के बैच नंबर, निर्माण विवरण, आपूर्ति रिकॉर्ड और वितरण श्रृंखला का मिलान संबंधित कंपनियों तथा सरकारी अभिलेखों से कराया जाएगा। यदि जांच में यह पुष्टि होती है कि सरकारी आपूर्ति की दवाओं को अवैध रूप से निजी बाजार में पहुंचाया गया, तो मामले में दवा नियंत्रण कानूनों के साथ-साथ अन्य प्रासंगिक आपराधिक धाराओं के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल जांच जारी है और एजेंसियां इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान कर उनकी भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

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