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Home»क्राइम»साइबर जिहाद की खतरनाक साजिश बेनकाब: यूपी एटीएस ने कोयंबटूर से दबोचा 19 साल का कोडर मकसूद, पाकिस्तानी हैकरों से जुड़ा था नेटवर्क
क्राइम

साइबर जिहाद की खतरनाक साजिश बेनकाब: यूपी एटीएस ने कोयंबटूर से दबोचा 19 साल का कोडर मकसूद, पाकिस्तानी हैकरों से जुड़ा था नेटवर्क

Team Bharat SpeaksBy Team Bharat SpeaksSeptember 17, 2026No Comments4 Mins Read
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अल कायदा से जुड़ी कट्टरपंथी विचारधारा वाले मॉड्यूल की जांच में सामने आया नाम; सुरक्षित ऐप बनाकर संदिग्ध संपर्कों के लिए इस्तेमाल का आरोप, मोबाइल-कंप्यूटर समेत डिजिटल उपकरण फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए
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लखनऊ। अल कायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़े कथित आतंकी मॉड्यूल की जांच में उत्तर प्रदेश आतंकवाद निरोधक दस्ते (यूपी एटीएस) ने कोयंबटूर से करीब 19 वर्षीय युवक को गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु एटीएस की मदद से की गई कार्रवाई में पकड़ा गया आरोपी सिद्धार्थनगर के बांसी क्षेत्र का रहने वाला बताया गया है। उसे ट्रांजिट रिमांड पर लखनऊ लाकर अदालत में पेश किया गया। जांच एजेंसियां उसके कथित विदेशी संपर्कों, ऑनलाइन गतिविधियों और डिजिटल नेटवर्क की पड़ताल कर रही हैं।
इस मामले में एटीएस ने 12 सितंबर को आजमगढ़ के दीदारगंज क्षेत्र से एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद जांचकर्ताओं को कोयंबटूर में मौजूद युवक के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद उसकी गतिविधियों और लोकेशन की निगरानी की गई। लोकेशन की पुष्टि होने के बाद तमिलनाडु एटीएस के सहयोग से कार्रवाई कर उसे गिरफ्तार किया गया।
जांच के मुताबिक आरोपी ने कथित तौर पर ‘CAPTAIN M NETWORK’ नाम से एक सुरक्षित ऐप तैयार किया था। एजेंसी को संदेह है कि इस ऐप का इस्तेमाल सामान्य संचार माध्यमों से अलग तरीके से संपर्क बनाए रखने के लिए किया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में उसके पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में होने के संकेत मिलने की बात सामने आई है। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि ऐप को किसने इस्तेमाल किया, इसमें कितने लोग जुड़े थे और इसके जरिए किस तरह की सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाता था।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी ने इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री के जरिए प्रोग्रामिंग और साइबर तकनीक सीखी थी। बताया गया है कि उसने यूट्यूब, इंस्टाग्राम, टेलीग्राम और व्हाट्सएप जैसे मंचों से पायथन, जावा, कोडिंग और हैकिंग से संबंधित जानकारी हासिल की। एजेंसी के अनुसार, बाद में उसने इस तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कथित तौर पर संदिग्ध ऑनलाइन नेटवर्क से संपर्क और संचार के लिए किया।
कार्रवाई के दौरान उसके पास से मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं। इन उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। जांचकर्ता इनमें मौजूद चैट, संपर्क नंबर, डिजिटल फाइलों, ऑनलाइन खातों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल कर रहे हैं। खासतौर पर विदेशी नंबरों और संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों को खंगाला जा रहा है, ताकि नेटवर्क के विस्तार और उसमें शामिल अन्य लोगों की पहचान की जा सके।

Proposal for Conducting Cyber Crisis Drill, Tabletop Exercise (TTEx) & CCMP Readiness Exercise

जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपी दो व्हाट्सएप खातों के जरिए कई ऑनलाइन समूहों से जुड़ा हुआ था। इनमें ‘यू यू एंट्री गेट’, ‘यूनाइटेड उम्माह’, ‘गजवा-ए-हिंद’, ‘टीम ब्लैक हैट’ और ‘लश्कर-ए-मेहंदी’ जैसे समूहों के नाम सामने आए हैं। इन समूहों में अलग-अलग राज्यों के युवाओं के साथ पाकिस्तानी नंबरों की मौजूदगी की भी जांच की जा रही है।
एजेंसी का आरोप है कि इन ऑनलाइन समूहों में भारत विरोधी वीडियो और कट्टरपंथी सामग्री साझा की जाती थी। आरोपी पर ऐसी सामग्री को आगे प्रसारित करने और युवाओं को कट्टरपंथी ऑनलाइन समूहों से जोड़ने की कोशिश में शामिल होने का आरोप है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि समूहों में जुड़े युवाओं में से कितने लोग सक्रिय रूप से बातचीत और सामग्री साझा करने में शामिल थे।
जांचकर्ताओं के मुताबिक, पूरे नेटवर्क पर कुख्यात कट्टरपंथी प्रचारक अनवर अल-अवलाकी की विचारधारा के प्रभाव के संकेत मिले हैं। एजेंसी अब डिजिटल उपकरणों से मिले साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। साथ ही यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ऑनलाइन कट्टरपंथी सामग्री के प्रसार और कथित साइबर गतिविधियों में देश के अलग-अलग हिस्सों से कितने लोग जुड़े थे।
एटीएस की जांच का अगला फोकस कथित विदेशी संपर्क, सुरक्षित ऐप का नेटवर्क, ऑनलाइन समूहों की गतिविधियां और जब्त डिजिटल उपकरणों से मिलने वाले साक्ष्य हैं। एजेंसी संभावित सहयोगियों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की भी जांच कर रही है।
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