कानपुर। जुलाई 2020 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए विकास दुबे की मौत का रिकॉर्ड करीब छह साल बाद सरकारी दस्तावेजों में भी पूरा हो गया है। कानपुर नगर निगम के जोन-चार कार्यालय ने 11 सितंबर को उसका आधिकारिक मृत्यु प्रमाण पत्र जारी किया। मुठभेड़ के करीब 2,256 दिन बाद जारी हुए इस प्रमाण पत्र की प्रति न्यायालय के रिकॉर्ड में दर्ज बिकरू स्थित पते पर रजिस्टर्ड डाक से भेजी गई। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद वर्षों से लंबित सरकारी रिकॉर्ड को औपचारिक रूप से दुरुस्त कर दिया गया है।
मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने में देरी की मुख्य वजह वर्ष 2020 में तैयार किए गए दस्तावेजों में पिता के नाम की विसंगति बताई गई है। मुठभेड़ के बाद तैयार पंचनामा और दाह संस्कार से संबंधित कागजात में पिता का नाम एक जगह अलग दर्ज हो गया था। इसके कारण स्वास्थ्य विभाग और नगर निगम के रिकॉर्ड में मृतक की पहचान से जुड़े दस्तावेजों का मिलान नहीं हो पा रहा था। दस्तावेजों में इस अंतर के चलते मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया वर्षों तक आगे नहीं बढ़ सकी।
मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं होने के कारण परिवार को कई कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में दिक्कत होने का दावा किया गया। परिवार की ओर से बताया गया कि मृतक के नाम से जुड़ी बीमा पॉलिसियों के दावों का निपटारा नहीं हो पा रहा था। इसके अलावा उसके नाम दर्ज चल और अचल संपत्तियों को कानूनी उत्तराधिकारियों के नाम स्थानांतरित कराने तथा दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में भी समस्या आ रही थी।
कई वर्षों तक नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर मामला लंबित रहने के बाद परिवार की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई। याचिका में मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की गई। सुनवाई के दौरान अदालत ने स्वास्थ्य विभाग से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी। इसके बाद कानपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के स्तर से पुराने रिकॉर्ड की जांच और सत्यापन की प्रक्रिया शुरू की गई।
जांच के दौरान पोस्टमॉर्टम रिकॉर्ड, पंचनामा और दाह संस्कार से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया गया। पहचान संबंधी दस्तावेजों में दर्ज पिता के नाम की विसंगति को रिकॉर्ड के आधार पर दुरुस्त किया गया। स्वास्थ्य विभाग की जांच और आवश्यक संशोधन के बाद नगर निगम को मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने का आधार मिला। इसके बाद जोन-चार कार्यालय ने 11 सितंबर को प्रमाण पत्र जारी कर दिया।
विकास दुबे की मौत 10 जुलाई 2020 को हुई थी। उसे मध्य प्रदेश के उज्जैन से कानपुर लाया जा रहा था। पुलिस के अनुसार, कानपुर पहुंचने से पहले वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। पुलिस का दावा था कि दुर्घटना के बाद उसने भागने की कोशिश की, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई। इस मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर बाद में न्यायिक और जांच संबंधी प्रक्रियाएं भी चली थीं।
इससे कुछ दिन पहले 2 जुलाई 2020 की रात कानपुर के बिकरू गांव में पुलिस टीम पर हमला हुआ था। पुलिस टीम एक मामले में विकास दुबे और उसके साथियों को पकड़ने पहुंची थी। आरोप था कि पुलिस की कार्रवाई की जानकारी पहले से होने के कारण रास्ते में जेसीबी खड़ी कर पुलिस वाहनों की आवाजाही रोक दी गई थी।
पुलिसकर्मियों के आगे बढ़ने के दौरान घरों की छतों और आसपास के स्थानों से गोलीबारी की गई। इस हमले में क्षेत्राधिकारी समेत आठ पुलिसकर्मियों की मौत हुई थी। घटना के बाद पुलिस और विशेष कार्यबल ने विकास दुबे से जुड़े गिरोह के खिलाफ अभियान चलाया। इसके दौरान गिरोह से जुड़े कई आरोपियों की अलग-अलग मुठभेड़ों में मौत हुई।
बिकरू कांड के बाद विकास दुबे की तलाश और उसके खिलाफ कार्रवाई पूरे देश में चर्चा का विषय बनी थी। उज्जैन में पकड़े जाने के बाद उसे कानपुर लाया गया था, जहां 10 जुलाई को उसकी मौत हुई। हालांकि, उसकी मृत्यु के बावजूद संबंधित सरकारी प्रमाण पत्र जारी न होने के कारण दस्तावेजी स्तर पर कई प्रक्रियाएं लंबित थीं।
अब नगर निगम की ओर से मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद सरकारी रिकॉर्ड में भी उसकी मृत्यु औपचारिक रूप से दर्ज हो गई है। करीब छह साल तक अटकी रही प्रक्रिया में पुराने दस्तावेजों की पहचान संबंधी विसंगति को ठीक करना और स्वास्थ्य विभाग से रिकॉर्ड का सत्यापन प्रमुख कदम रहे। मृत्यु प्रमाण पत्र जारी होने के बाद परिवार से जुड़े बीमा और संपत्ति संबंधी मामलों में भी आगे की कानूनी प्रक्रिया का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।
