जयपुर: राजस्थान में सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के नाम पर होने वाले फर्जीवाड़े और वित्तीय अनियमितताओं पर अब पुलिस विशेष निगरानी रखेगी। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने सम्मान निधि, जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री बीमा योजना समेत विभिन्न सरकारी योजनाओं में धोखाधड़ी की जांच के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त करने और विशेष सेल गठित करने के निर्देश दिए हैं। पुलिस मुख्यालय में हुई अपराध समीक्षा बैठक में कानून-व्यवस्था, साइबर अपराध और महिला-बाल अपराध समेत कई मुद्दों पर विस्तृत समीक्षा की गई।
बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पुलिस कमिश्नर, रेंज आईजी, डीसीपी और जिला पुलिस अधीक्षक जुड़े। अधिकारियों ने वर्ष 2024, 2025 और जुलाई 2026 तक के अपराध आंकड़ों की तुलनात्मक समीक्षा की। समीक्षा में सामने आया कि 2024 की तुलना में 2026 के पहले सात महीनों में राज्य में कुल अपराध में 17.25 फीसदी की कमी दर्ज हुई है। इसी अवधि में संपत्ति संबंधी अपराधों में 32.32 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
कई गंभीर अपराधों में भी कमी
पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में पॉक्सो मामलों में 21.56 फीसदी, डकैती में 25.49 फीसदी और लूट के मामलों में 20.84 फीसदी की कमी आई है। वयस्कों से दुष्कर्म के मामलों में 10.67 फीसदी और हत्या के प्रयास के मामलों में 9.81 फीसदी की कमी दर्ज की गई।
अपराध नियंत्रण की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को लंबित मामलों के निस्तारण और गंभीर अपराधों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। महिला और बाल अपराध के मामलों में संवेदनशीलता के साथ जांच पूरी करने तथा निर्धारित समय सीमा का पालन करने पर भी जोर दिया गया।
साइबर अपराध पर विशेष निगरानी
बैठक में साइबर अपराध को बड़ी चुनौती मानते हुए सभी जिलों के साइबर थानों में स्वीकृत और उपलब्ध पुलिस बल की स्थिति की समीक्षा की गई। साइबर अपराध से संबंधित एफआईआर, गिरफ्तारियों और म्यूल बैंक खातों के खिलाफ कार्रवाई की जानकारी ली गई। इसके अलावा साइबर अपराध के हॉटस्पॉट और अपराध में इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड की पहचान कर कार्रवाई करने पर भी जोर दिया गया।
पुलिस नेतृत्व ने साइबर अपराध में इस्तेमाल होने वाले बैंक खातों और मोबाइल नंबरों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए। अधिकारियों से साइबर मामलों में शिकायत मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई और डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की व्यवस्था मजबूत करने को कहा गया।
विशेष अभियान में 1,248 वांछित आरोपी गिरफ्तार
राजस्थान पुलिस ने 20 जुलाई से 2 अगस्त तक चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 1,248 वांछित और संगठित अपराध से जुड़े आरोपियों को गिरफ्तार किया। अभियान के दौरान एनडीपीएस एक्ट के तहत 614, आर्म्स एक्ट में 226 और अवैध खनन से जुड़े 474 मामले दर्ज किए गए। साइबर अपराध के मामलों में भी 426 आरोपियों की गिरफ्तारी की गई।
पुलिस ने अधिकारियों को संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, अवैध हथियार और अवैध खनन के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रखने के निर्देश दिए।
ट्रैफिक नियम तोड़ने पर 3.73 लाख कार्रवाई
यातायात नियमों के उल्लंघन के खिलाफ भी व्यापक कार्रवाई की गई। पुलिस के अनुसार, कुल 3,73,104 कार्रवाई दर्ज की गईं। इनमें मोटर वाहन अधिनियम के तहत 1,69,089, बिना हेलमेट वाहन चलाने पर 87,357 और ओवरस्पीडिंग के 80,023 मामले शामिल हैं।
बैठक में नेक्स्ट-जेन ई-चालान सिस्टम लागू करने की तैयारियों को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। इसका उद्देश्य यातायात उल्लंघनों की निगरानी और कार्रवाई की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी तथा डिजिटल बनाना है।
सोशल मीडिया पर भी कार्रवाई
डिजिटल सुरक्षा के मोर्चे पर पुलिस ने महिला एवं बाल अपराध से संबंधित 98.8 फीसदी आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट हटवाने का दावा किया। वहीं, सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की धमकी से जुड़े 88.8 फीसदी सोशल मीडिया पोस्ट भी हटवाए गए।
सरकारी योजनाओं में फर्जीवाड़े के लिए प्रस्तावित स्पेशल सेल को लेकर पुलिस अब अलग-अलग विभागों और योजनाओं से जुड़े मामलों की निगरानी के लिए तंत्र तैयार करेगी। नोडल अधिकारियों की नियुक्ति के बाद संदिग्ध लाभार्थियों, फर्जी दस्तावेजों, गलत दावों और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े मामलों की पहचान कर कार्रवाई की जा सकेगी। इससे कल्याणकारी योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचाने और सरकारी धन की हेराफेरी रोकने की दिशा में पुलिस की भूमिका बढ़ने की उम्मीद है।
