वाराणसी: उत्तर प्रदेश के वाराणसी में शादी के इच्छुक युवक-युवतियों को मैट्रिमोनियल सेवा के नाम पर ठगने वाले एक कथित संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। कैंट पुलिस और साइबर सेल ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए फर्जी कॉल सेंटर संचालित करने वाले इस गिरोह की सरगना समेत 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में आरोप है कि गिरोह ने हरियाणा, राजस्थान, तेलंगाना, चंडीगढ़, पंजाब, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश सहित सात राज्यों के लगभग 700 युवक-युवतियों को अपना शिकार बनाया और सदस्यता तथा पंजीकरण शुल्क के नाम पर करीब ₹10 लाख की ठगी की।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का संचालन ‘शुभ मैट्रिमोनियल’ नाम से किया जा रहा था। इसकी कथित सरगना काजीरसराय निवासी रागिनी देवी है, जो विंध्यवासिनी नगर कॉलोनी स्थित एक कार्यालय से फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रही थी। आरोप है कि यहां से टेली-कॉलर्स के माध्यम से विवाह के इच्छुक लोगों से संपर्क कर उन्हें उपयुक्त जीवनसाथी उपलब्ध कराने का भरोसा दिया जाता था और विभिन्न शुल्कों के नाम पर ऑनलाइन भुगतान कराया जाता था।
मामले का खुलासा दो महिला पीड़ितों की शिकायत के बाद हुआ। पुलिस के अनुसार, एक शिकायतकर्ता से चार किस्तों में ₹7,000 और दूसरी से ₹3,500 सदस्यता शुल्क के रूप में जमा कराया गया। आरोप है कि भुगतान के बावजूद न तो किसी उपयुक्त युवक या युवती का वास्तविक संपर्क उपलब्ध कराया गया और न ही जमा की गई राशि वापस की गई। शिकायतों के आधार पर साइबर सेल ने तकनीकी जांच शुरू की, जिसके बाद पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ।
जांच में सामने आया कि आरोपी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और विभिन्न मैट्रिमोनियल वेबसाइटों से संभावित ग्राहकों का डेटा जुटाते थे। इसके बाद फर्जी महिला प्रोफाइल तैयार की जाती थीं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की सहायता से संपादित तस्वीरों का इस्तेमाल कर प्रोफाइल को अधिक विश्वसनीय बनाया जाता था। महिला टेली-कॉलर्स पीड़ितों से लगातार संपर्क बनाए रखती थीं और विश्वास जीतने के बाद उन्हें आजीवन सदस्यता, प्रीमियम रजिस्ट्रेशन, प्रोफाइल सत्यापन तथा अन्य सेवाओं के नाम पर भुगतान करने के लिए प्रेरित करती थीं।
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पुलिस के अनुसार, कॉल सेंटर में कार्यरत युवतियों को प्रतिदिन 20 से अधिक लोगों को कॉल करने का लक्ष्य दिया जाता था। जितनी अधिक वसूली होती थी, उसके आधार पर उन्हें कमीशन भी दिया जाता था। गिरोह समाचार पत्रों में भी आकर्षक विज्ञापन प्रकाशित कराता था, जिनमें विवाह योग्य युवक-युवतियों के भ्रामक विवरण दिए जाते थे। विज्ञापन देखकर संपर्क करने वाले लोगों को आरोपी स्वयं को शुभ मैट्रिमोनियल का प्रतिनिधि बताकर विश्वास में लेते थे।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 27 मोबाइल फोन, एक टैबलेट, तीन चेकबुक, एक पासबुक, पांच डेबिट कार्ड, चार बिल वाउचर, तीन क्यूआर कोड, कई रजिस्टर, किराया अनुबंध, उद्यम पंजीकरण दस्तावेज तथा शुभ मैट्रिमोनियल के पंजीकरण फॉर्म बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों की जांच में अब तक लगभग 700 ग्राहकों का रिकॉर्ड और करीब ₹10 लाख के वित्तीय लेनदेन के संकेत मिले हैं। पुलिस डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों और ऑनलाइन भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड का फोरेंसिक विश्लेषण कर रही है ताकि पूरे नेटवर्क की वित्तीय गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
गिरफ्तार आरोपियों में रागिनी देवी के अलावा आराध्या शर्मा, ज्योति सिंह, रूबी, सपना यादव, महक, शमा, विधि श्रीवास्तव, रायमा परवीन और अजमत फातिमा शामिल हैं। सभी आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि क्या इस नेटवर्क की शाखाएं अन्य शहरों में भी संचालित हो रही थीं और क्या ठगी की रकम अन्य बैंक खातों के माध्यम से आगे भेजी गई।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि विवाह संबंधी साइबर ठगी के मामलों में अपराधी भावनात्मक विश्वास का लाभ उठाकर लोगों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी मैट्रिमोनियल संस्था को भुगतान करने से पहले उसकी वैधता, पंजीकरण और ग्राहक समीक्षाओं की स्वतंत्र रूप से जांच करें। केवल ऑनलाइन प्रोफाइल या फोन पर किए गए दावों के आधार पर धनराशि जमा न करें और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि सामने आने पर तुरंत 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आगे और भी महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं।
