न्यूयॉर्क: वैश्विक दवा एवं स्वास्थ्य उत्पाद निर्माता जॉनसन एंड जॉनसन (J&J) ने अपने टैल्क आधारित उत्पादों, विशेषकर बेबी पाउडर, से अंडाशय के कैंसर होने के आरोपों से जुड़े शेष मुकदमों के निपटारे के लिए 5.5 अरब डॉलर (करीब ₹52,000 करोड़) के समझौते का प्रस्ताव रखा है। कंपनी का कहना है कि यह समझौता तभी प्रभावी होगा, जब शेष दावेदारों में से कम से कम 95 प्रतिशत इसकी शर्तों को स्वीकार कर लेंगे। यदि आवश्यक समर्थन नहीं मिला तो कंपनी को अदालतों में कानूनी लड़ाई जारी रखनी पड़ सकती है।
कंपनी पिछले लगभग एक दशक से टैल्क उत्पादों को लेकर हजारों मुकदमों का सामना कर रही है। इन मामलों में आरोप लगाया गया है कि लंबे समय तक टैल्क आधारित उत्पादों के इस्तेमाल से कुछ महिलाओं में अंडाशय के कैंसर का खतरा बढ़ा। हालांकि जॉनसन एंड जॉनसन लगातार इन आरोपों से इनकार करती रही है और उसका कहना है कि उसके टैल्क उत्पाद सुरक्षित हैं तथा अनेक वैज्ञानिक अध्ययनों में उनके कैंसर का कारण होने का कोई निर्णायक प्रमाण नहीं मिला है।
प्रस्तावित समझौते के तहत यदि 95 प्रतिशत दावेदार सहमत हो जाते हैं तो कंपनी वर्ष 2027 में अधिकतम 3 अरब डॉलर (करीब ₹28,000 करोड़) की पहली किस्त का भुगतान करेगी। इसके बाद वर्ष 2028 से शेष राशि का चरणबद्ध भुगतान किया जाएगा। कंपनी का मानना है कि इस व्यवस्था से वर्षों से लंबित मुकदमों का व्यापक समाधान संभव हो सकेगा और सभी पक्षों को लंबी कानूनी प्रक्रिया से राहत मिलेगी।
यह जॉनसन एंड जॉनसन का इस विवाद को समाप्त करने का पहला प्रयास नहीं है। इससे पहले वर्ष 2025 में कंपनी की सहयोगी इकाई रेड रिवर टैल्क ने लगभग 9 अरब डॉलर (करीब ₹86,000 करोड़) के समझौते का प्रस्ताव रखा था। उस समय कंपनी ने अमेरिकी दिवालिया कानून की प्रक्रिया के माध्यम से मामलों का निपटारा करने की कोशिश की थी, लेकिन अमेरिकी दिवालिया अदालत ने उस प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। अदालत के फैसले के बाद कंपनी को नए विकल्पों पर विचार करना पड़ा और अब उसने नया समझौता प्रस्ताव सामने रखा है।
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कंपनी का कहना है कि मौजूदा प्रस्ताव का उद्देश्य लंबित दावों का निष्पक्ष और व्यावहारिक समाधान निकालना है। हालांकि समझौते के लागू होने के लिए 95 प्रतिशत दावेदारों की सहमति अनिवार्य रखी गई है। यदि यह शर्त पूरी नहीं होती है तो कंपनी को विभिन्न अदालतों में चल रहे मामलों का अलग-अलग बचाव करना होगा, जिससे कानूनी प्रक्रिया कई वर्षों तक जारी रह सकती है।
जॉनसन एंड जॉनसन के वैश्विक मुकदमा मामलों के उपाध्यक्ष एरिक हास ने कहा कि कंपनी का मानना है कि प्रस्तावित समझौता लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समापन करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। उनके अनुसार, यदि यह समझौता सफल होता है तो कंपनी अपना अधिक समय और संसाधन जीवनरक्षक दवाओं, चिकित्सा उपकरणों और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े नवाचारों के विकास पर केंद्रित कर सकेगी, बजाय इसके कि वह लगातार लंबी कानूनी लड़ाइयों में उलझी रहे।
दूसरी ओर, कई वादकारियों और उनके वकीलों का मानना है कि प्रभावित लोगों को उचित मुआवजा और न्याय मिलना आवश्यक है। ऐसे मामलों में अंतिम निर्णय दावेदारों की सहमति और अदालतों की कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े पैमाने पर सामूहिक समझौते अक्सर वर्षों तक चलने वाले मुकदमों का व्यावहारिक समाधान बन सकते हैं, लेकिन उनकी सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि प्रस्तावित शर्तें सभी पक्षों के लिए कितनी स्वीकार्य हैं।
फिलहाल कंपनी की ओर से रखा गया 5.5 अरब डॉलर का प्रस्ताव समीक्षा की प्रक्रिया में है। आने वाले महीनों में यह स्पष्ट होगा कि आवश्यक 95 प्रतिशत दावेदार इस समझौते के पक्ष में आते हैं या नहीं। यदि पर्याप्त समर्थन मिल जाता है तो यह वैश्विक स्तर पर सबसे चर्चित उत्पाद दायित्व मामलों में से एक के समाधान की दिशा में बड़ा कदम माना जाएगा, जबकि सहमति न बनने की स्थिति में कानूनी विवाद आगे भी जारी रहने की संभावना बनी रहेगी।
