नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET 2026 से ठीक पहले छात्रों और उनके परिवारों को निशाना बनाकर चलाए जा रहे एक संगठित ठगी रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। दिल्ली में एक बड़े ऑपरेशन के दौरान पुलिस ने 18 छात्रों को आरोपियों के चंगुल से मुक्त कराया है, जबकि इस पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह गिरोह छात्रों को MBBS में “गारंटीड एडमिशन” दिलाने और कथित तौर पर “लीक प्रश्नपत्र” उपलब्ध कराने का झांसा देकर मोटी रकम वसूल रहा था।
जांच में सामने आया है कि आरोपी छात्रों और उनके अभिभावकों को भरोसा दिलाते थे कि उनके पास परीक्षा से पहले असली प्रश्नपत्र उपलब्ध है और इसके जरिए मेडिकल कॉलेज में सीट सुनिश्चित कराई जा सकती है। इसके बदले प्रति छात्र ₹20 से ₹30 लाख तक की मांग की जाती थी। आरोपियों ने कई परिवारों से एडवांस रकम, 10वीं और 12वीं की मार्कशीट, और यहां तक कि खाली हस्ताक्षरित चेक भी अपने कब्जे में ले लिए थे।
इस पूरे मामले का खुलासा 2 मई को मिला एक अहम इनपुट मिलने के बाद हुआ, जिसमें दूसरे राज्य की पुलिस ने दिल्ली में सक्रिय एक संदिग्ध के बारे में जानकारी साझा की थी। इसके बाद तकनीकी निगरानी के जरिए आरोपियों की लोकेशन ट्रैक की गई और महिपालपुर एक्सटेंशन इलाके के कई होटलों में छापेमारी की गई। इसी दौरान इस गिरोह के मुख्य सदस्यों तक पहुंच बनाई गई और उन्हें हिरासत में लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य भूमिका संतोष कुमार जायसवाल की बताई जा रही है, जिसने पूरे रैकेट की योजना तैयार की थी। उसके साथ संत प्रताप सिंह लॉजिस्टिक्स और ठहरने की व्यवस्था संभाल रहा था, जबकि विनोद भाई भीखा भाई पटेल छात्रों को जोड़ने और परिवारों तक पहुंचने का काम करता था। एक अन्य आरोपी, डॉ. अखलाक आलम उर्फ गोल्डन आलम, कथित तौर पर पुराने प्रश्नपत्रों और कोचिंग सामग्री के आधार पर नकली पेपर तैयार करता था।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी छात्रों को उनके अभिभावकों से दूर ले जाकर “परीक्षा की तैयारी” के नाम पर अलग-अलग स्थानों पर रखते थे। एक विशेष कार्रवाई के तहत गाजियाबाद के एक अस्पताल के पास जाल बिछाकर तीन छात्रों को छुड़ाया गया और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया गया। इसके बाद गाजियाबाद के एक फ्लैट पर छापेमारी कर 15 और छात्रों को मुक्त कराया गया, जिनमें कई नाबालिग भी शामिल थे।
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अधिकारियों के अनुसार, सभी छात्रों की काउंसलिंग कराई गई और उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई। बताया जा रहा है कि कई छात्र मानसिक दबाव में थे, क्योंकि उन्हें लगातार भरोसा दिलाया जा रहा था कि बिना इस “सिस्टम” के वे परीक्षा में सफल नहीं हो पाएंगे।
छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 149 पन्नों का कथित प्रश्न-उत्तर सामग्री बरामद की गई, जो जांच में फर्जी पाई गई। इसके अलावा तीन खाली हस्ताक्षरित चेक और कई अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। इन सभी साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।
इस गिरोह का काम करने का तरीका बेहद सुनियोजित था, जिसमें छात्रों की महत्वाकांक्षाओं और प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव का फायदा उठाया गया। झूठे वादों, फर्जी सामग्री और मनोवैज्ञानिक दबाव के जरिए यह नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय बताया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट के तार अन्य शहरों से भी जुड़े हो सकते हैं। बैंकिंग लेनदेन, कॉल डिटेल और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच कर पूरे नेटवर्क का विस्तार समझने की कोशिश की जा रही है। आने वाले दिनों में और लोगों के शामिल होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा रहा।
मामले में संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज कर लिया गया है और आगे की कार्रवाई जारी है। अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे ऐसे किसी भी झांसे में न आएं, खासकर जब बात प्रतियोगी परीक्षाओं की हो।
यह घटना एक बार फिर यह दर्शाती है कि किस तरह संगठित गिरोह शिक्षा क्षेत्र में सेंध लगाकर बड़े पैमाने पर आर्थिक और मानसिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए सख्त निगरानी, डिजिटल ट्रैकिंग और जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया है।
फिलहाल, जांच जारी है और अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले की हर एंगल से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
