रांची (झारखंड): झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए कई महत्वपूर्ण खुलासे किए हैं। जांच एजेंसी के अनुसार, परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों के आदान-प्रदान में नियमों का उल्लंघन होने के संकेत मिले हैं। सीआईडी का दावा है कि तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीडीपीएल (टीएसआर डाटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड) के कर्मचारी मो. उस्मान को व्हाट्सएप के माध्यम से आंसर-की भेजी थी। पूछताछ के दौरान श्वेता गुप्ता इस संबंध में कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सकीं।
सीआईडी के अनुसार, परीक्षा से संबंधित संवेदनशील दस्तावेजों के आदान-प्रदान के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। नियमानुसार ऐसे गोपनीय दस्तावेज हार्डडिस्क, पेन ड्राइव या सुरक्षित माध्यम से उपलब्ध कराए जाने चाहिए थे, लेकिन जांच में व्हाट्सएप चैट के जरिए जानकारी साझा किए जाने की बात सामने आई है। अब जांच एजेंसी इन डिजिटल रिकॉर्ड, चैट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच कर रही है ताकि पूरे मामले की कड़ियां जोड़ी जा सकें।
पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने बताया कि जेपीएससी परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी टीडीपीएल एजेंसी को बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के केवल नॉमिनेशन के आधार पर दी गई थी। उनके अनुसार, कंपनी का चयन फाइल में दिए गए आदेश के आधार पर किया गया था और एजेंसी की पृष्ठभूमि की विस्तृत जांच नहीं की गई थी। सीआईडी अब इस बात की भी जांच कर रही है कि परीक्षा संचालन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से पहले नियमों और प्रक्रियाओं का पालन क्यों नहीं किया गया।
जांच एजेंसी के अनुसार, इस मामले में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। इसके अलावा बड़ी संख्या में डिजिटल उपकरण जब्त किए गए हैं, जिनमें मोबाइल फोन, कंप्यूटर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस शामिल हैं। इन उपकरणों को फोरेंसिक जांच के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या छापेमारी या जांच शुरू होने से पहले डिजिटल साक्ष्यों को नष्ट करने या छिपाने का प्रयास किया गया था।
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जेपीएससी परीक्षा में ओएमआर शीट से जुड़ी कथित गड़बड़ी को लेकर भी जांच में नए तथ्य सामने आए हैं। सीआईडी के अनुसार, तत्कालीन जेपीएससी अध्यक्ष एल ख्योंगते को जनवरी 2026 में ही करीब 500 ओएमआर शीट में कथित हेराफेरी की लिखित शिकायत मिली थी। यह शिकायत कर्नाटक निवासी एक व्यक्ति ने भेजी थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि परीक्षा संचालन कंपनी टीडीपीएल के कर्मचारी अभय तिवारी ने पैसे लेकर विभिन्न परीक्षाओं में गड़बड़ी की।
शिकायत पत्र में दावा किया गया था कि विज्ञापन संख्या 4/24 के तहत आयोजित फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर (FRO) प्रारंभिक परीक्षा की करीब 350 ओएमआर शीट और विज्ञापन संख्या 3/24 के तहत असिस्टेंट कंजरवेटर ऑफ फॉरेस्ट (ACF) प्रारंभिक परीक्षा की लगभग 150 ओएमआर शीट में हेराफेरी की गई। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि कुछ अभ्यर्थियों से पैसे लेकर ओएमआर शीट में बदलाव किए गए। पत्र में सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की मांग भी की गई थी।
सीआईडी अब यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत मिलने के बाद आयोग स्तर पर क्या कार्रवाई की गई और कथित गड़बड़ी को रोकने के लिए कोई कदम उठाया गया था या नहीं। जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों, निजी एजेंसी के कर्मचारियों और अन्य संदिग्ध लोगों की भूमिका की भी समीक्षा कर रही है।
अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच अभी जारी है। डिजिटल साक्ष्य, दस्तावेजों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के आपसी संपर्कों की जांच के बाद ही पूरे नेटवर्क की वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। यदि जांच में किसी अन्य अधिकारी, कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
