नई दिल्ली। चोरी या निष्क्रिय पैन और आधार विवरण का इस्तेमाल कर फर्जी वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) पंजीकरण कराने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने देशभर में जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि निर्दोष लोगों के पहचान दस्तावेजों का दुरुपयोग कर उनके नाम पर फर्जी कारोबार खड़े किए जाने से न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है, बल्कि संबंधित लोगों पर भारी कर देनदारी डालकर उन्हें अनावश्यक परेशानी में भी डाला जा रहा है।
न्यायमूर्ति अनिल खेतरपाल और न्यायमूर्ति शैल जैन की खंडपीठ ने अधिकारियों को इस समस्या से पूरी गंभीरता से निपटने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि व्यवस्था लागू करने में कोई व्यावहारिक कठिनाई सामने आती है तो संबंधित अधिकारी अपनी आपत्ति अदालत के समक्ष रख सकते हैं।
मामले की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता तरुण गुलाटी की ओर से फर्जी जीएसटी पंजीकरण रोकने के लिए कई सुझाव अदालत के सामने रखे गए। अदालत ने संबंधित अधिकारियों को इन सुझावों की भी जांच करने का निर्देश दिया। मामला उन याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें एक याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि किसी अन्य व्यक्ति ने उसके पैन और आधार विवरण का कथित रूप से दुरुपयोग कर जीएसटी पंजीकरण हासिल कर लिया।
अदालत ने पहले भी ऐसे एक मामले का संज्ञान लेते हुए आशंका जताई थी कि यदि इस तरह की धोखाधड़ी पर प्रभावी रोक नहीं लगाई गई तो बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों के नाम पर फर्जी जीएसटी पंजीकरण कराए जा सकते हैं। इसके बाद उनके नाम पर भारी कर देनदारी पैदा होने का खतरा है।
सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि फिलहाल जीएसटी पंजीकरण के लिए बायोमेट्रिक आधार सत्यापन केवल उन्हीं आवेदनों में किया जा रहा है, जिन्हें प्रणाली जोखिम वाले आवेदन के तौर पर चिह्नित करती है। इसके लिए अलग-अलग मानकों और आंकड़ा विश्लेषण का इस्तेमाल किया जाता है।
पीठ ने वित्त मंत्रालय में राज्य मंत्री की ओर से राज्यसभा में दी गई जानकारी का भी संज्ञान लिया। आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2023-24 में चोरी या निष्क्रिय पैन और आधार विवरण से जुड़े 2,800 फर्जी जीएसटी पंजीकरण पकड़े गए थे। इन मामलों में ₹15,085 करोड़ की कर चोरी का पता चला। वित्त वर्ष 2024-25 में ऐसे 1,654 फर्जी पंजीकरण सामने आए और इनमें ₹13,109 करोड़ की कर चोरी का पता चला। यानी दो वित्त वर्षों में कुल 4,454 मामलों में ₹28,194 करोड़ की कर चोरी सामने आई।
अदालत ने कहा कि भले ही अधिकारियों की ओर से यह बताया गया हो कि जीएसटी पंजीकरण के लिए आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन अनिवार्य किया जा चुका है, लेकिन एक साल से अधिक समय बीतने के बावजूद यह व्यवस्था पूरी तरह लागू होती दिखाई नहीं दे रही है। इसी वजह से चोरी या निष्क्रिय पहचान विवरण का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीकरण के मामले जारी हैं।
पीठ ने यह भी दर्ज किया कि सुनवाई के दौरान अधिकारियों के वकील बायोमेट्रिक आधार सत्यापन को सभी जीएसटी पंजीकरण के लिए अनिवार्य करने में किसी ठोस व्यावहारिक कठिनाई की जानकारी नहीं दे सके। इसके बाद अदालत ने इसे तत्काल प्रभाव से लागू करने का राष्ट्रव्यापी निर्देश जारी किया।
फर्जी पंजीकरण रोकने के लिए सुझाए गए उपायों में आधार डेटाबेस से आवेदक की अनिवार्य चेहरा पहचान, पैन और आधार का वीडियो आधारित सत्यापन, पंजीकरण के दौरान इस्तेमाल किए गए इंटरनेट पते और उपकरण के स्थान से जुड़ी जानकारी सुरक्षित रखना तथा प्रस्तावित कारोबारी परिसर का भौतिक सत्यापन शामिल है।
इसके अलावा आयकर विभाग के साथ वास्तविक समय में आंकड़े साझा करने और किसी व्यक्ति के पैन विवरण का जीएसटी पंजीकरण में इस्तेमाल होने पर संबंधित पैन धारक को तत्काल सूचना भेजने का सुझाव दिया गया है। कारोबार के पंजीकृत कारोबार में अचानक और असामान्य वृद्धि को भी जोखिम संकेतक के रूप में चिह्नित करने की बात कही गई है।
सुझावों में आधार धारक से प्रस्तावित कारोबार की वास्तविकता की तत्काल पुष्टि, डिजिलॉकर के जरिये अलर्ट, पैन-आधार में असंगति और पहली बार इस्तेमाल किए जा रहे विवरणों के लिए जोखिम मानक तथा आवेदक की पहचान और प्रस्तावित कारोबार की पुष्टि करने वाले पहचान योग्य व्यक्तियों का विवरण लेना भी शामिल है।
अदालत ने मामले को आगे की सुनवाई के लिए 22 सितंबर को सूचीबद्ध किया है। अधिकारियों को तब तक व्यवस्था लागू करने में आने वाली किसी भी व्यावहारिक समस्या को अदालत के सामने रखने की अनुमति दी गई है।
