वॉशिंगटन: अमेरिका के H-1B वीजा कार्यक्रम को लेकर चल रही जांच के बीच ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे केवल धोखाधड़ी का मामला नहीं बल्कि एक व्यापक आपराधिक नेटवर्क करार दिया है। अमेरिकी श्रम विभाग (Department of Labor) के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी’एस्पोसिटो ने कहा कि H-1B कार्यक्रम से जुड़े कथित अनियमितताओं की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और इसके निष्कर्ष सामने आने पर अमेरिकी जनता बेहद नाराज हो सकती है। उन्होंने संकेत दिया कि जांच के बाद इस कार्यक्रम से जुड़े कानूनों और नीतियों में बड़े बदलाव की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक साक्षात्कार में डी’एस्पोसिटो ने कहा कि जांच अभी जारी है, इसलिए वह इसके सभी पहलुओं का खुलासा नहीं कर सकते। हालांकि उन्होंने दावा किया कि जांच के दौरान सामने आ रहे तथ्यों से संकेत मिलता है कि कथित अनियमितताओं का नेटवर्क अमेरिका की सीमाओं से बाहर तक फैला हुआ है। उनके अनुसार, जांच एजेंसियों ने कई राज्यों में तलाशी अभियान चलाए हैं, जहां कथित H-1B धोखाधड़ी से जुड़े मामलों की जांच करते हुए अन्य आपराधिक गतिविधियों के भी सुराग मिले हैं। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान हथियार भी बरामद किए गए हैं और विभिन्न मामलों के बीच संभावित संबंधों की पड़ताल की जा रही है।
डी’एस्पोसिटो ने कहा कि हाल ही में H-1B धोखाधड़ी के खिलाफ शुरू किए गए विशेष अभियान की पृष्ठभूमि में बड़ी संख्या में प्राप्त शिकायतें और सूचनाएं हैं। उनके मुताबिक, कई लोगों ने संभावित अनियमितताओं की जानकारी अधिकारियों को दी, जिसके बाद व्यापक जांच शुरू की गई। उन्होंने कहा कि एजेंसियां हर सुराग की गहराई से जांच कर रही हैं और किसी भी पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। उनके शब्दों में, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस पूरे मामले की जटिलता और व्यापकता सामने आ रही है।
हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जांच का केंद्र बिंदु विदेशी कर्मचारी नहीं हैं। डी’एस्पोसिटो के अनुसार, H-1B वीजा पर अमेरिका आने वाले कई पेशेवर स्वयं इस व्यवस्था के शिकार हैं और उन्हें दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अनेक कंपनियां कम लागत पर कुशल श्रमिक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस व्यवस्था का कथित रूप से लाभ उठाती हैं। यदि किसी विदेशी कर्मचारी को समान कार्य के लिए अमेरिकी कर्मचारी की तुलना में 25 से 30 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है, तो बड़ी संख्या में कर्मचारियों के स्तर पर कंपनियों को भारी आर्थिक लाभ मिलता है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ बड़ी कंपनियां सस्ते श्रम के लिए इस प्रणाली का दुरुपयोग करती रही हैं, जबकि विदेशी कर्मचारी केवल उस व्यवस्था का हिस्सा बन जाते हैं जिसे उन्होंने “खतरनाक शतरंज का खेल” बताया। उनके अनुसार, वास्तविक जिम्मेदारी उन संस्थाओं और नीतिगत व्यवस्थाओं की है जिन्होंने लंबे समय तक संभावित अनियमितताओं को प्रभावी ढंग से नहीं रोका।
डी’एस्पोसिटो ने संघीय सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यदि समय रहते निगरानी और प्रवर्तन प्रभावी ढंग से किया जाता, तो कथित दुरुपयोग इतने बड़े स्तर तक नहीं पहुंचता। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा पर्याप्त निगरानी नहीं किए जाने और कुछ कंपनियों की कथित रणनीतियों के कारण अमेरिकी श्रम बाजार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है। उनका दावा था कि इससे अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसर प्रभावित हुए हैं और प्रतिस्पर्धा का संतुलन भी बिगड़ा है।
H-1B वीजा कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका में उच्च कौशल वाले विदेशी पेशेवरों, विशेषकर प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा और अन्य विशेष क्षेत्रों में कार्यरत कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण माध्यम माना जाता है। बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर भी इसी कार्यक्रम के तहत अमेरिका में कार्यरत हैं। इसलिए इस जांच और संभावित नीतिगत बदलावों पर वैश्विक उद्योग, तकनीकी कंपनियों और विदेशी कर्मचारियों की नजर बनी हुई है।
फिलहाल अमेरिकी अधिकारियों ने जांच से जुड़े विस्तृत साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किए हैं और न ही किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा की है। हालांकि जांच एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे आवश्यक कानूनी कदम उठाए जाएंगे। इस बीच H-1B कार्यक्रम के भविष्य, श्रम नीतियों में संभावित बदलाव और विदेशी पेशेवरों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर अमेरिका में बहस तेज हो गई है।
